Best Motivational Story | सोच बदलो जीवन बदलेगा | Sunder Vichar
नमस्कार….
अक्सर हम जीवन में थोड़ी असफलता मिलते ही निराश हो जाते है.
और कोशिश करना बंद कर देते है. लेकिन हमें ये सोच बदली चाहिए,
जहा हम कुछ भी नहीं कर सकते… वहा हमें एक चीज जरूर करनी है… कोशिश…!
अंत में हमें हमारी कोशिश ही हमें सफलता दिला सकती है.
हिंदी प्रेरणादायक कहानी… सोच बदलो… जीवन बदलेगा…!
एक दिन एक किसान अपने बूढ़े बैल के साथ घर लौट रहा था. शाम हो रही थी.
किसान को थोड़ी थकावट महसूस होने लगी. रास्ते में कुएं को देख के रुक गया.
और थोड़ी देर के लिए बैठ गया.
कुएं के आजू बाजु हरी हरी घास होने से बैल उसी कुएं के आस पास घूम रहा था.
और चारा खा रहा था.
चरते चरते अचानक बैल का संतुलन बिगड़ा और बैल कुएँ में गिर गया…..!
कुएं के अंदरवह बैल घंटों ज़ोर ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और
विचार करता रहा कि, उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं…..
आखिर किसान ने निर्णय लिया कि बैल काफी बूढा हो चूका है.
मैंने भी अपनी तरफ से पूरी कोशिश की. अब उसे कुएँ में ही
दफना देना चाहिए.
Motivational Story
किसान ने अपना फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालना शुरू किया.
जैसे ही बैल कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है….
वह और ज़ोर ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा और फिर….! अचानक वह
आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया. किसान चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहा.
किसान भी थक गया था. तभी किसान ने कुएँ में झाँका
तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया….
किसान जो भी मिट्टी कुएं में डालता वो मिट्टी बैल के शरीर पे गिरती थी.
अपनी शरीर पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल
एक आश्चर्यजनकहरकत कर रहा था. वह अपने शरीर को
हिला हिला कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था
और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था.
किसान यह देख आश्चर्यचकित रह गया. उसी वक़्त उसी रस्ते से
घर लौट रहे उसके मित्र आये. वो भी देख के आश्चर्यचकित हो गए.
Motivational Story
उन्होंने भी अपना अपना फावड़ा लिया और मिट्टी डालने लगे. जैसे जैसे
किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते
वैसे – वैसे बैल हिल-हिल कर अपने शरीर पर गिरने वाली उस मिट्टी को
गिरा देता और एक सीढी ऊपर चढ़ आता जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित
करते हुए…. वह बैल कुएँ के किनारे पर पहुंच गया और फिर कूदकर
बाहर भाग गया.
हिंदी प्रेरणादायक कहानी… सोच बदलो… जीवन बदलेगा…!
ध्यान रखे आपके जीवन में भी बहुत तरह से मिट्टी फेंकी जायेगी.
बहुत तरह की गंदगी आप पर गिरेगी. जैसे कि… आपको आगे बढ़ने से
रोकने के लिए कोई बेकार में ही आपकी आलोचना करेगा. कोई आपकी
सफलता से ईर्ष्या के कारण आपको बेकार में ही भला बुरा कहेगा.
कोई आपसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता हुआ दिखेगा
जो आपके आदर्शों के विरुद्ध होंगे… ऐसे में आपको हतोत्साहित हो कर
कुएँ में ही नहीं पड़े रहना है…. बल्कि साहस के साथ हर तरह की
गंदगी को गिरा देना है. और उससे सीख ले कर उसे सीढ़ी बनाकर
बिना अपने आदर्शों का त्याग किये अपने कदमों को
आगे बढ़ाते जाना है.
सकारात्मक रहे.. सकारात्मक जिए…. ! | Be Positive
होकर मायूस न यूँ शाम की तरह ढलते रहिये
जिंदगी एक सुबह है सूरज की तरह निकलते रहिये…!
जिंदगी एक सुबह है सूरज की तरह निकलते रहिये…!
इस संसार में….
सबसे बड़ी सम्पत्ति बुद्धि, सबसे अच्छा हथियार धैर्य
सबसे अच्छी सुरक्षा विश्वास, सबसे बढ़िया दवा हँसी है.
और आश्चर्य की बात कि ये सब नि:शुल्क हैं.
सदा मुस्कुराते रहें…! सदा आगे बढ़ते रहें….!
जो बदला जा सके… उसे बदलिये…….
जो बदला ना जा सके… उसे स्वीकारिये……
जो स्वीकारा न जा सके… उससे दूर हो जाइये…..
लेकिन खुद को खुश रखिये….
क्योंकि वह भी एक बड़ी जिम्मेदारी है…!
अच्छा विचार | Sunder vichar | Good Thoughts
जिंदगी में एक दूसरे के जैसा होना जरूरी नहीं होता
एक दूसरे के लिए होना जरूरी होता है….!!
ऐसे जियो कि अपने, आप को पसंद आ सको
दुनिया वालों की पसंद तो, पल भर में बदल जाती है.
Best Motivational Story | सोच बदलो जीवन बदलेगा | Sunder Vichar
Busy Lifestyle - जीने की तैयारी - Sunder Vichar - Good Thought in hindi
Busy Lifestyle – जीने की तैयारी | Sunder Vichar | Good Thoughts In Hindi
कल मैं फैक्ट्री से जल्दी घर चला आया. हर दिन मुझे आते आते रात के
8 बज ही जाते है. लेकिन कल फैक्ट्री से 5 बजे ही निकल गया.
घर पहुचते पहुचते 6 बज गए.
फैक्ट्री से सोच के निकला था की घर जाकर पत्नी से बाते करूँगा…!
और बातो बातो में फिर धीरे से कहूँगा की चलो कहीं बाहर खाना खाने
चलते है.
जब हमारी नयी नयी शादी हुई थी, तब हम कभी कभी ऐसा करते थे.
जीने की तैयारी
आज जब घर पे पंहुचा तो पत्नी टीवी देख रही थी. मुझे लगा की शायद
उसका कोई पसंदीदा सीरियल चल रहा है. अभी डिस्टर्ब करना ठीक नहीं
रहेगा.
डिस्टर्ब ना करने के भी दो कारण थे, पहला था डर…! क्योंकी कभी कभी
जब ये सीरियल देख रही होती है, तभी मै घर पहुँचता हु. और कुछ बोल
देता हु तो… उसका पसंदीदा सीरियल चुक जाता है. वो नाराज हो जाती है.
कभी कभी तो गुस्सा होकर दो बाते भी सुना देती है. दूसरा था प्यार…!
वो डिस्टर्ब ना हो… और अपनी पसंदीदा सीरियल से भी नहीं चुके.
इसीलिए सीरियल ख़त्म होने तक कुछ देर मोबाईल लेके सोफे पे बैठ गया.
कुछ फैक्ट्री का हिसाब और कल की प्लानिंग भी लिख लिया. कल कुछ
भुल गया तो मुस्किल हो जाएगी… ये सोचके काम में लग गया.
मोबाईल देखते देखते बहोत देर हो गयी.
मन बनाया था की पत्नी के साथ बैठ कर बातें करूंगा…..! फिर खाना
खाने बाहर जाऊंगा… पर कब 06 से 09 कब बज गए पता ही नहीं चला.
पत्नी ने वहीं सोफे के टेबल पर खाना लगा दिया. मैं चुपचाप खाना खाने
लगा…. खाना खाते हुए मैंने कहा कि खाना खाकर हम लोग नीचे
टहलने चलेंगे… बातें करेंगे…. पत्नी के चहरे पे ख़ुशी साफ छलक रही थी.
हम खाना खाते रहे, इस बीच मेरी पसंद का सीरियल आने लगा और मैं
खाते – खाते सीरियल में डूब गया. सीरियल देखते देखते हॉल में कब आँख
लगी पता ही नहीं चला. मै वही टेबल पे सो गया था.
जब आँख खुली तब आधी रात हो चुकी थी. मन ही मन में खुद पे ही
बहुत गुस्सा आ रहा था.
मन में सोच कर घर आया था कि जल्दी आने का फायदा उठाते हुए
आज कुछ समय पत्नी के साथ बिताऊंगा…..! पर यहां तो शाम क्या
आधी रात भी निकल गई.
अपनों को समय दीजिये… अक्सर ऐसा ही होता है ज़िंदगी में…
हम सोचते कुछ और हैं… और होता कुछ और ही है.
हम सोचते हैं कि
एक दिन हम जी लेंगे… पर हम कभी नहीं जीते… हम सोचते हैं कि
एक दिन ये कर लेंगे…. वो कर लेंगें… पर कर कुछ नहीं कर पाते है.
आधी रात को हॉल से उठकर हाथ मुंह धो कर बिस्तर पर आया तो पत्नी
सारा दिन के काम से थकी हुई सो गई थी. मैं चुपचाप बेडरूम में कुर्सी
पर बैठ गया. दिमाग में कुछ यादे ताजा हो रही थी.
पंद्रह साल पहले इस लड़की से शादी पक्की होने के बाद पहली बार
मिला था… ठीक से बात भी नहीं कर पा रही थी. उस दिन मैंने वादा
किया था की शादी के बाद… तुम्हारे हर सुख में दुःख में… जिंदगी के
हर मोड़ पे मै तुम्हारे साथ रहूँगा. शादी तो कर लिया…..!
पर ये कैसा साथ….?
Busy Lifestyle – जीने की तैयारी – Sunder Vichar
मैं सुबह उठता हूं अपने काम में लग जाता हूं. वो सुबह उठती है….
एक गिलास गुण गुणा पानी देने के बाद चाय बनाती है…
चाय पीकर मैं मोबाईल पर संसार से जुड़ जाता हूं.
वो नाश्ते की तैयारी करती है… फिर मै फैक्ट्री जाने की तैयारी करता हु.
तैयार होता हु. वो लंच बॉक्स देती है. पानी बोतल, मोबाईल चार्जर.
घर से निकलते तक वो मेरे ही छोटे मोटे कामो में लगी रहती है.
मैं शान से फैक्ट्री के लिए निकलता हु. मेरे फैक्ट्री निकलने के बाद वो
घर के काम… जैसे बर्तन, कपडे, घर की सफाई में लग जाती है.
ये काम होते होते, रात के डिनर की तैयारी करने का समय हो
जाता है. ये काम करके फिर डिनर की तैयारी में लग जाती है.
मै रात को देर से घर आता हु. और खाना खाते ही सो जाता हु.
पूरा एक दिन खर्च हो जाता है…..!
जीने की तयारी मे….!
Busy Lifestyle
सुबह नींद से जागने से लेकर रात होने तक वो काम करते रहती है…
लेकिन मुझसे कभी शिकायत नहीं करती….! शिकायत क्यों नहीं करती…?
मैं नहीं जानता….! पर मुझे अपने आप से शिकायत है….!
आदमी जिससे सबसे ज्यादा प्यार करता है… सबसे कम उसी की परवाह
करता है….! ऐसा क्यों…..? कई बार लगने लगता है कि हम खुद के लिए
अब काम नहीं करते…!
हम किसी अनजाने डर से लड़ने के लिए काम करते हैं…! हम जीने के
पीछे अपनी ज़िंदगी बर्बाद कर रहे हैं.
कल से मैं सोच रहा हूं…. वो कौन सा दिन होगा जब हम जीना शुरू करेंगे….
क्या हम गाड़ी, टीवी, फोन, कम्यूटर, कपड़े खरीदने के लिए जी रहे हैं…..?
मैं तो सोच ही रहा हूं, आप भी सोचिए…! कि ज़िंदगी बहुत छोटी होती है…
उसे यूं जाया मत कीजिए….! अपने प्यार को पहचानिए…. उसके साथ
समय बिताइए….
जो अपने माँ बाप भाई बहन सगे संबंधी सब को छोड़ आप से रिश्ता जोडा है,
आपके सुख-दुख में शामिल होने का वादा किया हैं, उसके सुख-दुख को पूछिए
तो सही…..!
एक दिन अफसोस करने से बेहतर है… सच को आज ही समझ लेना कि
ज़िंदगी मुट्ठी में रेत की तरह होती है….
कब मुट्ठी से वो निकल जाएगी, पता भी नहीं चलेगा….
जिस के मन का भाव
सच्चा होता है.
उसका हर काम
अच्छा होता है.
🥀💮💖
संभालेगा तुम्हारे घर को वही…
जो हर मुसीबतों से…
तेज बारिश में भी
पेड़ से घोंसला गिरने नहीं देता…!
🥀💮💖
ना तो बड़ा पद जरूरी है…
ना ही कोई मुहूरत जरूरी है…
कुछ अच्छा करने के लिए…
बस… अच्छी नीयत जरूरी है…!
🥀💮💖
अपना ज़मीर बेच कर
अमीर हो जाने से
बेहतर है की….
फकीर ही हो जाये.
🥀💮💖
Suvichar
बहुत ज्यादा मुश्किल नही है,
जिंदगी की सच्चाई को समझना…
जिस तराजू पर आप
दूसरों को तौलते है…
कभी उस पर खुद भी बैठ के देखिये.
🥀💮💖
परख ने से कब जाहिर हुई
शख्सियत किसी की…
हम तो बस उन्हीं के हैं…
जिन्हें हम पर यकीन है…!
🥀💮💖
छोटी छोटी खुशिया ही तो
हमारे जीने का सहारा बनती है.
ख्वाहिशो क्या क्या है,
वह तो हर पल बदलते रहती है.
🥀💮💖
Suvichar
ज़िन्दगी में और क्या होगा
मुझे मालूम है.
हादसे पे हादसा ही होगा
मुझे मालूम है.
कोशिशें करता हूँ…
बुराई की राह से बचने की…
बुराई का फल बुरा ही होगा
मुझे मालूम है.
क्यों रोकते हो भला चलने से
सच की राह पर…
रास्ता काँटों भरा होगा
मुझे मालूम है.
ख़ुशियों को देखकर
मै इतराता नहीं
बस इसलिए…
ग़म ही रास्ता देखता होगा,
मुझे मालूम है.
चाहता हूँ मै बस भला ही,
हर किसी का रात दिन,
मैं आदमी दिल का भला हूँ,
ये मुझे मालूम है.
याद कर के पुरानी बातें क्या होगा…
सिर्फ और सिर्फ सीने के ज़ख़्म हरे होंगे
मुझे मालूम है.
अच्छाई की राह पर
अगर चलता है तो
साथ में उसके भगवान भी होगा,
मुझे मालूम है…
कोशिश तो अपनी आखिरी
सांस तक करनी चाहिए…
या तो लक्ष्य हासिल होगा
या फिर एक अनुभव
दोनों ही चीजें बहुत अच्छी है.
🥀💮💖
Hindi Suvichar Image
Best suvichar image – Good Thoughts in Hindi – Positive Quotes – सुविचार
मेरे दिल ने कभी किसी का
बुरा नहीं चाहा.
ये और बात है की
यह मुझे साबित करना नहीं आया.
Hindi Suvichar Image
Best suvichar image – Good Thoughts in Hindi – Positive Quotes -सुविचार
थोड़ा बहुत
शतरंज का आना भी जरूरी है,
साहब.
हम रिश्ते निभाते रहते है
और सामनेवाला कई बार
मोहरे चल रहा होता है.
सम्पूर्ण रामायण में कही भी भोग नहीं है | केवल त्याग ही त्याग है.
सम्पूर्ण रामायण में कही भी भोग नहीं है.
केवल त्याग ही त्याग है.
चित्रकूट से लौटने के बाद भरत जी ने नंदीग्राम में आश्रम में रहते है. और वही से
राज्य का काम भी सँभालते है. राजगद्दी पे प्रभु श्री राम की चरण पादुका का रखकर
राज्य संचालन का आदेश शत्रुघ्न जी को दिया है. शत्रुघ्न जी उनके आदेश का पालन
करते हुए राज्य संचालन करते हैं.
त्याग
एक रात माता कौशिल्या जी अपने महल में सोई हुई थी, तभी उनकी नींद टूटी और उन्हें
महसूस हुवा की अपने महल की छत पे कोई चल रहा है, उन्हें चलने की आहट साफ साफ
सुनाई दे रही थी. उन्होंने आवाज लगाई… और पूछा कौन है छत पर…?
पता चला उपर शत्रुघ्न जी की पत्नी श्रुतिकीर्ति जी है…! उन्हें निचे बुलाया और अपने पास बैठने
को कहा…
श्रुतिकीर्ति जी माता कौशल्या को चरणों में प्रणाम कर के खडी रह गई.
माता कौशिल्या जी ने पूछा, पुत्री ! इतनी रात को अकेली छत पर क्या कर रही हो…?
क्या नींद नहीं आ रही…? और शत्रुघ्न कहाँ है…?
श्रुतिकीर्ति की आँखें भर आईं, माँ की छाती से लिपट गई और गोद में सिमट गईं
बोलीं, माँ उन्हें तो देखे हुए तेरह वर्ष हो गए…!
उफ…! कौशल्या जी का ह्रदय काँप गया…
मर्यादा
माता तुरंत आवाज लगाई, सेवक दौड़े आए, आधी रात ही पालकी तैयार हुई.
आज शत्रुघ्न जी की खोज होगी, माँ चली… पता है…. शत्रुघ्न जी कहाँ मिले…?
अयोध्या के जिस दरवाजे के बाहर भरत जी नंदिग्राम में तपस्वी होकर रहते हैं.
उसी दरवाजे के भीतर एक पत्थर की शिला हैं, उसी शिला पर, अपनी बाँह का
तकिया बनाकर लेटे मिले.
माँ शत्रुघ्न सिराहने बैठ गईं, और शत्रुघ्न के बालों में हाथ फिराया तो शत्रुघ्न जी ने
आँखें खोलीं, माँ…!
झटसे उठे, चरणों में गिरे, माँ…! आपने क्यों कष्ट किया…? मुझे ही बुलवा लिया होता
माँ ने पूछा…. पुत्र शत्रुघ्न…! यहाँ क्यों…?
शत्रुघ्न जी गला भर आया और वो रोने लगे. रोते रोते बोले, माँ…! भैया राम जी पिताजी की
आज्ञा से वन में चले गए…! भैया लक्ष्मण जी उनके पीछे चले गए…! भैया भरत जी भी
नंदिग्राम में हैं…! तो क्या ये महल, ये रथ, ये राजसी वस्त्र, परमात्माने ने मेरे ही लिए
बनाए हैं…?
माता कौशल्या जी निरुत्तर रह गईं…!
आदर्श
यह रामकथा हैं, भाई…! यह भोग की नहीं, त्याग की कथा हैं. यहाँ त्याग की प्रतियोगिता
चल रही हैं… और सभी के सभी प्रथम ही हैं, कोई पीछे नहीं रहा ही नहीं…!
प्रेम और त्याग, चारो भाइयों का एक दूसरे के प्रति आश्चर्यजनक और अलौकिक है.
जब प्रभु श्री राम को चौदह वर्ष का वनवास हुआ तो उनकी पत्नी, माँ सीता ने भी सहर्ष
वनवास स्वीकार कर लिया…! और बचपन से ही बड़े भाई की सेवा मे रहने वाले लक्ष्मण
जी कैसे राम जी से दूर हो जाते…!
माता सुमित्रा से तो उन्होंने वन जाने की अनुमति ले ली थी… लेकीन जब पत्नी उर्मिला के
कक्ष की ओर बढ़ रहे थे तो, सोच रहे थे कि, माँ ने तो अनुमति दे दी है…
लेकिन उर्मिला को मै कैसे समझाऊंगा…!
उससे क्या कहूंगा…! यहीं सोच विचार करते – करते जब लक्ष्मण जी जैसे ही अपने
कक्ष में पहुंचे… तो देखा की उर्मिला जी पहले से ही आरती की थाल लेकर खड़ी थीं
और बोलीं… “आप मेरी चिंता छोड़कर प्रभु की सेवा में वन को जाओ. मैं आपको
नहीं रोकूँगीं. मेरे कारण आपकी सेवा में कोई बाधा ना आये, इसलिये मै साथ जाने की
जिद्द भी नहीं करूंगी ”
सम्पूर्ण रामायण में कही भी भोग नहीं है
लक्ष्मण जी को कहने में संकोच हो रहा था… लेकीन उनके कुछ कहने से पहले ही
उर्मिला जी ने उन्हें संकोच से बाहर निकाल दिया. वास्तव में यहीं पत्नी का धर्म है.
पति संकोच में पड़े, उससे पहले ही पत्नी उसके मन की बात जानकर उसे संकोच से
बाहर कर दे…!
लक्ष्मण जी तो चले गये लेकिन… इन चौदह वर्ष तक उर्मिला ने भी एक तपस्विनी की
भांति कठोर तप किया. वन में लक्ष्मण जी भैया – भाभी की सेवा में कभी सोये नहीं…!
लेकिन उर्मिला ने भी अपने महलों के द्वार कभी बंद नहीं किये और सारी रात जाग जागकर
उस दीपक की लौ को बुझने नहीं दिया.
जब मेघनाद से युद्ध करते हुए, लक्ष्मण को शक्ति लग जाती है और हनुमान जी उनके लिये
संजीवनी का पहाड़ लेकर लौट रहे होते हैं, तब बीच में अयोध्या में भरत जी उन्हें राक्षस
समझकर बाण मारते हैं और हनुमान जी राम राम कहते हुए गिर जाते हैं…
तब हनुमान जी सारा वृत्तांत सुनाते हैं की, सीता जी को
रावण ले गया… और लक्ष्मण जी मूर्छित हैं…!
यह सुनते ही कौशल्या जी कहती हैं कि राम को कहना कि लक्ष्मण के बिना अयोध्या में
पैर भी मत रखना, राम वन में ही रहे… माता सुमित्रा कहती हैं की राम से कहना कि
कोई बात नहीं… अभी शत्रुघ्न है…
मैं उसे भेज दूंगी. मेरे दोनों पुत्र राम सेवा के लिये ही तो जन्मे हैं. माताओं का प्रेम देखकर
हनुमान जी की आँखों से अश्रुधारा बह रही थी. लेकीन जब उन्होंने उर्मिला जी को देखा तो
सोचने लगे कि… यह क्यों एकदम शांत और प्रसन्न खड़ी हैं…? क्या इन्हें अपनी पति के
प्राणों की कोई चिंता नहीं…?
हनुमान जी पूछते हैं… देवी…! आपकी प्रसन्नता का कारण क्या है…?
आपके पति के प्राण संकट में हैं… सूर्य उदित होते ही सूर्य कुल का दीपक
बुझ जायेगा…!
उर्मिला जी ने जो उत्तर दिया… वो सुनकर तीनों लोकों का कोई भी प्राणी उनकी
वंदना किये बिना नहीं रह पाएगा.
उर्मिला जी बोलीं… मेरा दीपक संकट में नहीं है, वो बुझ ही नहीं सकता. और बात रही
सूर्योदय की… तो आप चाहें तो कुछ दिन अयोध्या में ही विश्राम कर लीजिये,
क्योंकि… जब तक वहां आप पहुचेंगे नहीं.. तब तक सूर्य उदित हो ही नहीं सकता.
सम्पूर्ण रामायण में कही भी भोग नहीं है
आपने कहा की… प्रभु श्रीराम मेरे पति को अपनी गोद में लेकर बैठे हैं…
जो प्रभु श्री राम की गोदी में लेटा हो, उसे काल छू भी नहीं सकता.
यह तो वो दोनों लीला कर रहे हैं…!
जब से मेरे पति से वन गये हैं, तब से सोये ही नहीं हैं, उन्होंने ना सोने का प्रण लिया था.
इसलिए वे थोड़ी देर विश्राम कर रहे हैं. और जब भगवान् की गोद मिल गयी तो थोड़ा
विश्राम ज्यादा हो गया.
वे उठ जायेंगे…! और शक्ति तो मेरे पति को लगी ही नहीं है…! वास्तव में
शक्ति तो श्री राम जी को लगी है, मेरे पति की हर श्वास में राम हैं.
हर धड़कन में राम, उनके रोम रोम में राम हैं, उनके खून की बूंद बूंद में राम हैं,
और जब उनके शरीर और आत्मा में, सिर्फ राम, ही राम है…!
तो शक्ति राम जी को ही लगी है…! और दर्द राम जी को ही हो रहा है…!
इसलिये हनुमान जी आप निश्चिन्त होकर जाएँ. सूर्य उदित होगा नहीं…!
राम राज्य की नींव जनक की बेटियां ही थीं…!
कभी सीता तो कभी उर्मिला…!
प्रभु श्री राम ने तो केवल राम राज्य का कलश स्थापित किया…
लेकीन वास्तव में राम राज्य इन सबके प्रेम, त्याग, समर्पण , बलिदान से ही आया.
Maa Status - मां - संकल्पनात्मक मुल्यांकन - माँ पर सुविचार
Maa Status – मां – संकल्पनात्मक मुल्यांकन – माँ पर सुविचार
जब एक बेटा बड़ा होता है तो, वह अपनी अलग अलग उम्र में
अपनी मां के व्यवहार का एक प्रकार से वैचारिक मूल्यांकन करता है.
वह अपनी हर उम्र में अपनी मां के बारे में अलग – अलग विचार रखता है.
जैसे…
उम्र – २ वर्ष – कहाँ है मम्मी…? कहा चली गई मम्मी, मम्मी…! मम्मी…!
मम्मी कहां हो…? और रोना सुरु कर देता है. उम्र ५ वर्ष – मम्मी कहां हो…? मैं स्कूल जा रहा हूँ… अच्छा मम्मी… बाय – बाय. उम्र – ९ वर्ष – मम्मी आज क्या बनाया है, कल आपने बेगन की सब्ज़ी दि थी,
मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं आई. आज टिफिन में क्या दे रही हो…?
मम्मी आज स्कूल में बहुत होम वर्क मिला है… उम्र – १३ वर्ष – पापा मम्मा कहाँ है…? स्कूल से आते ही मम्मी नहीं दिखती
तो मुझे अच्छा नहीं लगता… उम्र – १५ वर्ष – मम्मी मेरे पास बैठो ना, आज स्कुल में क्या हुआ पता है…. उम्र १७ वर्ष – मम्मी मुझे दोस्त के यहां जन्मदिन मे जाना है, पापा मना कर रहे हैं….
प्लीज मुझे जाने दो, आप पापा को बताओ ना…! उम्र – २१ वर्ष – क्या मम्मी आप भी ना…? आपको कुछ समझता ही नहीं,
आपको ये नये जमाने का कुछ पता नहीं है. उम्र – २४ वर्ष – मां आप जब देखो तब मुझे उपदेश देती रहती हो
अब मैं कोई दुध पीता हुआ बच्चा नहीं…! उम्र – २७ वर्ष – मम्मी आप भी ना… वो मेरी पत्नी है, आप समझा करो ना,
वो नये जमाने के हिसाब से है…
आप अपनी मानसिकता बदलो ना मम्मी… उम्र – ३० वर्ष – मम्मी वो भी माँ है, उसे अपने बच्चों को सम्भालना आता है,
आप हर बात में दखलंदाजी मत किया करो… प्लीज़.
फिर इसके बाद बेटा अपनी मम्मी कुछ पुछता नहीं और मम्मी कब
बूढ़ी हो गयी, बेटे को पता ही नहीं. उसकी मम्मी तो आज भी वो ही हैं…
बस उम्र के साथ बच्चों के अंदाज़ बदल जाते हैं…! उम्र – ५० वर्ष – फ़िर एक दिन… मम्मी – मम्मी चुप क्यों हो…?
कुछ तो बोलो ना, लेकिन मम्मी कुछ नहीं बोलती.
खामोश हो गयी… हमेशा के लिए….
माँ, २ वर्ष से ५० वर्ष के, इस बदलाव को कभी समझ ही नहीं पायी, क्योंकि
माँ के लिये तो ५० वर्ष का प्रौढ़ भी… बच्चा ही हैं, वो बेचारी तो आख़िर तक
बेटे की छोटी सी तकलीफ पर, वैसे ही तड़प जाती, जैसे उस के बचपन में
तडपती थी. और बेटे को माँ के जाने के बाद ही पता चलता है की कि उसने
क्या अनमोल खजाना खो दिया…?
पुरी ज़िन्दगी बीत जाती है, कुछ अनकही और अनसुनी बातें बताने कहने के लिए,
माँ का सदा आदर सत्कार करें, उन्हें भी समझें और कुछ अनमोल वक्त
उनके साथ भी बिताएं, क्योंकि समय गुज़र जाता है, लेकिन माँ कभी वापिस
नहीं मिलती…! कभी वापस नहीं मिलती…!
Best Pitaji Quotes | पिता पर सुंदर विचार | संकल्पनात्मक मुल्यांकन
जब एक बेटा बड़ा होता है तो, वह अपनी अलग अलग उम्र में
अपने पिताजी का एक प्रकार से वैचारिक मूल्यांकन करता है.
वह अपनी हर उम्र में अपने पिताजी के बारे में अलग – अलग
विचार रखता है. जैसे…
पिता पर सुंदर विचार
बेटे की उम्र ५ वर्ष – मेरे पिताजी बहोत महान इंसान है. ७ वर्ष – मेरे पिताजी सबसे अक्लमंद इंसान है. वो सब कुछ अच्छे से जानते है.
उन्हें सब समझता है. ९ वर्ष – मेरे पिताजी बहुत ही अच्छे इंसान है,लेकिन…. वह बहुत गुस्सेवाले है. ११ वर्ष – मैं जब छोटा था उस समय मेरे पिताजी मेरे साथ बहुत ही अच्छा व्यवहार
करते थे. १४ वर्ष – मेरे पिताजी ज़माने के साथ नहीं चलते, मेरे पिताजी को कुछ भी ज्ञान नहीं है. १७ वर्ष – मेरे पिताजी दिन ब दिन बहोत चिडचिडे होते जा रहे है, बात बात पे चिड़ते है,
और बुरा व्यवहार करते है. १९ वर्ष – नहीं – नहीं अब मै अपने पिताजी के साथ नहीं रह… पता नहीं…
माँ इनके साथ कैसे रहती है… २३ वर्ष – मेरे पिताजी को कुछ समझ नहीं आता, मेरी हर बात का वो विरोध करते है.
वो इस दुनियादारी को कब समझेंगे, भगवान ही जाने. २८ वर्ष – ये मेरा बेटा कितना जिद्ही है, मेरे बेटे को सम्भालना मुश्किल होता जा रहा है…
मै जब इसकी उम्र का था तो अपने पिताजी से कितना डरता था…! ३८ वर्ष – मेरे पिताजी ने मुझे कितनी शिस्त से पला है, मई उनसे बात कितनी मर्यादा
से करता था, पिताजी की हर बात मानता था, आज कल के लड़को में तो बिलकुल
भी अनुशासन और शिष्टाचार नहीं है. ४८ वर्ष – मेरे पिताजी ने हम तीन बाई – बहन को कितनी तकलीफ झेल कर पला है,
मैं तो हैरान हु की… मुझे एक ही बीटा है, और ये एक बेटे को पालते – पालते मेरा
दम निकल रहा है. ५८ वर्ष – मेरे पिताजी कितनी दूरदृष्टि वाले इंसान थे, उन्होंने हम तीन भाई-बहनो के लिये
कितना व्यवस्थित नियोजन कर के रखा था, जिससे आज पिताजी अपनी वृद्धावस्था में भी
एकदम संयमपुर्वक जीवन जी रहे है…! और अपने अंतिम समय तक जीते रहेंगे. ६१ वर्ष – मेरे पिताजी महान थे…! जब तक पिताजी जिंदा थे तब तक उन्होंने हम सभी तीन
भाई बहन का पूरा पूरा ख्याल रखा. अपने अंतिम समय तक वो हमसे बहोत प्यार करते रहे
और हमारे मार्गदर्शक रहे.
पिता पर सुंदर विचार
मित्रो…
सच्चाई तो यह है की….. बेटे को अपने पिताजी को पूरी तरह समझने में पुरे ६० वर्ष लग गये.
आप से विनती है की आप अपने पिताजी को समझने में इतने वर्ष मत लगाना.
समय से पहले ही समझ जाना, क्योंकि… हमारे पिताजी हमारे बारे में कभी भी गलत विचार
नही रख सकते.
सिर्फ और सिर्फ हमारे विचार उनके प्रति गलत होते है. जो हमे समय निकल जाने के बाद
समझ में आते है…!
तब तक बहोत देर हो चुकी होती है. अपने पिताजी का सम्मान करे और उनके विचार का
सम्मान करे.
Sunder Vichar | Hindi Suvichar अच्छे विचार | Good Thoughts
नमस्कार मित्रो….
इस पोस्ट में हिंदी प्रेरणादायक सुविचार फोटो के साथ में है.. और
जीवन पर आधारित सुंदर सुविचार जो जीवन में नई उर्जा देंगे….
यदि आप… good thoughts in hindi on life, sunder vichar, motivational quotes in hindi on life, hindi suvichar,suvichar hindi me, status suvichar, सुविचार स्टेट्स, सुविचार हिंदी में, सच्ची बातें,
अच्छे विचार, ये सब खोज रहे है तो यक़ीनन आप निराश नहीं होंगे.
धन्यवाद 🙏
⧪ अगर अशिष्ट हि विशिष्ट है तो… उसे निषिद्ध कीजिए अगर गर्त में शिष्ट है तो उसे प्रसिद्ध कीजिए…!
⧪ हमेशा अपनी आलोचना को बड़े ही धैर्य से सुनें…. यही आलोचना, हमारी ज़िन्दगी का मैल हटाने में
साबुन का काम करती है.
⧪ झुठ में एक अलग ही आकर्षण होता है, पर… स्थिरता सत्य में ही होती है.
[ बेस्ट ] हिंदी प्रेरणादायक सुविचार फोटो के साथ Good Thoughts In Hindi On Life with Images | सुंदर विचार | अच्छे विचार
sunder-vichar-suvichar-hindi-me-suvuvichar-photo
⧪ शब्दो का वजन तो बोलने वाले के भाव पर आधारित होता है, एक शब्द मन्त्र हो जाता है…
तो एक शब्द गाली कहलाता है.
⧪ वाणी ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का परिचय कराती है.
⧪ मेहनत करे तो धन बने, सबर करे तो काम, मीठा बोले तो पहचान बने औऱ इज्जत करे तो नाम.
⧪ जो मिला उसमें ही खुश रहता हूँ, मेरी उंगलियां ही मुझे सिखाती है दुनियाँ में बराबर कोई नहीं है.
⧪ इंसान वही श्रेष्ठ है…जो बुरी स्थिति में फिसले नहीं एवं अच्छी स्थिति में उछले नहीं.
⧪ दुखी रहना है तो, सब मे कमी खोजो, और प्रसन्न रहना है तो… सब मे गुण खोजो.
⧪ विचारों को पढ़कर बदलाव नही आता है, विचारों पर चलकर ही बदलाव आता है.
⧪ सदा सुखी कौन है…? जिसको भगवान की कृपा पर भरोसा है और उनके न्याय पर विश्वास है…
उसको संसार की कोई भी स्थिति विचलित नही कर सकती.
⧪ ईश्वर तो मेरे बिना भी ईश्वर है, परन्तु… मैं ईश्वर के बिना कुछ भी नहीं हुं, इस सत्य को भुले नहीं. क्योंकी…
आप ही अपने काम आएँगे. ( सीखें ख़ुद से ही मशवरा करना.)
Sunder Vichar
⧪ एक बार एक व्यक्ति ने अपने गुरुजी से पूछा कि… गुरुवर हम ईश्वर के आगे सिर क्यों झुकाते है…?
तो गुरु ने बड़ा सुंदर उत्तर दिया, हमारी चिंताऐ हमारे मस्तिष्क पर निवास करती है और जब हम
ईश्वर के आगे सिर झुकाकर प्रणाम करते है तो वो चिंताऐ हमारे मस्तिष्क से गिर ईश्वर के चरणो मे
पहुंच जाती है और हम चिंताओ के बोझ से मुक्त हो जाते है.
Sunder Vichar | Hindi Suvichar | अच्छे विचार | Good Thoughts
sunder-vichar-suvichar-hindi-me-suvuvichar-photo
⧪ कर्म सुख भले ही न ला सके, लेकिन कर्म के बिना सुख नहीं मिलता है, यह एक कटु सत्य है.
⧪ हम जिस चेहरे के साथ जन्म लेते है वो हमारे बस में नही होता, मगर जिस चरित्र, व्यक्तित्व एवं
किरदार के साथ हम इस संसार से विदा लेते है, उस के लिये हम खुद जिम्मेदार होते है.
⧪ हालात सिखाते है… बातें सुनना और सहना, वरना… हर शक्स फितरत से बादशाह ही होता है.
⧪ अंधेरे मे जब हम दीया हाथ मे लेकर चलते है तो हमे यह भ्रम रहता है कि हम दीये को लेकर
चल रहे है, जबकि सच्चाई एकदम उल्टी है दीया हमे लेकर चल रहा होता है.
⧪ आपके शब्दों में जिम्मेदारी झलकनी चाहिए क्योंकी… आपको को बहुत से लोग पढ़ते हैं.
जो लोग अंदर से मर जाते हैं….
अक्सर वही दूसरों को जीना सिखाते हैं.
समय को थोड़ा सा समय दो….
समय जरूर बदलेगा.
स्ट्रगल से कभी भी
डरना नहीं चाहिए.
क्योंकि यह भी एक कहानी है…
जो सक्सेसफुल होने के बाद
सबको बतानी है…
क्रोध बुरा होता है.
परन्तु जहां आवश्यकता हो…
वहां दिखाना ही चाहिए.
नहीं तो गलत करने वाले को
एहसास ही नहीं होगा कि…
वह आपके साथ गलत कर रहा है.
और वह हमेशा आपके साथ
वैसा ही व्यवहार करेगा.
जो अंधेरे से गुजर चुके हैं….
बस वही समझते हैं कि….
जब कुछ भी नजर ना आए…
तो क्या- क्या दिखाई देता है…!
हिंदी कहानी | अपने रिश्तों को संभालिए उन्हें भरपूर समय दीजिए
सुरज ऑफिस से घर आया, रजनी पानी का गिलास लेकर आती है, सूरज पानी पिने से
मना करता है, रजनी उसका टिफ़िन का बैग लेने के लिए जैसे ही अपना हाथ बढाती है…!
सूरज अपनी बैग को पीछे लेते हुवे बोलता है… रजनी मुझे तुमसे तलाक चाहिए.
रजनी तलाक शब्द सुनते ही डर जाती है, कुछ देर तो स्तब्ध होकर खड़ी ही रहती है,
सूरज उसे आवाज लगाता है, फिर अचानक रो पड़ती है, रोते रोते रजनी सूरज से कहती है…
10 साल हमारे शादी को हुवे है, 8 साल का प्यारा सा बेटा है, हम दोनों को भी एक दुसरे से
कोई शिकायत नहीं…! फिर तलाक क्यों…?
सुरज बोला, ऑफिस में प्रिया से लगभग एक साल से प्रेम संबध सुरु है, और हम दोनों अब
शादी करना चाहते है, तुम मुझे तलाक दे दो, मैंने तुम्हारे नाम घर कर दिया है, और
बैंक बैलेंस में से आधा तुम्हारे नाम कर दिया है, ये रहे पेपर… साथ में ये तलाक के
पेपर… रजनी पेपर लेकर बेडरूम में चली गयी, सारी रात रोती रहती है.
अगले दिन सुबह बेटे के स्कूल जाने के बाद रजनी सूरज से बोली – मुझे तुम्हारा
घर और बैंक बैलेंस कुछ नही चाहिए, अगर तुम्हें मुझसे मुक्ति ही चाहिए तो मिल
जाएगी…! लेकिन आपको मेरी तीन शर्ते माननी होगी…!
अभी स्कुल में बेटे की परीक्षा सुरु है… इसिलिए मेरी पहली शर्त ये है की…
हमारे बेटे को तलाक के बारे कुछ भी पता नही चलना चाहिए.
दूसरी… 30 दिन तक हम पहले के जैसे पति पत्नी के रूप मे रहेंगे, हमारे चेहरे पर
कोई परेशानी के भाव नही आने चाहिए. और तिसरा… आप को ऑफिस से आते ही,
जब हमारी नई नई शादी हुई थी और आप मुझे अपनी गोदी में उठाकर चुमते हुए
पलंग पे बिठाते थे, वो आपको अगले तीस दिनों तक दोहराना होगा.
अगर ये तीनो शर्त आपको मंजूर हो तो मै वादा करती हूँ, 30 दिन मे तुम्हें मुझसे
मुक्ति मिल जाएगी.
सूरज बहुत खुश था बगैर पैसे दिए, सबकुछ उसके मन मुताबिक हो रहा था,
शर्त का पहला दिन सुरु हुवा… सूरज ने शाम को ऑफिस से आते ही, रजनी को
गोदी में उठाया तो उनका बेटा जोर जोर से ताली बजाने लगा और हंसने लगा,
बेटे को खुश देखकर सूरज को भी बहुत ख़ुशी हुई, गोदी में उठाने से रजनी भी
बहोत खुश थी.सूरज, रजनी और बेटा सभी खुश थे.
सूरज रोज ऑफिस से आता और रजनी को अपने वादे के मुताबिक गोदी में
उठाता, बेटा देखके ताली बजाते हुए खूब हसता, और बेटे को खुश देखकर सूरज को
बड़ी ख़ुशी होती थी.
अपने रिश्तों को संभालिए उन्हें भरपूर समय दीजिए
जब वो रजनी को उठाता और बेटे को खुश होते हुवे देखता तो खुद भी खुश होकर
अपने परिवार के लिए बहुद काम याद आते थे. उसे परीवार के लिए बहोत कुछ
करने का मन करता था. लेकीन जैसे ही प्रिया का चेहरा उसके नजरो के सामने
आता था तो वो सब भूल जाता था. अब ये रोज का हो गया…
इसी तरह बीस दिन बित गए.
21 वे दिन जब वही बात सूरज के दिमाग में आई तो सूरज का मन उसे
धिक्कराने लगा, उसे खुद पर खीझ आने लगी, उसे एहसास होने लगा था की
बस…! कुछ ही दिन मे मेरा इतना मीठा, पुराना रिश्ता खत्म हो जाएगा.
आखिर उसे अपनी गलतियों का एहसास होने लगा ओर बेटे के भविष्य का
क्या होगा यही सोचकर वह घबराने लगा,उसके हाथ पाव कापने लगे.
22 वे दिन जब ऑफिस जाने के लिए निकलता है तो वो ऑफिस जाने की बजाय
सीधा प्रिया के घर जाता है, और उसे सारी बात बताते हुवे शादी से साफ़ मना कर
देता है, प्रिया उसे जोर से थप्पड़ मार देती है, सूरज रोता हुवा, मगर अपनी
गलतियों की माफी मांगने के लिए घर आता है तो देखता है की, उसके घर के सामने
भीड़ लगी हुई है अंदर जाकर देखा तो रजनी मर चुकी थी…!
वहां मौजूद डाक्टर ने बताया पूजा को कैंसर था, उसे इलाज कि जरूरत थी,
मैने उसे बताया भी था ओर तुम्हें मिलने को कहा भी था मगर सूरज तुमने उसे
अस्पताल मे दाखिल क्यों नही किया…?
अपने रिश्तों को संभालिए उन्हें भरपूर समय दीजिए
खैर उसने ये एक खत तुम्हारे लिए छोडा था, खत सूरज को दिया जिस पर लिखा था…
सुरज हमारे बेटे को हमारे तलाक के बारे मे ना पता है, और नाही कभी पता चले
क्योंकि… मे उसकी नजरों मे हमेशा तुम्हारे लिए अपने प्यार जैसा प्यार देखना
चाहती हूं…! सूरज फूट फूट कर रो रहा था….
दोस्तों,
जिंदगी के सफर मे गुजर जाते हे जो मकाम
वो फिर नही आते ..वो फिर नही आते… अपने रिश्तों को संभालिए उन्हें भरपूर समय दीजिए…
अरे संसार संसार | सुंदर विचार | नवरा बायको छान विचार मराठी
आज तुम्हाला नाश्ता मध्ये काय खायची इच्छा आहे…!
नेहमीच्या ठसक्यात बायकोने दररोजचाच प्रश्न केला ..!
तुला जे वाटेल कर ते…!
ब्रश करता करता मी अर्धवट बोबड्या आवाजात उत्तर दिले…!
दररोज सारखेच… पोहे…? मी नाक मुरडले…!
उपमा…! मी उगाचच खाकरत विरोध नोंदवला…!
थालीपीठ…? चांगलेसे काहीतरी कर ना…
असे म्हणत मी टॉवेलला तोंड पुसले…!
तोंड पुसून जेव्हा चेहऱ्यावरचा टॉवेल बाजूला झाला तेव्हा ती माझ्याच
समोर रखुमाई बनून उभी होती…! म्हणजेच कमरेवर हात…
तुम्हाला काहीच कसे चालत नाही…!
रोज रोज वेग वेगळे पदार्थ आणायचेतरी कुठून…?
मी काहीसा स्वतःला वाचवत… तसे नाही ग… वेगळे काहीतरी हवे
इतकेच फक्त…! आणि तिचा आवाज अजूनच चढला…
वेगळे म्हणजे काय…?
अरे संसार संसार
मला कळत नाही… तुम्हीच सांगा… मी खायला करून घालते…!
मग बराच वेळ मलाही काही सुचले नाही…! पण मी मात्र बळबळत
राहिलो… सकाळचा नाश्ता चांगलाच पाहिजे…! कारण त्यावर पूर्ण
दिवसाचा मूड ठरतो.
आणि तिकडे तिचा पारा चढलेला… सकाळची धावपळीची वेळ राहते….
मुलींची शाळा… त्यात माझी गडबड… रात्रीची भांडी… आणि त्यात
ह्याचे हे खाण्यापिण्याचे चोचले…!
पटकन खाऊन मोकळे व्हायचे… ते नाही…! अगदी माझा अंत पाहतात…!
आणि बोलता बोलताच तिने फ्रिज उघडला…
फ्रीझच्या पिवळ्या प्रकाशातून बाहेर डोकावत ती तिथूनच ओरडली…
मटकी आहे मटकी… मिसळ करू का…?
एवढ्यात मी स्वयपाक घराच्या दारात आलेलो होतो…!
डोळ्यात थोडी चमक आली… चालेल, पण… थोडी तिखट कर हां… !
तिने फणकारत मटकीचे भांडे फ्रिज मधून बाहेर काढले…!
हो बाबा… मीच शिरते ना त्यात आता…!
तसाच मी दांडगाईने म्हणालो…. अगं… तिखट ऐवजी गोड होईल
मग ती…!
आता मात्र तिचा हात थांबला… तिने माझ्याकडे पाहिले…!
मटकी गॅसवर चढेपर्यंत राग पूर्ण ओसरलेला…….!
आणि गालावर एवढ्यात लाजेची खळी फुटलेली …!
तात्पर्य काय …
आपल्याला योग्य वेळी संसारात योग्य शब्दांची फुंकर घालता यायला हवी…!
म्हणजे मग नवरा बायकोचे भांडण फार वेळ धगधगत राहत नाही…
आधी रात का समय और काफी तेज ठंड थी, एक घर में चोर चोरी करने के इरादे से अंदर आये.
अंदर आते ही चोरो ने उस घर के चारो और नजर घुमाई… घर में कुछ भी नहीं था.
पूरा का पूरा घर खाली था.
घर के अंदर सिर्फ एक गरम शाल थी, वो भी उस घर का मालिक ओढ़ के सोया था,
चोरो की आहट से भला आदमी जाग गया.
सुंदर विचार
तेज ठंड…! वो आदमी रोने लगा, घर में चोर आये है और मेरे घर में चोरी करने जैसा
कुछ भी नहीं है, इस दर्द से रोने लगा. उसको रोता देख चोरों ने पूछा कि बाबा क्यों रोते हो…?
बाबा बोले कि आप लोग आए है…
जीवन में पहली बार, यह सौभाग्य तुमने मुझे दिया है, मुझ जैसे गरीब को भी यह मौका
तुमने दिया है.
चोर झोंपड़ी में चोरी करने नहीं जाते, बड़े बड़े घरो में अमीरो के यहां चोरी करने जाते है…!
तुम मेरी झोंपड़ी में चोरी करने क्या आए… तुमने मेरे घर को बंगला और मुझे बड़ा
आदमी बना दिया. मेरा ऐसा सौभाग्य…! लेकिन फिर मेरी आंखें आंसुओ से भर गई हैं…
मुझे रोना आ रहा है… क्योंकि मेरे घर में कुछ भी नहीं है…! पूरा घर खाली है.
तुम लोग थोडा चार दिन पहले बता देते तो मै कुछ व्यवस्था करके रखता.
मुझे चार दिन का समय मिल जाता.तो, कुछ ना कुछ मांग सांग कर जमा कर लेता.
अभी तो मेरे पास सिर्फ ये शाल है, ये लेलो, चोर एकदम से डर गए,
बाबा बोला देखो मना मत करना, तुम्हारे मना करने से मुझे बहोत दुःख होगा की
मै तुम्हे कुछ न दे सका, चोरों के समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था, उनके जीवन में
पहली बार उनका ऐसे आदमी से पला पड़ा था, चोरी करते करते जिंदगी बित गयी
लेकिन ऐसे इंसान से पहली बार मिले थे,
Hindi-Story-hindi-kahani-good-thoughts-in-hindi-सुंदर विचार
भीड़ तो बहुत है… इंसान कहां…? चेहरे है इंसान के.. इंसान कहां…?
सुंदर विचार
जीवन में पहली बार चोरो की आंखों में शर्म आई… और सभी चोर उस बाबा के सामने
नतमस्तक हो गए. सभी असमंजस में थे, क्या करे… ! क्या ना करे….!
आखिर शाल ले ही लिया, और उस बाबा को क्या दुःख देना…
शाल भी बड़ा मन कर के ही लिया, बाबा के पास एक ही शाल था, वो ही शाल ओढ़ता
और वो ही बिछाता, बाबा भी उनकी असमंजस को भाप गया और कहने लगा.
तुम लोग मेरी चिंता न करो, मुझे आदत है, इतनी सर्दी में कौन बाहर निकलता है भाई,
तुम चुपचाप ये शाल ले जाओ, हां.. दुबारा जब भी आओ मुझे जानकारी देकर ही आओ,
चोर जल्दी से झोपडी के बहार निकल गए, तभी बाबा की कड़क आवाज सुनाई दी..
दरवाजा बंद कर दो और मुझे धन्यवाद कहो, चोर भी सोच में पड गए, चोरों ने जैसे तैसे
धन्यवाद बोला और भागे वहां से.
बाबा खिड़की पर खड़े होकर भागते हुए चोरों को जब तक दिख रहे थे तब तक देखता रहा.
सुंदर विचार
कोई इंसान नहीं है भगवान की तरह… लेकिन सभी इंसान के अंदर जो धड़क रहा है…. जो प्राणों का मंदिर बनाए हुए विराजमान है…. जो श्वासें ले रहा है…. वही तो भगवान है.
कुछ दिनों बाद वो सभी चोर पकड़े गए…. अदालत में मुकदमा चला, वह शाल भी पकडी गयी…
और वह शाल सभी की पहचान की थी, उस बाबा को सभी जानते थे, हमेशा वोही शाल ओढ़े रहते थे,
न्यायाधीश भी पहचान गए की यह शाल उस घूमनेवाले बाबा की है,
न्यायाधीश बोले – तो तुमने उस घूमनेवाले बाबा के यहां से भी चोरी की है…? बाबा को बुलाया गया
और न्यायाधीश ने सख्त शब्दों में कहा की अगर बाबा ने ये शाल मेरा है यह कह दिया तो आगे किसी भी
सबूत की जरूरत नहीं पड़ेगी, मै उसी वक़्त नियम से जितनी कड़क सजा दे सकता हु उतनी जरूर दूंगा,
वह बाबा बहोत ही भले है और सच्चे है, उनकी गवाही इस मुक़दमे की अंतिम गवाही मानी जाएगी.
चोरों का तो गला ही सुख गया…. घबराहट से काँप रहे थे…..
बाबा अदालत में आए…. उनसे शाल और चोरों के बारे में पूछा गया…. कुछ देर तो शांत रहे,
फिर अपनी गवाही देनी सुरु की…
बाबा ने न्यायाधीस से कहा – ये शाल मेरी ही है लेकिन…. मैंने इन्हें ये भेट दी है, और इसके लिए इन्होने
मुझे धन्यवाद भी किया है, मै इन्हें जानता हु ये चोर नहीं है, बड़े ही भले लोग है, मेरे शाल देने पर मेरा
धन्यवाद तो किया ही लेकिन जब ये लोग मेरी झोपडी से बाहर गए तो, दरवाजा भी बंद कर के गए थे,
ये बहोत अच्छे और भले है, इन्हें मत सताओ.
Good Thoughts Hindi On Life [ सुंदर विचार ]
बाबा के गवाही पे न्यायाधीश ने चोरों को तो छोड़ दिया, लेकिन सभी चोरों ने बाबा के पैर पकड़ लिए….
रोने लगे…. और बाबा को कहा हमें अपना शिष्य बनाओ… हमें दीक्षित करो…. हमारा उद्धार करो.
बाबा जोर जोर से हंसने लगे और कहा, तुम मेरे शिष्य बन सको इसिलिये तो शाल भेंट की थी,
इस शाल को संभालना तुम्हारे बस का नहीं ये मै अच्छे से जानता था, क्योंकि ये शाल मैंने प्रार्थनाओ
से बुना है, इसी शाल से घंटो ध्यान लगाकर समाधी लगाई है, इस शालमें रंग मेरी समाधी
का है.
मुझे पूरा विश्वास था की… शाल तुम्हे मेरे पास ले ही आएगा..
उस दिन चोर बनकर आये, आज शिष्य बनकर आये हो… स्वागत है तुम्हारा….
क्योंकि…
कोई इंसान बुरा होता ही नहीं….. इंसान के अंदर छुपी हुई बुराई ही बुरी होती है… बस…. इसी बुराई को बाहर निकालकर फेंकना है….!
सुंदर विचार – Good Thoughts in Hindi On Life
जीवन में कभी निराश नहीं होना चाहिये,
क्योंकि जहाँ दुखों की भीड़ ठहरी होती है…
वही थोड़ी दुरी पर खुशियाँ भी मौजूद होती है.
अगर हम थोड़ा सब्र और थोड़ी सुझ भुज रखेंगे
और किसी भी परिस्तिथि में डरे नहीं…!
बाकी शख्सियत कपड़ों की नहीं…
बल्कि खुद के विचारों की बनाओ.
ये दुनिया आपको लाइक ही नहीं…
फॉलोभी करेगी.
जियो दिल से…!
सुंदर विचार
श्रद्धा जब इंसान के अंदर
अपनी जड़े मजबूत कर लेती हैं…
तो बुराई करना मुश्किल और
भलाई करना आसान हो जाता हैं…!
नाम और पतंग जितनी ऊंचाई पर होते हैं
काटने वालों की संख्या उतनी ही अधिक होती है.
Good Thoughts in Hindi
फल और फूल
पेड़ पर पत्तों से कम होते हैं
लेकिन वो पेड़ फिर भी
उन्हीं के नाम से जाना जाता है …!
उसी तरह…
हमारे पास अच्छी बातें
कितनी ही क्यूँ ना हों…
लेकिन पहचान
तो सिर्फ अच्छे कर्मों से ही होती है.
Hindi Suvichar [Sunder Vichar ]
जो दिखाई नहीँ देता है
वही बुनियाद होता है…!
फिर वह चाहे ईश्वर हो…
संस्कार हो या फिर विचार हो.
क्योंकि…
जिनकी गति और मती
अर्जुन की तरह है…!
उनका रथ तो आज भी
भगवान श्री कृष्ण ही चलाते हैं.
जय श्री कृष्ण
पेड़ पर फल और फूल
पत्तों से कम होते हैं. लेकिन
फिर भी वो पेड़… उन्हीं के
नाम से जाना जाता है…!
ठीक उसी तरह
हमारे पास अच्छी बातें
कितनी ही क्यूँ ना हों… परंतु
पहचान तो सिर्फ
अच्छे कर्मों से ही होती है.
अगर भूल से कभी आपको ये घमंड आ जाये की…
मेरे बिना तो यहाँ काम चल ही नहीं सकता…!
तब आप अपने घर की दीवारो पर टंगी
अपने पूर्वजो की तस्वीरो की तरफ देख लेना
और सोचना की क्या उनके जाने से
कोई काम रुका है…?
जवाब आपको स्वतः ही मिल जायेगा.
चौरासी लाख योनियो में
एक इंसान ही पैसा कमाता है…
अन्य कोई जीव कभी भूखा नहीं मरा
और इंसान जिसका कभी पेट नहीं भरा…!
जीवन का कड़वा सत्य
इन्सान अपनी सैलरी के हिसाब से नहीं
अपनी जरूरतों के हिसाब से गरीब होता है…!
अपनी आलोचना को धैर्य से सुनें…
यह हमारी ज़िन्दगी की मैल हटाने में
साबुन का काम करती है…!
न मैं गिरा… और न मेरी उम्मीदों के मीनार गिरे…!
लेकिन लोग मुझे गिराने मे कई बार गिरे…!
सवाल जहर का नहीं था
वो तो मैं पी गया…
तकलीफ लोगों को तब हुई…
जब मैं फिर भी जी गया…!
लोगों का आदर केवल उनकी
सम्पत्ति के कारण नहीं करना चाहिये…
बल्कि… उनकी उदारता के कारण करना चाहिये.
हम सुरज की कद्र उसकी उँचाई के कारण नहीं करते
बल्कि उसकी उपयोगिता के कारण करते हैं.
इसीलिए व्यक्ति नहीं…व्यक्तित्व आदरणीय है.
संदेह… मुसीबत के पहाड़ों का
निर्माण करता हैं…!
और विश्वास पहाड़ों में से भी
रास्ते का निर्माण करता है…!
परमात्मा शब्द नही जो तुम्हे
किताब में मिलेगा…
परमात्मा मूर्ति नही जो तुम्हे
मंदिर में मिलेगा…
परमात्मा इंसान नही जो तुम्हे
समाज में मिलेगा…
परमात्मा तुम स्वंय हो जो तुम्हे…
अपने भीतर मिलेगा…!
चालाकियो से कुछ देर के लिए
मोहित किया जा सकता है…!
दिल जितने के लिए तो
सहज और सरल होना जरूरी है.
Hindi Suvichar [Sunder Vichar ]
परमात्मासे कुछ मांगो मत सिर्फ उन्हे याद करो
जब आपको गर्मी होती है तो आप पंखे से हवा नही मांगते…
आप उसके सामने बैठ जाते है और हवा अपने आप आपको
मिल जाती है…! उसी प्रकार परमात्मा के सामने बैठकर
उसे हम दिलसे याद करे तो परमात्मा की सारी शक्तिया
आपको स्वतः मिल जायेंगी आपको मांगने की जरुरत नहीं पडेगी.
Sunder Vichar | Suvichar
समय और जिन्दगी
दुनिया के सर्वश्रेष्ठ अध्यापक हैं
जिन्दगी… समय का सदुपयोग सिखाती है
और..समय हमें जिन्दगी की कीमत सिखाता है.
सुख का ताला केवल और केवल
संतुष्टि की चाबी से खुलता है.
जब तकलीफ़ हो जीने में…
तो श्री कृष्ण को बसा लो सीने में.
दुनिया को छोडो पहले उसे खुश रखो
जिसे आप हमेशा आईने में देखते हो.
दो तथ्य हमारे व्यक्तित्व को
परिभाषित करते हैं…!
एक – हमारा धीरज
जब हमारे पास कुछ ना हो…!
दूसरा – हमारा व्यवहार…
जब हमारे पास सब कुछ हो…!