अलग सोच | प्रेरणादायक कहानी | Motivational Story In Hindi
तो सावकार बहुत भला बुरा कहने लगा, तभी किसान की बेटी बहार से आई.
की लड़की से शादी का विचार आया.
जब बादल टूटते हैं… तब बारिश होती है.
जब मिट्टी टूटती है… तब खेत बनते हैं.
जब फसल टूटती है… तब अनाज बीज रूप में बनता है.
जब बीज टूटता है… तब नया पौधा बनता है.
इसलिए जब कभी भी आप… अपने को टूटा हुआ महसूस करें…
तो समझ लेना की.. जरूर ईश्वर
हमारा उपयोग बेहतर करना चाहते है.
हंस कर कुछ बोल दो…
हंस कर कुछ टाल दो…
जीवन में परेशानियां तो बहुत है…!
समय पर कुछ डाल दो.
यह वर्ष समुद्र मंथन सा लग रहा है…
इतना जहर निकल रहा है तो…
अमृत भी जरूर निकलेगा.
परिवार व्यक्ति का एक सुरक्षा कवच है…
इस कवच में रहकर व्यक्ति
आनंद और शांति का अनुभव करता है.
इस बार ठंड बहुत पड़ेगी, कारण….
पैसों की गरमी सबकी निकल गई है.
लंबी उम्र के लिए खुराक को आधी करें…
पानी को दुगुना करें…
व्यायाम को तीगुना करें…
हंसने को चौगुना करें…
और ईश्वर का ध्यान सौ गुना करें…!
जब कुम्हार मटका बनाता है तब
मटके को बाहर से तेज थपथपाता है…
और अंदर से मटके को बड़े प्यार से सहलाता है..
इसी तरह भगवान हमें बाहर से परेशानियाँ और तकलीफे दे कर
मजबूत बनाते हैं और अंदर से प्यार से थपथपाते हैं…
एक सुंदर और मजबूत व्यक्ति बनाने के लिए.
हमेशा अपने कुम्हार पर भरोसा रखिए…. वो हमे कभी टूटने नही देगा.

💓 कभी भी किसी का हृदय दुखे… ऐसी बात ना कहें…
⌚ वक़्त तो निकल जाता है… लेकिन बातें हमेशा याद रह जाती है…!
😈 इन्सान की लंबी जुबान और लंबा धागा, हरबार उलझ ही जाता हैं.
🙏 जिस दरवाजे पर ईश्वरीय- विचार के पहरेदार खड़े हों…
🙏 उस हृदय में कभी भी बुरे विचार प्रवेश नहीं कर सकते.
🙏 ये दुनियां आपके आचरण से बदलेगी… आपकी सलाह से नहीं.
🙏 इंसान का सबसे बड़ा धन उसका मनोबल है.
🙏 उपलब्धि का दिया कड़ी मेहनत से ही जलता है.
🙏 ज़िन्दगी इस प्रकार जियो कि… अगर कोई आपकी बुराई भी करे…
🙏 तो लोगों का उस पर यकीन ही ना करें.
🙏 कमजोर लोग तब रूक जाते हैं… जब वो थक जाते हैं.
और विजेता लोग तब रूकते हैं… जब वो जीत जाते हैं.
🙏 जिस मनुष्य का मन अभिमान से भरा हुवा है…
वह करोड़ो की भीड़ में भी हमेशा अकेला ही रहता है.
🙏 हमारी उलझनों का हल हमारे सिवाय किसी के पास भी नहीं है.
🙏 काम में भगवान का साथ मांगो, लेकिन भगवान मेरा ये काम कर दीजिये…
ऐसा मत मांगो.
🙏 जिस हाथ से कार्य अच्छा हो… वही हाथ एक तीर्थ ही है.
🙏 एक अच्छे हृदय से संबंधों को जीत सकते है… लेकिन अच्छे स्वभाव से
उसे जीवनभर निभा सकते है.
🙏 यदि मैं सुखी होना चाहता हूं तो… फिर मुझे कोई भी दुखी नहीं कर सकता.
🙏 दोषों को माफ़ कीया जा सकता हैं… यदि आपके पास उन्हें
स्वीकार करने का साहस हो.
🙏 ईमानदारी बरगद के पेड़ के समान है… जो बढ़ती देर से है…!
लेकिन चिरस्थायी रहती है.
🙏 अगर कोई इंसान आपको गुस्सा दिलाने में कामयाब होता हैं…
तो यकीनन आप उसके हाथ की कठपुतली हैं.
🙏 जिसके पास आशा हैं… वह हजारों बार हार कर भी हारता नहीं है.
🙏 किसी को कुछ देने के लिए अपना दिल बड़ा होना चाहिए…
हैसियत नहीं.
🙏 चाहे घर बड़ा रहे… या छोटा रहे… अगर मिठास ना हो तो…
इंसान क्या… चीटिंयां भी नहीं आती है.
🙏 इस जन्म का कमाया हुवा धन आप के अगले जन्म में काम नहीं आता…
लेकिन आपके पुण्य जन्मों -जन्म तक काम आते है.
🙏 जो आपको प्राप्त हैं वो ही आपके लिए पर्याप्त हैं….
इन दो शब्दों में जीवन में सुख बेहिसाब है.
🙏 गीता में साफ़ शब्दों में लिखा है की…
निराश मत होना… कमजोर तेरा वक़्त है तू नहीं…!
मैंने जीवन में सीखा….
(3) अगर मैं किसी की ज़्यादा देखभाल करूँगा तो…


कल धुप से परेशान…
आज तकलीफ बारिश से…
शिकायते बेशुमार है…
इंसान की आदत में…!
गांधीधाम से ट्रेन जैसे ही धीरे धीरे चलने लगी एक बुजुर्ग दम्पति एक हाथ में पेटी और
एक कपडे का थैला लिए Reservation वाले डब्बे के अंदर आ गये.
दरवाजे के पास वाले बेसींग के बाजु में बुजुर्ग बाई बैठ गयी. लेकिन आदमी के चहरे पे
एक अनजानासा डर था, और वो वैसे ही खड़ा रहा.
कुछ देर बाद गाड़ी फुल स्पीड से चलने लगी, टीसी टिकट चेक करते हुवे बुजुर्ग दम्पति के पास
जैसे ही गया, उसने अपनी जेब से जनरल का टिकट दिखाते हुवे अपने दोनों हाथ टीसी के
सामने जोड़ दिए.
जनरल का टिकट देखते ही टीसी जोर से बोला, ये जनरल का टिकट और तुम रिज़र्वेशन के
डब्बे में बैठ गए हो, अगला स्टेशन बचाव है, जैसे ही गाड़ी रुकेगी तुम जनरल के डब्बे में
चले जाना, वरना एक हजार की पेनाल्टी लगेगी, ये बोलके टीसी दुसरे डब्बे में चला गया.
ये दम्पति अपने बड़ी बेटी के घर जा रहे थे, दो साल पाहिले शादी हुयी थी और अभी वो
लगभग एक साल से बेटी के घर नहीं गए… नाही, बेटी मायके आई थी.
अभी चार दिन पाहिले बेटी के तरफ पहिला बेटा हुवा है, उसी नाती को देखने दोनों
पति – पत्नी बेटी के घर जा रहे थे.
मिल मालक ने बड़ी मुश्किल से दो दिन की छुट्टी और एक हजार रूपये एडवांस दिए थे,
मै उनसे बात कर रहा था, तभी टीसी वापस जा रहा था, जाते जाते कड़क शब्दों में फिर
सुचना दी की अगले स्टेशन पे जरूर उतर जाना,
मैंने टीसी को रोका और उन्हें विनंती की, सर बुजुर्ग आदमी है, सामान की पेटी और
ये थैला लेकर चाहते हुवे भी ये लोग जनरल डिब्बे में नहीं चढ़ सके,इसीलिए न चाहते हुए
मजबूरी में ये डिब्बे में चले आये,
तभी बुजुर्ग आदमी बिच में बोला, साहब मै ये सामान और अपनी पत्नी के साथ जनरल डिब्बे में
नहीं चढ़ सकता बहोत भीड़ है, मै यही कोने में खड़ा रहूँगा, बड़ी मेहरबानी होगी आपकी,
सुबह सुबह नडीयाल स्टेशन आएगा वहा उतर जाऊंगा साहब.
विनती करते हुए टीसी की तरफ दो सौ का नोट बढ़ाते हुए कहा, टीसी बोला दो सौ में कुछ
नहीं होता, एक हजार निकालो वरना उतर जाओ, पत्नी बोली साहब नाती को देखने जा रहे है
गरीब आदमी है साहब, इतने पैसे नहीं है हमारे पास, जाने दो ना साहब, ऐसा करो फिर
पाच सौ निकालो.
एक पेनाल्टी की रसीद बना देता हूँ, यही पे दोनों बैठे रहो, साहब… रसीद रहने दो, दो सौ रुपये
की नोट बढ़ाते हुए पति बोला, नहीं ये नहीं चलेगा, पेनाल्टी तो बनानी पड़ेगी,
टीसी डाटते हुए बोला जल्दी से पाच सौ निकालो, मेरा समय ख़राब मत करो, स्टेशन भी आ
रहा है, उतरकर जनरल डब्बे में चले जाव, उस बुजुर्ग आदमी ने पाच सौ रूपये टीसी को दिए,
आजू बाजु के कुछ यात्री जमा हो गए, टीसी और बुजुर्ग की बातो का मजा ले रहे थे, ऐसा मानो
उसने टीसी को पाच सौ नहीं… अपना दिल निकल कर दिया हो…!
बुजुर्ग दम्पति उदास होकर बैठ गए, मन ही मन रोने लगे, दोनों एक दुसरे के तरफ देख रहे थे,
कुछ देर बाद पत्नी बोली, अब वापस कैसे आयेंगे, क्या जवाई को पैसे मांगना पड़ेगा.
आदमी बोला नहीं – नहीं, दो सौ मै ज्यादा ही लाया था,
हम बेटी के घर पैदल ही जायेंगे, आते वक़्त लोकल गाड़ी से आयेंगे, और उस दिन शाम को खाना
नहीं खायेंगे, इसमें दो सौ रूपये दो एडजस्ट हो जायेंगे, लोकल से आयेंगे तो एक दिन की छुट्टी
ज्यादा होगी.
मालक जरूर दो बात सुनाएगा, अपने नाती के लिए इतना तो सह लूँगा, और हाँ हमने जो नाती
को दो-दो सौ देने का सोचा था ना…! अब हम दोनो मिलकर दो सौ रूपये देंगे, इस तरह
चार सौ एडजस्ट हो गए, पत्नी के आँखों से आंसू टपक रहे थे, ये देख पति की आँखे भी
छलक पड़ी.
भरे हुए गले से पति बोला, मन छोटा मत कर, जब हम बेटी को घर लायेंगे तब नाती को
दो सौ रूपये ज्यादा दे देंगे, पत्नी रोने लगी और रोते रोते कह रही थी….
इतना सुनती हु की ट्रेन को सरकार डिजिटल कर रही है.
डिब्बे में इंटरनेट है, हर स्टेशन में इंटरनेट, इसके साथ साथ एक दो डिब्बे
और जनरल के भी लगा देते तो… हम जैसे गरीब लोगो को टिकट होते हुवे भी
यु टीसी के सामने हाथ न जोड़ने पड़ते… और नाहीं अपमानित
होना पड़ता, न हमें भूका रहना पड़ता, न हमारे नाती को कम पैसे देना पड़ता.
दोनों की आँखे छलक रही थी, पति खुद की आँखे पोछते हुए बोला, अरी पगली….
हम गरीब आदमी हैं….. हमारा काम सलाह देने का नहीं… सरकार अच्छा जरूर
कर रही है, लेकीन बड़े लोगो की जरूरत को पूरा करते हुए ये भी सोचना
चाहिए की एक इस देश में हम जैसे गरीब भी यात्रा करते हैं.
विशाल जी ऑफिस से घर आये और आते ही पत्नी को आवाज लगायी…
अरी सुनती हो…! जल्दी से इधर आओ…!
आवाज सुनते ही विशाल जी की पत्नी हाथ मेँ पानी का गिलास लेकर
बाहर आयी और पत्नी के आते ही विशाल जी बड़े ही खुश होकर बोले…
अपनी निधि के लिए बहुत अच्छा रिश्ता आया है..
अच्छा भला सुखी और इज्जतदार परिवार है…
लडके का नाम अजय है.
विद्युत विभाग मे काम करता है.
बस… निधि बेटी हाँ कह दे तो दोनों की सगाई कर देते है.
उनको निधि एक ही लडकी थी… छोटा सा परिवार… तीन लोग…
घर मेँ हमेशा आनंद का वातावरण रहता था.
कभी कभार विशाल जी धूम्रपान और तम्बाकू सेवन की वजह से
उनकी पत्नी और बेटी के साथ कहा सुनी हो जाती थी…
लेकिन विशाल जी इसको हँसी मेँ निकाल देते थे.
उनकी बेटी निधि बहुत ही समझदार और संस्कारी लड़की थी
दसवी कक्षा में पास होने के बाद निधि, सिलाई काम करके
अपने पिता की सहायता करने की कोशिश करती थी.
निधि सिलाई और बच्चों की ट्युशन लेते हुवे स्वयं ग्रेजुएट हुईं…
अभी निधि एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रही है.
लेकिन विशाल जी बेटी के पगार से एक रुपया भी नहीं लेते थे.
और बेटी को कहते…. निधि बेटा…
तेरे पगार के पैसे तेरे पास ही रहने दे. भविष्य मेँ तेरे बहुत काम
आयेंगे.
आगे दोनो परिवार की सहमति से निधि और अजय का रिश्ता
तय हुवा. एक अच्छा सा दिन देखकर सगाई कर दी गई और
शादी का मुहूर्त भी निकलवा दिया.
अब शादी के 15 ही दिन रह गए थे. विशाल जी ने अपने बेटी को
पास में बिठाया और कहा… निधि बेटा, तेरे ससुर जी से मेरी बात हुई है…
उन्होने साफ साफ कहा है की… दहेज के रूप मेँ उन्हें रुपया… गहने…
या दूसरी कोई चीज….. ऐसा कुछ भी नही चाहिए…
तो बेटा तेरे शादी के लिए मेँने कुछ रुपये जमा किए है….
यह दो लाख रुपये मैँ तुझे देता हूँ. आगे तेरे भविष्य मेँ काम
आयेगे. इन पैसों को तू तेरे खाते मे जमा करवा देना.
ठीक है पापा बोलकर निधि अपने कमरे में चली गई.
समय निकल गया और वो शुभ दिन भी आ गया…
बारात भी आ गई…. पंडितजी ने विवाह विधि शुरु की…
थोड़ी देर बाद फेरे लेने का समय आया….
तभी निधि ने एकदम मीठे शब्दों में कहा… पंडितजी जी जरा रुकिए…
मुझे आप सभी के सामने मेँ मेरे पापा के साथ कुछ बात करनी है…
मेरे प्यारे पापा… आप ने मुझे लाड प्यार से बडा किया, पढाया,
लिखाया… खूब स्नेह भी दिया… इसका कर्ज तो मै कभी नहीं चुका
सकती. लेकिन अजय और मेरे ससुर जी की सहमति से आपने
दिया हुवा दो लाख रुपये का चेक मैँ आपको वापस दे रही हूँ.
इन रुपयों में से मेरी शादी के लिए… लिया हुवा उधार वापस दे देना
और दूसरा चेक तीन लाख जो मैंने अपनी पगार मेँ से बचत की है…
ये पैसे जब आप रिटायर होगेँ तब आपके काम आयेंगे पापा…
पापा…! मैँ नही चाहती कि आप को बुढापे मेँ
आपको किसी के आगे हाथ फैलाना पडे…!
अगर मैँ आपका लडका होता तब भी इतना तो करता
ना पापा…?
वहाँ पर मौजूद सभी लोंगो की नजर निधि पर थी…
पापा अब मैं आपसे जो दहेज मेँ मांगू वो दोगे…?
विशाल जी ने भारी आवाज मेँ कहा… हां बेटा…
इतना ही बोल सके.
तो पापा आप मुझे वचन दीजिये की…
आज के बाद आप सिगरेट को हाथ नही लगायेंगे….
तबांकु और सुपारी का व्यसन आज से छोड दोगे.
सब की मौजूदगी में दहेज मेँ बस इतना ही मांगती हूँ पापा…
विशाल जी या कोई भी लडकी का बाप मना कैसे करता…?
शादी मे लडकी की विदाई समय कन्या पक्ष को रोते देखा होगा…
लेकिन आज तो बारातियो कि आँखो मेँ आँसुओ कि धारा निकल चुकी थी.
मैँ दूर से निधि को लक्ष्मी रुप मे देख रहा था…!
501 रुपये का लिफाफा मैं अपनी जेब से नही निकाल पा रहा था….
साक्षात लक्ष्मी को मैं कैसे लक्ष्मी दूं…? लेकिन एक सवाल मेरे मन मेँ
जरुर उठा… भ्रूण हत्या करने वाले लोगो को निधि जैसी लक्ष्मी मिलेगी क्या…?
कृपया रोईए नही…! आंसू पोछिए और प्रेरणा लीजिये…!
भर उन्हात रस्त्यावर चालत आहात… घामाने चिंब झालेले आहात…
आणि तहानभुकेने अगदी व्याकुळ झालेले आहात. आता तुम्ही रस्त्यावर
चांगल्या पैकी सावली असलेले झाड शोधून तुम्हाला पाणीही हवे आहे.
इतक्यात तुम्हाला समोर एक झाड दिसत आहे. त्या झाडाजवळ जाताच
समोरच्या घरी पहिल्या मजल्यावर खिडकीत उभ्या असलेल्या माणसाकडे
तुमचे लक्ष जाते आणि तो माणूस तुम्हाला पाणी पाहिजे का…? असे विचारते…!
त्या क्षणी तुम्हाला काय वाटेल…? त्या माणसाबद्दल तुमचा अभिप्राय काय
असणार…?
मग तो माणुस खिडकी बंद करून तुम्हाला खाली गेट जवळ यायचा
इशारा करतो… घाईघाईने तुम्ही तिथे जाता पण नंतरची 10 मिनटे
कोणीही तिथे येत नाही…!
आता तुम्हाला त्या माणसा बद्दल काय वाटणार…?
हे तुमचे दुसरे अभिप्राय असणार आहे…
काही वेळाने तो माणूस तिथे येते आणि म्हणतो… माफ करा…
मला जरा उशीर झाला पण तुमची अवस्था बघून मी तुम्हाला
नुसत्याच पाण्याऐवजी लिंबू पाणी आणले आहे…!
आता तुमचे त्या माणसा बद्दल अभिप्राय काय असणार…?
आता तुम्ही एक घोट लिंबू पाणी घेता आणि तुमच्या लक्षात येते की…
अरे च्या…! यामध्ये साखर तर अजीबातच नाही आहे…!
आता तुमचे त्या माणसा बद्दल अभिप्राय काय असणार…?
तुमचा उतरलेला चेहरा पाहून तो माणूस खिशातून हळूच एक
साखरेचा छोटा पाऊच काढतो आणि म्हणतो… तुम्हाला साखर
चालते कि नाही… आणि किती चालते…
तुम्हाला जास्त गोड आवडत असेल कि नाही हा विचार करून
मी मुद्दामच आधी साखर घातली नाही आहे.
आता तुमचे त्या माणसाबद्दल काय अभिप्राय झाले असणार…!
आता विचार करा अवघ्या दहा ते वीस मिनिटातच तुम्हाला तुमचे
अभिप्राय… तुमचे विचार भरभर बदलावे लागत आहेत…!
अगदीच सामान्यातल्या सामान्य परिस्थितीत क्षणात आपले विचार…
आपले अभिप्राय… पूर्णतः चुकीचे ठरू शकतात.
तर मग कोणाबद्दल फारशी काहीच माहिती नसतांना…
तो माणुस पुढे कशा वागणार आहे… हे माहीत नसतांना…
फक्त वरवर पाहूनच त्याच्याबद्दल तातडीने समजूत करून घेणे
किती योग्य आहे…?
हे असे आहे की… जो पर्यंत समोरचा तुमच्या अपेक्षेप्रमाणे
वागत आहे…. तोपर्यंतच तो चांगला असतो…!
नाहीतर वाईट तर तो आहेच….?
सुंदर विचार मराठी, तुमचा अभिप्राय | Good thought In Marathi

इस बनावटी दुनिया में कुछ
सीधा सच्चा रहने दो…
उम्र जितनी हो जाए चाहे…
दिल को तो बच्चा रहने दो…
रिवाजो की भट्टी में पकी तो
जल्द चटकेगी जिंदगी…
मन की मिट्टी को थोडा सा तो
गीला – कच्चा रहने दो…!
सच्चे भक्त के जीवन में दो ही शब्द हैं…
और सारा जीवन उन्हे इन दो शब्दों के
बीच में बिताना है…
एक है… हरी – कृपा और
दूसरा है… हरी- इच्छा.
यदि अपने मन के अनुकूल है तो
समझ लीजिए हरी – कृपा
और जब मन के अनुकूल न हो तो
हरी- इच्छा.
कितनी बढ़िया बात है…
हरी-कृपा माने…
हमारी जो इच्छा है
उसे उन्होने पूरा कर दिया.
और हरी- इच्छा मतलब…
उनकी जो इच्छा हुई वह
उन्होने किया.
तो चाहे हमारी इच्छा वे पूरी करें या
चाहे अपनी इच्छा हमसे पूरी करावें…
चाहे आत्मा की इच्छा पूरी हो…
चाहे परमात्मा की इच्छा पूरी हो…
मेरे जीवन में कोई द्धन्द
नही होना चाहिए…
क्योंकि मेरे परमात्मा तो
सदैव ही मेरा भला ही चाहते हें.
प्रभु…! सुख देना तो बस…
इतना देना की…
अहंकार न आ जाए…
और दुःख देना तो बस…
इतना देना की
आस्था ना चली जाए…
श्री कृष्ण को प्रेम से जगाओ… आपका भाग्य जागेगा.
श्री कृष्ण को नित्य स्नान कराओ… तो आपके सब पाप धुल जाएँगे.
श्री कृष्ण को चरणामृत प्रेम से पान कराओ… आपकी मनोवृत्ति बदल जाएगी.
श्री कृष्ण को तिलक लगाओ… आपको सर्वत्र सम्मान मिलेगा.
श्री कृष्ण के चरणों का तिलक स्वयं भी लगाओ… आपका मन शांत होगा.
श्री कृष्ण को भोग लगाओ… आपको संसार के सभी भोग मिलेंगे.
श्री कृष्ण का प्रसाद स्वयं भी पाओ… आप निष्पाप हो जाओगे.
श्री कृष्ण के सम्मुख दीप जलाओ… आपका जीवन प्रकाशमान होगा.
श्री कृष्ण को धूप लगाओ… आपके दुख के बादल स्वत: छट जाएँगे.
श्री कृष्ण को पुष्प अर्पित करो… आपके जीवन की बगिया महकेगी…
श्री कृष्ण का भजन-पाठ करो… आपका यश बढ़ेगा.
श्री कृष्ण को नित्य प्रणाम करो… संसार आपके आगे झुकेगा.
श्री कृष्ण के आगे घंटनाद करो… आपकी दुष्प्रवृत्तियाँ दूर होंगी.
श्री कृष्ण के आगे शंखनाद करो… आपकी काया निरोगी रहेगी.
श्री कृष्ण को प्रेम से शयन कराओ… आपको चैन की नींद आएगी.
श्री कृष्ण के दर्शन करने नित्य मंदिर जाओ… आपके दुख में प्रभु दौड़े चले आएँगे.
श्री कृष्ण को अर्पण कर ही वस्तु का उपभोग करो… आपको परमानंद मिलेगा.
श्री कृष्ण को लाड़ – प्यार से खिलाओ… संसार आप पर रिझेगा.
श्री कृष्ण से ही माँगो… जो चाहोगे वो आपको मिलेगा.
श्री कृष्ण का प्रसाद मानकर सुख – दुख भोगो… आप सदा सुखी रहेंगे.
श्री कृष्ण का ध्यान करो… प्रभु अंत समय तक आपका ध्यान रखेंगे.
जय श्री कृष्ण
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे


सारे तनाव और उदासी का कारण मोह ही होता है.
अपने शरीर को मै न समझो… बल्कि अपनी आत्मा को मैं समझो.
क्योंकि आत्मा अजन्मा – अमर है.
अपने कर्म को कभी नहीं बल्क़ि कर्तापन और कर्मफल के विचार को ही छोड़ना है.
अपने सारे कर्मों को भगवान को अर्पण करके करना ही कर्म संन्यास है.
मैं कर्ता हूँ…! यह भाव ही अहंकार है. जिसे त्यागना और सम रहना ही ज्ञान मार्ग है.
अपने मन को आत्मसंयम के बिना नहीं जीता जा सकता…! और बिना मन जीते
योग नहीं हो सकता.
भक्ति का कारण त्रिकालदर्शी भगवान को जानना ही होना चाहिये. यही ज्ञानयोग है.
भगवान ही ज्ञान और ज्ञेय हैं. ज्ञेय को ध्येय बनाना योगमार्ग का द्वार है.
अपने जीव का लक्ष्य स्वर्ग नहीं भगवान से मिलन होना चाहिये.
परम कृपालु सर्वोत्तम ही नहीं बल्कि… अद्वितीय हैं.
यह जग भी भगवान का स्वरूप है. चिन्ताएँ मिटाने का प्रभुचिन्तन ही उपाय है.
बिना पूर्ण समर्पण और अनन्यता भक्ति नहीं हो सकती और बिना भक्ति भगवान्
नहीं मिल सकते.
हर शरीर में जीवात्मा परमात्मा का अंश है. जिसे परमात्मा का प्रकृतिरूप भरमाता है.
यही तत्व ज्ञान है.
प्रकृति प्रदत्त तीनों गुण बंधन देते हैं…! इनसे पार पाकर ही मोक्ष संभव है.
काया तथा जीवात्मा दोनों से उत्तम पुरुषोत्तम ही जीव का लक्ष्य हैं.
काम – क्रोध – लोभ से छुटकारा पाये बिना जन्म – मृत्यु के चक्कर से छुटकारा
नहीं मिल सकता.
त्रिगुणी जगत् को देखकर दु:खी नहीं होना चाहिये. बस… स्वभाव को सकारात्मक
बनाने का प्रयास करना चाहिये.
शरणागति और समर्पण ही जीव का धर्म है और यही है गीता का सार.
खाना बनाते हुए रसोई में ग्रहणियों को कई बार छोटी छोटी समस्याओं
का सामना करना पड़ता है. जो कभी कभी तो उनके लिए बड़ी सिरदर्द
बन जाती है.
निचे दिए गये टिप्स एक बार जरूर पढ़े… मुझे पूरा विश्वास है की
ये छोटे छोटे रसोई टिप्स आपका काम आसान भी कर देंगे
और काम सुविधाजनक भी हो जायेगा.
१. अगर फ्रिज में रखा हुवा… जैसे हरी सब्जी, पकी हुई सब्जी, खाना,
या फिर गुंथा हुवा आटा या जो भी हो उसे जितनी जरूरत हो
उतना एक बार में ही निकल ले… बार बार बहार निकलनेसे
और अंदर रखने से वह खाना या सब्जी जल्दी ख़राब
हो जाती है.
२. अक्सर नमकदानी में नमक जम जाता है. नमक नरम हो
जाता है. इससे बचने के लिए नमकदानी में ५-६ चावल के
दाने डाल दें.
३. फ्रिज में रखी हुई सभी खाद्य सामग्रियों को ढककर रखें.
४. अगर फ्रीज़र में बर्फ की ट्रे जैम कई है तो उसे जोर लगाकर न खिचे
और नाहीं किसी नुकीली वस्तु से निकले. उस ट्रे की निचे थोड़ी सी
ग्लिसरीन लगाये. ट्रे आसानी से निकल जाएगीं. और फ्रिजर में हमेशा
पोलिथिन बिछा कर ही बर्फ कि ट्रे रखें. ट्रे को निकालने में बिलकुल भी
परेशानी नही होगी.
५. दूध को एक – दो उबाल दे कर ही प्रयोग करें ज्यादा उबाल देने से
उसके पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं.
६. आटे कों दूध से गूँथ कर परांठे बनाएँ. परांठे अधिक खस्ता और
स्वादिष्ट बनेगे.
७. फ्रिज से आटा रोटी बनाने से दस मिनट पहले ही बाहर निकाल लें.
इस से आटा खींचेगा नहीं और आराम से रोटियां भी बनेगी.
८. एक कच्चा आलू चाकू की नोक पे छील कर लगा लें.
फिर प्याज़ काटे. इससे आँखों में आंसू नही आयेंगे.
९. बरसात के मौसम में बिस्कुट नरम हो जाते है. उनका कुरकुरापन
कायम रखने के लिए डिब्बे में एक चम्मच चीनी डाल दें, और
उसके ऊपर बिस्कुट रखें. लंबे समय तक बिस्कुट कुरकुरे रहेंगे.
10. अगर रसोईघर में उपयोग होनेवाले चाकू में जंग लग जाये तो…
उसे प्याज में १० से १५ मिनट घोंप के रखें. बाद में निकालकर
धो लिजिए. चाकू बिलकुल साफ़ हो जायेगा.
११. अगर किसी भी मसाले का दाग आपके हाथ में लग जाए तो…
कच्चा आलू काटकर रगड़िये धब्बे दूर हो जायेंगें.
१२. अगर आलू रखें रखें चिम गए हो.. या ढीले पड़ गए हों तो उन्हें
पानी में नमक डालकर उबालें. आलू का बासीपन चला जाएगा.
१३. चावल जब पकने पे आ जाये तो उसमे कुछ बूंदे निम्बू का रस
निचोड़ दें. चावल महकदार व खिला खिला बनेगा.
१४. सेंडविच काटते समय उस चाकू को थोडा सा गर्म कर लें…
इससे सेंडविच आसानी से कटेगा.
१५. फ्रिज में बेलन को ठंडा करके रोटी बेलने से
बेलन को आटा नहीं चिपकता.
१६. काजू या बादाम के डिब्बों में ३-४ लौंग डालकर रखें,
बिल्कुल भी कीड़ा नही लगेगा.
१७. चावल पकाते समय थोडा सा नमक डाल दें. इससे चावल
एकदम से सफेद बनेगा.
१८. गुलाब जामुन के मावे में मैदा मिलाने के बजाय आटा मिलाएं.
१९. अगर तुरई या गिलकी कड़वी निकल जाएँ तो उसे फेंकें नहीं…
बल्कि उनके आसपास के डंठल सहित सब्जी को फ्राई करे
और सब्जी परोसते समय डंठल को निकाल लें. कड़वापन
निकल जायेगा.
२०. तिल कतली या काजू कतली आदि को पॉलीथिन के
अंदर रखकर बेले फिर काटें उसका शेप खराब
नहीं होगा.
२१. हलवा बनाते समय हलवे में सूखी चीनी को ना डालकर अलग से
शक्कर की चाशनी बनाकर डालें.
२२. ग्रेवी की रंग लाल करने के लिए मसालों के साथ जरा – सा
चुकंदर भी किस दे.
२३. दही भल्ले की पिसी हुई दाल में जरा – सा मैदा मिलाकर फेंटें.
२४. आंवले के आचार को काफी समय तक पीला बनाये रखने के लिए
उसमें जरा – सी शक्कर डाल दिजिये.
२५. बादाम को थोड़ी देर पानी में उबालें तो बादाम के छिलके आसानी से
उतर जाएंगे.
२६. अगर गाजर को कम समय में छीलना हो तो उसे गरम पानी में
पांच मिनट तक भिगोकर रखें और छीलने से दो मिनट पूर्व उसे
ठंडे पानी में डालें.