Hindi Kahani | सचमुच का भिकारी | Hindi Story | Sunder Vichar

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Hindi Kahani - सचमुच का भिकारी - Hindi Story - Sunder Vichar
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Hindi Kahani | सचमुच का भिकारी | Hindi Story | Sunder Vichar

आज अमर की शादी का दूसरा दिन था. नई नवेली दुल्हन रजनी चाय लेके
हॉल में आती है. तभी अमर भी हॉल में प्रवेश करता है.
सभी चाय पिते हुवे अमर और नई दुल्हन की हंसी उड़ाते रहते है.
दरवाजे की घंटी बजती है. अमर ठहाके लगाते हुवे दरवाजा खोलता है… 
तो सामने दहेज़ में मिली हुई नई गाड़ी की चाबी देने के लिए कंपनी का आदमी
आया हुवा रहता है. अमर नई चमचमाती गाड़ी को देखकर बहोत खुश होता है.
और मन ही मन लॉन्ग ड्राइव पे जाने का मन बनता है.
शाम को अमर रजनी को लेकर लॉन्ग ड्राइव पर लेकर निकलता है. अमर गाड़ी बहुत
तेज चलता है. रजनी ने उसे ऐसा करने से मना करती है. तो अमर हसते हुवे बोलता है….
अरे जानेमन….! मजे लेने दो आज तक दोस्तों की गाड़ी चलाई है. आज अपनी गाड़ी है
सालों की तमन्ना पूरी हुई ! मैं तो खरीदने की सोच भी नही सकता था.
इसीलिए तुम्हारे पिताजी से मांग करी थी. ये बोलते हुवे गाड़ी और तेज चलता है.
 
तभी अचानक अमर की नजर रोड क्रॉस करते हुए भिकारी पे पड़ती है.
बडी मुश्किल से ब्रेक लगाते… पूरी गाड़ी घुमाते अमर ने गाड़ी कंट्रोल किया.
गाड़ी बिलकुल उसके पास में ही रुक गई.
अमर उसको गाली देकर बोला – अबे मरेगा क्या…..भिखारी साले….
देश को बरबाद करके रखा है तुम लोगों ने…..!

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तब तक रजनी गाड़ी से निकलकर उस भिखारी तक पहुंची. देखा तो बेचारा 
अपाहिज था. उससे माफी मांगते हुए और पर्स से 200 रू. निकालकर उसे देकर 
बोली…. माफ करना काका वो हम बातों मे…… कही चोट तो नहीं आई…?
ये लीजिए मिठाई….. आराम से बैठिये.  हमारी कल ही शादी हुई है….
मिठाई खाइएगा और हमें आर्शिवाद दीजिएगा.
कहकर उसे साइड में फुटपाथ पर ले जाकर बिठा दिया. हाथ जोडकर फिर एक बार
माफ़ी मांगी और रजनी गाड़ी की और जाने लगी.  भिखारी दुआएं देने लगा.
 
रजनी गाड़ी मे वापस आकर बैठते हि अमर बोला :- तुम जैसों की वजह से इनकी हिम्मत 
बढती है. भिखारी को मुंह नही लगाना चाहिए….!
रजनी मुसकुराते हुए बोली – अमर.. भिखारी तो मजबूर था इसीलिए भीख मांग रहा था.
वरना सबकुछ सही होते हुए भी लोग भीख मांगते हैं दहेज लेकर….!
जानते हो खून पसीना मिला होता है गरीब लड़की के माँ – बाप का इस दहेज मे…
तुमने भी तो पापा से गाड़ी मांगी थी तो कौन भिखारी हुआ…वो मजबूर अपाहिज या….?
 
एक बाप अपने जिगर के टुकड़े को २० सालों तक संभालकर रखता है. दूसरे को दान 
करता है. जिसे कन्यादान “महादान” तक कहा जाता है ताकि दूसरे का परिवार चल 
सके. उसका वंश बढे और किसी की नई गृहस्थी शुरू हो. उसपर दहेज मांगना
भीख नही तो क्या है बोलो ..कौन हुआ भिखारी वो मजबूर या तुम जैसे दूल्हे…
 
अमर एकदम खामोश नीची नजरें किए शर्मिंदगी से सब सुनता रहा क्योंकि….
रजनी की बातों से पडे तमाचे ने उसे बता दिया था कि कौन है सचमुच का भिखारी….!

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