पिता अपनी बेटी के चेहरे पे आनंद देखने के लिए कुछ भी करेगा | Sunder-vichar

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पिता अपनी बेटी के चेहरे पे आनंद देखने के लिए कुछ भी करेगा

पिता अपनी बेटी के चेहरे पे आनंद देखने के लिए कुछ भी करेगा | Sunder-vichar

शाम को ७ बजे के आस-पास मै अपने मित्र के साथ होटल में चाय पी रहा था.
वही मेरे आगे वाले टेबल पर एक आदमी और उसके साथ दस ग्यारह साल की
लड़की बैठी थी.

आदमी पहनावे से एकदम गरीब… खुदाई काम वाला मजदूर लग रहा था…
बाल बिखरे और लंबे थे. शर्ट फटा हुवा था. कुछ बटने गायब थी…
पैंट भी मैला ही था. लेकिन लड़की का फ्रॉक साफ – सुथरा धुला हुवा था.
और उसने बालों में दो चुटिया भी लगाई थी.

लड़की बहुत आनंदित थी… बड़े ही आश्चर्य उसके टेबल के उपर लगे
पंखे को देख रही थी… जो उसे ठंडी ठंडी हवा दे रहा था.
और होटल के चारो और नजर घुमा रही थी. आरामदायक गद्दिवाले कुर्सी पर
बैठकर वो और भी आनंदित दिख रही थी…

तभी वेटर ने साफ सुथरी कांच की दो गिलास टेबल पर रख दी.

दूसरा वेटर उसमे ठंडा पानी भरने लगा.
फिर तीसरा वेटर आर्डर लेने आया. उस आदमी ने अपनी लड़की के लिये
एक पिज़्ज़ा लाने का आर्डर दिया. यह आर्डर सुनकर लड़की के चेहरे की
प्रसन्नता और बढ़ गई थी…

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और आपके लिए…?
वेटर ने पूछा.. नहीं, मुझे कुछ नहीं चाहिये…
उस आदमी ने कहा.

थोड़ी देर में ही गरमा गरम बड़ा वाला, फुला हुआ पिज़्ज़ा बॉक्स
के साथ में टेबल पर आ गया. लड़की पिज़्ज़ा खाने में व्यस्त हो गई.
और लड़की चेहरे के आनंद को देखते हुए वह आदमी पानी पी रहा था..

इतने में ही उस आदमी का फोन बजा. उसका फ़ोन साधा वाला था.
शायद फ़ोन में कुछ प्रॉब्लम भी थी… क्योंकि उसने फ़ोन को स्पीकर पर
कर के उल्टा कान को लगाया था. वो अपने मित्र से बात कर रहा था और
उसे बता रहा था की… आज उसकी बेटी का जन्मदिन है और वो उसे लेकर
हॉटेल में आया है…

आगे उसने बताया की उसने अपनी बेटी को वचन दिया था कि अगर वो
अपनी स्कूल में पहिला नंबर लेकर आयेगी तो वह उसे उसके जन्मदिन पर
पिज़्ज़ा खिलायेगा..और वो अब पिज़्ज़ा खा रही है..

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बेटी पिज़्ज़ा खाने में मग्न थी… और वो आदमी अपने मित्र से बात करने में…
बात बात में मित्र ने पूछा की तूने अपने लिए क्या मंगाया…? इस पर
उसका जवाब सुनकर मेरे दिल को झटकासा लगा… वो बोला नहीं रे…
हम दोनों कैसे खा सकते हैं…? मेरे पास इतने पैसे कहां है…?
मेरे लिये घर में चटनी – रोटी बनी है ना…

उसकी बातों सुनने में व्यस्त रहने के कारण मुझे गर्म चाय का

चटका लगा और मैं वास्तविकता में लौटा…
कोई कैसा भी हो… अमीर हो… या फिर गरीब हो…. दोनों ही अपनी
बेटी के चेहरे पर आनंद देखने के लिये कुछ भी कर सकते हैं…!

मैं उठा और काउंटर पर जाकर अपनी चाय और दो डोसे के पैसे दिये…
और कहा कि… उस आदमी को एक और पिज़्ज़ा दे दो.
उसने अगर पैसे के बारे में पूछा तो उसे कहना कि…
हमनें तुम्हारी बातें सुनी आज तुम्हारी बेटी का जन्मदिन है…!
और वो स्कूल में पहले नंबर पर आई है…
इसलिये होटल की तरफ से यह तुम्हारी बेटी के लिये उपहार है.

उसे आगे चलकर इससे भी अच्छी पढ़ाई करने को बोलना…
लेकिन गलती से भी मुफ्त शब्द का उपयोग
मत करना. उस पिता के “स्वाभिमान” को चोट पहुचेंगी…!

होटलवाला मुस्कुराया और बोला कि यह बिटिया और उसके पिता
आज हमारे अतिथि है. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद कि आपने हमें इस
बात जानकारी दी. अब उनके आदर – सत्कार की पूरी जिम्मेदारी
हमारी है. आप यह पुण्य कार्य और किसी अन्य जरूरतमंद के लिए
कीजिएगा.

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वेटर ने एक और पिज़्ज़ा उस टेबल पर रख दिया.
मैं बाहर से देख रहा था… उस लड़की का पिता हड़बड़ा गया…
और बोला कि…. मैंने तो एक ही डोसा बोला था…

तब होटल मालिक ने कहा कि… श्रीमान… आपकी बेटी पुरे स्कूल में
पहले नंबर पर आई है… इसलिये पुरस्कार में आज हॉटेल की ओर से
आप दोनों को पिज़्ज़ा दिया जा रहा है. उस पिता की आँखे भर आई…
और उसने अपनी लड़की को कहा… देखा बेटी…! ऐसी ही पढ़ाई करेंगी…
तो देख क्या-क्या मिलेगा…

उस पिता ने वेटर को कहा कि… मुझे यह डोसा बांधकर मिल सकता है क्या…?
इस पिज़्ज़ा को अगर मैं इसे घर ले गया तो… मैं और मेरी पत्नी दोनों
आधा- आधा मिलकर खा लेंगे, उसे ऐसा खाने को नहीं मिलता…

जी नहीं श्रीमान आप अपना पिज़्ज़ा यहीं पर आराम से खाइए. आपके घर
के लिए मैंने दुसरे तीन पिज्जे और मिठाइयों का एक पैक अलग से
बनवाया दिया है. आज आप घर जाकर अपनी बिटिया का जन्मदिन
बड़ी धूमधाम से मनाइएगा और मिठाईयां इतनी है कि…
आप पूरे मोहल्ले को बांट सकते हो.

यह सब सुनकर मेरी आँखे खुशी से भर आई…!
मुझे इस बात पर पूरा विश्वास हो गया कि…
जहां चाह वहां राह है.
अच्छे काम के लिए एक कदम आप आगे
तो बढ़ाइए. फिर देखिए आगे आगे होता है क्या…!
इंसान ही इंसान के काम आता है.

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