Sunder Vichar | बिनधास्त जियो | Good Thoughts In Hindi

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Sunder Vichar | बिनधास्त जियो | Good Thoughts In Hindi

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बढ़ती उम्र को देखकर निराश ना हो.. क्योंकी अपने आप को बढ़ते हुए उम्र के साथ स्वीकार करना

आपको एक तनावमुक्त जीवन दे सकता है. याद रखें आपकी उम्र जो भी हो लेकिन

हर उम्र एक अलग तरह की खूबसूरती लेकर आती है, उसका भरपूर आनंद लीजिये.

 

आप अपने बालों को रंग करवाना चाहते हैं… बेझिझक बाल रंगिये, आपको लगता है की

वज़न कम रखना है तो रखिये, आपका मन तरह तरह के कपड़े पहने को कर रहा है तो बेझिझक पहनिए,

एक बच्चा बन जाइए… बच्चों की तरह खिलखिलाइये, बच्चे की तरह

साफ दिल से सोचिये, अच्छा माहौल रखिये, अपने आप को आईने में देखे, आईने में जो

सच्चाई दिखे उसे सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार करे.

कोई भी कितना भी क्रीम- पावडर लगा लो, ये आपको गोरा नही बना सकते, कोई भी

शैम्पू बाल झड़ने से नही रोकता, कोई भी तेल बाल नही उगा सकता, कोई भी साबुन

आपको बच्चों जैसी स्किन नही दे सकती. चाहे वो किसी भी कंपनी का प्रोडक्ट हो…

सब अपना-अपना सामान बेचने के लिए लुभावने विज्ञापनों द्वारा झूठ बोलते हैं.

ये सब नैसर्गिक होता है.

 

जैसे जैसे उम्र बढ़ेगी आपके सर के बाल से लेकर पांव के नाखून तक सब में बदलाव

आता है, आप पुरानी मशीन का अच्छा रखरखाव रखने से उसे बढ़िया चला तो सकते हैं…

लेकिन उसे नई तो नही कर सकते ना…!

 

कोई बात नही अगर आपका शरीर बेडौल हैं तो…

कोई बात नहीं आपकी नाक मोटी है तो…

कोई बात नही… आपकी आंखें छोटी हैं या भुरी हैं तो…

कोई बात नही अगर आप गोरे नही हैं… या बहुत ज्यादा गोरे हैं तो…

कोई बात नहीं अगर आपके होठ बड़े बड़े हो, या सही आकार में ना हो…

फिर भी हम सुंदर हैं, अपनी सुंदरता को पहचानिए.

 

दूसरों से कमेंट या वाह वाही लूटने के लिए सुंदर दिखने से ज्यादा ज़रूरी है,

आप अपनी सुंदरता को महसूस करें.

 

हर बच्चा सुंदर इसलिये दिखता है कि वो छल कपट से परे मासूम होता है और बडे होने पर

जब हम छल और कपट से जीवन जीने लगते है तो वो मासूमियत खो देते हैं…

और उसी सुंदरता को पैसे खर्च करके खरीदने की कोशिश करते हैं.

मन की खूबसूरती पर ध्यान दो.

 

पेट निकल गया तो कोई बात नही उसके लिए क्या शर्माना, हमारा अपना शरीर हैं,

हमारी उम्र के साथ बदलता है, साथ ही वज़न भी उसी हिसाब से घटेगा बढेगा इसे हमें ही समझना हैं.

इसके लिए दुःख नहीं करना है.

 

सारा इंटरनेट और सोशल मीडिया तरह तरह के उपदेशों से भरा रहता है, यह खाओ,

वो मत खाओ, ठंडा खाओ, गर्म पीओ, कपाल भाती करो, सवेरे नीम्बू पीओ, रात को दूध

पीओ, ज़ोर से सांस लो, लंबी सांस लो, दाहिने से सोइये ,बाहिने से उठिए, हरी सब्जी खाओ,

दाल में प्रोटीन है, दाल से क्रिएटिनिन बढ़ जायेगा…

 

अगर पूरे एक दिन सारे उपदेशों को पढ़ने लगें तो पता चलेगा, ये ज़िन्दगी बेकार है,

ना कुछ खाने को बचेगा…

ना कुछ जीने को…! आप डिप्रेस्ड हो जायेंगे.

 

ये सारा ऑर्गेनिक, एलोवेरा, करेला, मेथी, लवकी में फंसकर दिमाग का दही हो जाता है.

स्वस्थ होना तो दूर मानसिक तनाव हो जाता है, अरे…! हम मरने के लिये ही जन्म लेते हैं,

कभी ना कभी तो मरना है… अभी तक बाज़ार में अमृत बिकना शुरू नही हुआ है..

हर चीज़ सही मात्रा में खाइये, हर वो चीज़ थोड़ी थोड़ी जो आपको अच्छी लगती है,

भोजन का संबंध मन से होता है, और मन अच्छे भोजन से ही खुश रहता है.

 

मन को मारकर खुश नही रहा जा सकता, थोड़ा बहुत शारीरिक कार्य करते रहिए,

सुबह टहलने जाइये, हलकी फुलकी कसरत करीये, व्यस्त रहिये, मस्त रहिये,

शरीर से ज्यादा मन को सुंदर रखिये…!

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