सुंदर विचार – Good Thoughts In Hindi – अच्छे विचार
लोहे की एक छोटी सी छड का मूल्य होता है… 250 रूपये.
इससे घोड़े की नाल बना दी जाये तो इसका मूल्य हो जाता है…1000 रूपये.
इससे सुईयां बना दी जायें तो इसका मूल्य हो जाता है 10,000 रूपये.
इससे घड़ियों के बैलेंस स्प्रिंग बना दिए जायें तो इसका मूल्य हो जाता है…
1,00,000 रूपये.
आपका अपना मूल्य…
इससे निर्धारित नहीं होता की आप क्या है…!
बल्कि इससे निर्धारित होता है की…
आप में खुद को क्या बनाने की क्षमता है…!
एक खुबसूरत मुस्कान के साथ सुबह की
ठंडी हवा के अहसास के साथ…
आपका दिन मंगलमय हो और
Hindi Kahani | दही का मूल्य
Hindi motivational Story
कोल्हे जी का छोटा सा परिवार था. इस छोटे से परिवार में कोल्हे जी, उनका एक बेटा और पत्नी,
ये तीन ही लोग थे परिवार में. तीनो हमेशा बहोत ही खुश रहते थे.
कोल्हे जी का बेटा बहोत ही आज्ञाकारी और शांत स्वभाव का था. कोल्हे जी ने अभी कुछ ही
महीने पहले अपनी शादी की 25 वी सालगिरह बड़ी ही जोर – शोर से मनाई थी. अभी छे महीने
भी नहीं हुवे होंगे सालगिरह मनाये हुवे की अचानक उनकी पत्नी का स्वर्गवास हो जाता है.
जैसे तैसे बाप बेटे खुद को संभालते है. एक दूसरे का सहारा बनते है.
कुछ दिन गुजरने के बाद कोल्हे जी के मित्र और रिश्तेदार कोल्हे जी को दूसरी शादी की सलाह
देते है. लेकिन वो साफ मना करते हुवे कहते है की पुत्र के रूप में पत्नी की दी हुई भेंट मेरे पास हैं.
इसी के साथ पूरी जिन्दगी अच्छे से कट जाएगी. ऐसा कहके टाल देते है.
समय का चक्र घूमता है और बेटा बड़ा हो जाता है, कॉलेज की पढाई पूरी कर लेता है, और
अपने पिताजी के कारोबार की जिम्मेदारी खुद उठाने लग जाता है, तब कोल्हे जी उसकी
शादी कर देते है, अपना सारा कारोबार बेटे को सोप देते है, और घर बहु को सौप के खुद निश्चिंत
हो जाते है.
Hindi Kahani | दही का मूल्य
Hindi motivational Story
अब कोल्हे जी का समय कभी अपने बेटे के ऑफिस में तो कभी दोस्तों के ऑफिस में बैठकर
व्यतीत होने लगा. दोहपर में खाना खाने घर जाते थे, खाना खाकर फिर लौट आते थे.
बेटे के शादी के लगभग 4 वर्ष बाद कोल्हे जी दोहपर में अपने घर पे खाना खा रहे थे… उनका
बेटा भी उस दिन खाना खाने के लिए ऑफिस से घर आया था, और हाथ – मुँह धोकर खाना
खाने की तैयारी कर रहा था. उसने सुना कि पिता जी ने बहू से खाने के साथ दही माँगा और
बहू ने जवाब दिया कि आज घर में दही उपलब्ध नहीं है. पिताजी ने कोई बात नहीं कह के
खाना खाकर पिताजी ऑफिस चले गये.
थोडी देर बाद बेटा अपनी पत्नी के साथ खाना खाने बैठा. बेटे ने देखा की खाने में एक कटोरी
दही भी था. बेटे ने कुछ नहीं कहा और खाना खाकर खुद भी ऑफिस के लिए निकल गया.
कुछ दिन बाद पुत्र ने अपने पिताजी से कहा – पापा आज आपको कोर्ट चलना है,
आज आपका विवाह होने जा रहा है. पिता ने आश्चर्य से पुत्र की तरफ देखा और कहा –
बेटा मुझे पत्नी की आवश्यकता नही है और मैं तुझे इतना स्नेह देता हूँ कि शायद तुझे भी
माँ की जरूरत नहीं है….
फिर दूसरा विवाह क्यों…..? बेटे ने कहा… पिता जी, न तो मै अपने लिए माँ ला रहा हूँ
न आपके लिए पत्नी…! मैं तो केवल आपके लिये दही की व्यवस्था कर रहा हूँ.
कल से मै किराए के घर मे आपकी बहू के साथ रहूँगा तथा आपके ऑफिस मे एक कर्मचारी
के जैसे पगार लूँगा ताकि… आपकी बहू को दही के मूल्य का पता चल सके.
Hindi Kahani | दही का मूल्य
Hindi motivational Story
Good Thoughts - मुस्कुराइए - ख़ुश रहिए - Be Happy - Images Suvichar
मुस्कुराते रहिए | ख़ुश रहिए | Hindi Motivational Story
मुस्कुराते रहिए… ख़ुश रहिए.. अपनी खोई हुई खुशियों को ढुंढीये
एक मनोचिकित्सक के पास उनके पहचान की महिला क्लिनिक मे पहुंची.
चिकित्सक ने परेशानी पुछने पर वह महिला बोली…
डॉ साहब…! मुझे ऐसा लगता है कि मेरे जीवन का कोई अर्थ नहीं है, मेरा पूरा जीवन बेकार है.
मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है की… क्या करु.. और क्या ना करू.
सारा दिन उदास रहती हुं… मानो मेरी खुशियों को कोई चुरा ले गया है,
क्या आप मेरी खुशियाँ ढूँढने में मदद करेंगें…?मनोचिकित्सक उस महिला के परिवार को जानता था, वे लोग काफी पैसे वाले थे और
शाही जिंदगी जीते थे, जो महिला सामने थी, उसने भी काफी महंगे कपड़े पहने थे
और गहने भी पहने थे.
थोड़ी देर चुप रहने के बाद चिकित्सक बोला.… मेरे क्लिनीक में काम करनेवाली एक बूढ़ी महिला को
बुलाता हुं, जो पुरे क्लिनीक की सफाई करती है साथ ही बगीचे को भी संभालती है. वह महिला आपको,
अपने जीवन की खुशियों को कैसे ढुंढ निकाला यह बताएंगी, आप जरा ध्यान से उसकी बात सुनना.
बुढी महिला आते ही साहब ने बैठने को कहा, हाथ का झाडू बाजु में रखा और उस धनवान महिला के
सामने बैठ गई. तभी चिकित्सक ने कहा की, तुम्हारी खुशीयों को तुमने कैसे ढुंढ निकाला, ये इन्हें बताओं.
बुढ़ि महिला बताने लगी :- मेरे पति की पीलिया से मृत्यु हो गई और इस दुःख से बाहर भी नहीं निकलीं थी
की मेरा सहारा, मेरा बेटा..… ठीक २ महिने बाद उसकी सड़क हादसे में मृत्यु हो गई. मेरा सब कुछ ख़त्म
हो चुका था, मैंने खाना- पिना छोड़ दिया था, मैं चाहकर भी कुछ खा नहीं पाती थी, सो नहीं पाती थी,
मैंने मुस्कुराना बंद कर दिया था, सिर्फ जिंदा लाश थी.
मैं स्वयं के जीवन को समाप्त करने तरीके सोचने लगी थी. तभी एक दिन, मैं जब अपने घर आ रहीं थीं तो,
एक कुत्ते का छोटा-सा बच्चा मेरे पीछे लग गया. उस दिन घर आने में मुझे थोड़ी देर हुई थी. और बाहर बहुत
ठंड थी. वो छोटा सा बच्चा ठंड से हलका कांप रहा था, इसलिए मैंने उस बच्चे को घर के अंदर आने दिया.
उसके के लिए थोड़े से दूध का इंतजाम किया और वह सारा दुध सफाचट कर गया. फिर वह मेरे पैरों से
लिपट कर बैठ गया और पैर चाटने लगा.
Good Thoughts – मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy – Images Suvichar
उस दिन… महीनों बाद मैं मुस्कुराई. तब मैंने सोचा यदि इस कुत्ते के बच्चे की मदद करने से
मुझे ख़ुशी मिल सकती है…! तो हो सकता है कि दूसरों के लिए कुछ करके मुझे और भी ख़ुशी मिले.
इसलिए अगले दिन मैं अपने पड़ोसी, जो कुछ दिनों से बीमार था,
उसके लिए कुछ फल और खिचड़ी बना कर ले गई.
इस तरह हर दिन मैं कुछ नया और कुछ ऐसा काम करती थी, जिससे दूसरों को ख़ुशी मिले
और उन्हें खुश देख कर मुझे भी ख़ुशी मिलती थी.
आज मैंने खुशियाँ ढूँढी हैं… दूसरों को ख़ुशी देकर.
यह सुन कर वह धनवान महिला रोने लगी. उसके पास वह सब था,
जो वह पैसे से खरीद सकती थी…
लेकिन उसने वह चीज खो दी थी जो पैसे से नहीं खरीदी जा सकती.मित्रों…!
हमारा जीवन इस बात पर निर्भर नहीं करता कि हम कितने खुश हैं,
बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि हमारी वजह से कितने लोग खुश हैं.
तो आज से ही शुभारंभ करें इस संकल्प के साथ कि…
आज हम भी किसी न किसी की खुशी का कारण बनेंगे.
Good Thoughts – मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy – sunder vichar
मुस्कुराइए
अगर आप एक शिक्षक हैं और जब आप मुस्कुराते हुए क्लासरूम में प्रवेश करेंगे तो,
देखिये सारे बच्चों के चेहरों पर मुस्कान छा जाएगी.
मुस्कुराइए
अगर आप चिकित्सक हैं और मुस्कराते हुए रोगी का इलाज करेंगे तो रोगी का
आत्मविश्वास दुगना हो जायेगा.
मुस्कुराइए
अगर आप एक ग्रहणी है तो, मुस्कुराते हुए घर का हर काम करें,
फिर देखना पूरे परिवार में खुशियों का माहौल बन जायेगा.
मुस्कुराइए
अगर आप घर के प्रमुख है तो मुस्कुराते हुए शाम को घर में प्रवेश करेंगें,
तो देखना पूरे परिवार में खुशियों का माहौल बन जायेगा.
मुस्कुराइए
अगर आप एक व्यापारी हैं और आप खुश होकर अपने कारखाने में प्रवेश करते हैं,
तो देखना सारे कर्मचारियों के मन का तनाव कम हो जायेगा और माहौल
खुशनुमा हो जायेगा.
मुस्कुराइए
अगर आप दुकानदार हैं और मुस्कुराकर अपने ग्राहक का सम्मान करेंगे तो ग्राहक
खुश होकर आपकी दुकान से ही सामान लेगा.
मुस्कुराइए
कभी सड़क पर चलते हुए अनजान आदमी को देखकर मुस्कुराएं…!
देखिये उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ जाएगी.
मुस्कुराइए
क्योंकी मुस्कराहट के पैसे नहीं लगते, ये तो ख़ुशी और संपन्नता की पहचान है.
मुस्कुराइए
क्योंकी आपकी मुस्कराहट कई चेहरों पर मुस्कान लाएगी.
मुस्कुराइए
क्योंकी ये जीवन आपको दोबारा नहीं मिलेगा.
मुस्कुराइए
क्योंकी गुस्से से दिया गया आशीर्वाद भी बुरा लगता है, और मुस्कुराकर कहे गए बुरे शब्द भी
अच्छे लगते हैं.
मुस्कुराइए
क्योंकी दुनिया का हर आदमी खिले फूलों और खिले चेहरों को पसंद करता है.
मुस्कुराइए
क्योंकि आपकी हँसी किसी की ख़ुशी का कारण बन सकती है.
मुस्कुराइए
क्योंकी परिवार में रिश्ते तभी तक कायम रह पाते हैं, जब तक हम एक दूसरे को देख कर
मुस्कुराते रहते है. और सबसे बड़ी बात
मुस्कुराइए
क्योंकि यह मनुष्य होने की पहचान है. एक पशु कभी भी मुस्कुरा नही सकता.
इसलिए स्वयं भी मुस्कुराए और औराें के चहरे पर भी मुस्कुराहट लाएं.
मुस्कुराइए क्योंकी यही जीवन है.
सबसे बेहतरीन रिश्ता वही होता है… जहा एक हल्की सी मुस्कराहट
और छोटी सी माफ़ी से
जिंदगी पहले जैसी हो जाती है.
Good Thoughts – मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy
जीवन के हर मोड़ पर सुनहरी यादों को रहने दो.
जुबान पर हर वक़्त मिठास को रहने दो
यही अंदाज है जीने का…!
न खुद उदास रहो….
न दूसरों को उदास रहने दो.
Good Thoughts – मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy
चलते रहे कदम तो दोस्तों
किनारा जरूर मिलेगा.
अंधकार से लड़ते रहे तो
सवेरा जरूर खिलेगा.
जब ठान ही लिया है मंजिल पर जाना
तो रास्ता जरूर मिलेगा.
ए राही ना थक… बस चल…
एक दिन तेरा समय जरूर फिरेगा.
Good Thoughts – मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy – Images Suvichar
शुभकामनाये मिल जाए सब की
बस यही काफी है…!
दवाए तो
कीमत अदा करने पर मिल ही जाती है.
Good Thoughts – मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy – Images Suvichar
सिर्फ एक इच्छा करने से कुछ नहीं बदलेगा.
एक निर्णय लेने से कुछ बदलता है.
लेकिन एक निश्चय से सब कुछ नहीं बदल जाता है.
Good Thoughts – मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy – Images Suvichar – vb good thoughts
मुश्किल कार्य
उन आसान कार्यों का ढेर है..
जो हमने समय पर नहीं किए.
Good Thoughts – मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy – Images Suvichar – suvichar
अच्छाई – बुराई मनुष्य के
कर्मों मे होती है.
कोई बास का तीर बनाकर
किसी को चोट पहुंचाता है….!
तो कोई बाँसुरी बनाकर
उसी बाँस मे सुर भरता है.
मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy – Images Suvichar – good thoughts – suvichar
भगवंतावर विश्वास | मराठी प्रेरणादायी कहाणी Marathi kahani
एक लहान अशा जुन्या घरात एक वैद्यजी राहत होते. घराच्या समोरच्या भागात त्यांचा
दवाखाना होता आणि मागे ते परिवारा सोबत राहत होते.
ते वैद्यजी दररोज दवाखान्यात जायला निघाले की त्यांची पत्नी त्यांना दररोज संसाराला
लागणाऱ्या वस्तूची यादी एका चिठ्ठीत लिहून त्यांच्याकडे देत असे आणि वैद्य जी
आपल्या दवाखान्यात आल्यावर आपली साधी पूजा – अर्चना करून,
भगवंताचे नाव घेऊन, मगच ती पत्नी ने दिलेली चिठ्ठी उघडत असत.
त्यांच्या पत्नीने जी वस्तूंची यादी दिलेली असते त्या समोर, ती वस्तू घ्यायला लागणारी रक्कम
लिहित होते आणि शेवटी हिशोब करून भगवंताला प्रार्थना करीत की…
हे भगवंता मी तुमची भक्ती सोडून तुमच्याच आदेशानुसार या प्रपंचाच्या चक्रात येऊन,
आपली जवाबदारी पूर्ण करीत आहे.
ते वैद्यजी कधीच आपल्या तोंडाने रोग्याला पैसे मागत नसत. कुणी द्यायचे तर कुणी नाही द्यायचे.
पण एक गोष्ट निश्चित होती की… त्या दिवसाच्या सामानाचा लावलेल्या हिशोबाची रक्कम पूर्ण झाली की…
नंतर आलेल्यांकडून ते काहीच पैसे घेत नव्हते. मग तो येणारा रोगी गरीब असो किंवा श्रीमंत असो.
भगवंतावर विश्वास | मराठी प्रेरणादायी कहाणी | Marathi kahani
असाच एक दिवस वैद्याजी ने दवाखाना उघडला. आपल्या खुर्चीवर बसून भगवंताचे स्मरण करून
पैशाचा हिशोब लावण्यासाठी चिठ्ठी उघडली आणि त्यांना एकदम आश्चर्याचा धक्काच लागला…!
एकटक त्या चिठ्ठीत बघतच राहिले. काही क्षण त्याचे मन भरकटले, डोळ्यासमोर तारे चमकायला लागले.
परंतु दुसऱ्याच क्षणी त्याने आपल्या मनावर नियंत्रण मिळवले. गव्हाचे पीठ, तेल-तूप-मीठ,
तांदूळ-डाळ या सामानानंतर पत्नीने शेवटी लिहिले होते… मुलीचे लग्न येत्या २५ तारखेला आहे,
तिच्या लग्नाला, हुंड्याला लागणारे सामान”
काही वेळ विचार करून बाकी सगळ्या सामानांची किंमत लिहून लग्नाला लागणाऱ्या सामाना समोर
त्यांनी लिहिले, “हे काम भगवंताचे आहे, तो जाणे आणि त्याचे काम जाणे.”
नेहेमी प्रमाणे काही रोगी आले, त्यांना वैद्याने औषधी दिली. या दरम्यान एक मोठीशी
कार त्यांच्या दवाखान्यासमोर येऊन थांबली. वैद्याने काही खास लक्ष दिले नाही, दर दिवशी
कुणी ना कुणी कार ने त्यांच्याकडे येत असत. आधी आलेले सर्व रोगी औषधी घेऊन निघून गेले.
तो सूट-बुटातला साहेब कारमधून बाहेर आला आणि नमस्कार म्हणत बेंचवर बसला.
वैद्यजी म्हणाले…. जर आपल्यालाऔषधी पाहिजे असेल तर आपण इकडे स्टूल वर या म्हणजे मी
आपली नाड़ी परीक्षण करू शकेल आणि कुणीदुसऱ्यासाठी औषधी हवी असेल तर
रोगाचे आणि स्थितीचे वर्णन करा.
ते साहेब म्हणू लागले, वैद्यजी, तुम्ही मला ओळखले नाही का…? माझे नाव हरीलाल आहे. आणि
आपण तरी कसे ओळखणार, कारण मी जवळपास १६ – १७ वर्षाच्या नंतर आपल्याकडे आलो आहे.
आपल्याला मी आपल्या मागच्या मुलाखतीबद्दल सांगतो, म्हणजे सारे काही समजून येईल.
जेव्हा मी पहिल्यांदा आलो होतो ना तेव्हा मी स्वतःहून आलो नव्हतो, खरे तर ती भगवंताची योजनाच
होती.भगवंताला माझ्यावर कृपा करण्याची इच्छा झाली होती, कारण त्याला माझ्या घरात आनंद
पाठवायचे होते. तसेच माझ्याही जीवनात भरभरून सुख आणायचे होते. आणि आपली ती पहिली भेट
आठवली की… आज देखील भगवंताच्या त्या साहजिक कृपेच्या प्रसंग आठवणीने… मी विनम्र होतो…
नतमस्तक होतो… अशब्द होतो…
घडले असे होते कि मी आपल्या बहिणीच्या घरी जात होतो. अगदी आपल्या दवाखान्याच्या समोर माझी
कार पंक्चर झाली. ड्राईवर कारचे चाक काढून पंक्चर लावायला चालला गेला. आपण बघितले कि मी
उन्हामध्ये कार जवळ उभा आहे. आपण माझ्याजवळ आलात आणि दवाखान्याकडे बोट दाखवून आत
यायला विनंती केली, इथे खुर्चीमध्ये सावलीत बस म्हणून म्हणालात. आंधळ्याला काय दोन डोळेच
पाहिजे असतात, मी खुर्चीमध्ये येऊन बसलो. आपण मला यथोचित गूळ – पाणी देऊन तृप्त केले.
का कोण जाणे पण ड्राइवरने देखील काही जास्तच वेळ घेतला होता.
दुपार झाली होती. एक छोटीशी मुलगी आपल्या गादीपाशी उभी होती आणि म्हणत होती,
चला ना बाबा, मला भूक लागली आहे. आपण तिला म्हणत होता, बाळा थोडा धीर धर…
जाऊ यातच आपण.
भगवंतावर विश्वास | मराठी प्रेरणादायी कहाणी | Marathi kahani
मी हा विचार केला कि इतक्या वेळचा आपल्या जवळ बसलो आहे आणि माझ्यामुळे आपण जेवायला
देखील जाऊ शकत नाहीत. म्हणून काहीतरी औषधी विकत घेऊन टाकू, म्हणजे माझ्या बसण्याचा
भार हलका होईल, काही उद्देश प्राप्त होईल.
म्हणून मी आपल्याला बोलता बोलता म्हणालो, वैद्यजी मागच्या ५ – ६ वर्षांपासून मी अमेरिकेत राहतो,
व्यवसाय करतो तिथे. अमेरिकाला जाण्यापूर्वीच माझे लग्न झाले आहे, पण मी संतती-सुखापासून मात्र
अजून वंचित आहे. इथे भारतात देखील बरेच उपचार केले, तिथे अमेरिकेत देखील दाखवले…
पण पदरी शेवटी निराशाच पडली आहे.
आपण म्हणालात, भगवंतापासून निराश होऊ नका, तो अत्यंत दयाळू आहे, तो खूप मोठा दाता आहे.
आपण म्हणालात, लक्षात ठेवा त्याच्या कोषागारात कशाचीही कमी नाही. कसलीही इच्छा तो पूर्ण करतो.
संतती, धन-दौलत, इज्जत, सुख-दुःख, जीवन-मृत्यु, सारे काही त्याच्याच हातात आहे. ते कुणा
वैद्य किंवा डॉक्टरच्या हातात नसते. ते कोणत्या औषधाने मिळत नाही.
जे काही व्हायचे असते ते सारे भगवंताच्या आदेशानेच होत असते. संतती जरी द्यायची असेल तरी दाता
तोच आहे.
आज देखील तो प्रसंग जशाच्या तसाच माझ्या नजरेसमोर आहे. माझ्याशी हे सारे बोलत असताना,
आपण एकीकडे औषधाच्या पुड्या बांधत होतात. सगळ्या औषधी आपण दोन भागात विभाजित करून,
दोन वेगवेगळ्या पाकिटात टाकल्या, आणि मला विचारून एका पाकिटावर माझे नाव टाकले,
आणि दुसऱ्यावर माझ्या पत्नीचे. माझ्या हातात ती औषधी देऊन…
घेण्याची विधी आपण समजावलीत.
मी ताबडतोब ती औषधी घेतली. कारण त्याच्या मागे फक्त आपल्याला काही पैसे देणे हा उद्देश होता.
परंतु… आपण पैसे घेण्याला नकार दिला. ‘बस, ठीक आहे’ म्हणालात. जेव्हा मी आग्रह केला
तेव्हा आपण म्हणालात की, आजचे खाते बंद झाले आहे. मला काहीच समजले नाही.
परंतु या दरम्यान माझा ड्राईवर आलेला होता.. तो आपल्याला ओळखत होता, त्याने आपली चर्चा
ऐकून मला सांगितले की… आजचे खाते बंद झाले म्हणजे वैद्य महाराजांना आजच्या दिवसाची घरेलू
खर्चासाठी लागणारी राशी, जी त्यांनी भगवंताला मागितली होती, तेवढी भगवंताने त्यांना रोग्यां मार्फत
दिली आहे. त्याशिवाय ते अधिक पैसे कुणा कडूनही घेत नाही.
मला स्वतःवरच राग आला… कारण मी माझ्या मनानेच लज्जित झालो.
माझे विचार किती खालचे होते आणि हा सरळ स्वभावाचा वैद्य किती महान आहे.
मी जेव्हा घरी जाऊन पत्नीला औषध दाखवली आणि सारा प्रसंग तिच्यासमोर उभा केला
तेव्हा तिला भगवतदर्शनाचा आनंद झाला, तिच्या डोळ्यातून पाणी आले, मन भरून आले,
आणि ती म्हणाली ते वैद्यजी म्हणजे कुणी व्यक्ती-माणूस नसून माझ्यासाठी तो देवतारूप माध्यम
बनून आले आहेत. आजवर एवढी औषधी घेतली, एवढे वैद्य, डॉक्टर झाले, आज मला माझ्या मनाची
इच्छा पूर्ण करणारा भगवंत या वैद्याच्या रूपाने, या औषधी स्वरूपाने भेटला आहे.
हे औषध माझ्या संतती सुखाचे कारण आहे, आपण दोघेही श्रद्धेने हे औषध घेऊया.
हरीलाल वैद्याला पुढे सांगू लागला, आज माझ्या घरी दोन फूल उमलले आहेत. आम्ही दोघे पति-पत्नी
प्रत्येक क्षणाला आपल्यासाठी प्रार्थना करत असतो. इतक्या वर्षात व्यवसायामुळे मला वेळच मिळत
नव्हता की स्वतः येऊन आपल्याला धन्यवादाचे दोन शब्द बोलावे म्हणून.
इतक्या वर्षांनी आज भारतात आलो आहे आणि कार केवळ आणि मुद्दाम इथेच थांबवली आहे.
वैद्यजी आमचा पूर्ण परिवार अमेरिके मध्येच राहत आहे. फक्त माझी एक विधवा बहीण आणि तिची
मुलगी इथे भारतात असते.
भगवंतावर विश्वास | मराठी प्रेरणादायी कहाणी | Marathi kahani
आमच्या त्या भाच्चीचे लग्न या महिन्याच्या २६ तारखेला होणार आहे. का कोण जाणे जेव्हा-जेव्हा मी
आपल्या भाच्चीसाठी काही सामान खरेदी केले तेव्हा माझ्या डोळ्यासमोर आपली ती छोटीशी मुलगी
यायची आणि मग प्रत्येक सामान मी डबल खरेदी करायचो. मी आपल्या विचारांना, तत्वाला, मूल्यांना
जाणत होतो, की संभवतः आपण हे सामान न घेवोत, परंतु असे वाटत होते कि माझ्या सख्ख्या भाच्चीच्या
बरोबर मला नेहेमी जो चेहरा दिसत आहे, ती पण माझी भाच्चीच तर आहे. माझे तिच्याशी एक नाते त्या
भगवंताने असे जोडले आहे, आणि म्हणून आपण त्या नात्याला नकार देणार नाही,
कारण माझ्या भाच्चीबरोबर या भाच्चीचा ‘भात भरण्याची’ माझी ज़िम्मेदारी त्याने मला दिली आहे.
वैद्याचे डोळे आश्चर्याने उघडेच्या उघडेच राहिले आणि सौम्य आवाजात म्हणाले, हरीलाल जी आपण जे
काही म्हणत आहात ते मला काहीच समजेनासे झाले आहे, भगवंताची काय माया आहे हे त्याचे तोच जाणे.
आपण माझ्या ‘श्रीमती’ च्या हाताने लिहिलेली हि चिठ्ठीबघा” असे म्हणून वैद्यांनी ती चिठ्ठी हरिलालजी ला
दिली. तिथे उपस्थित सारे ती चिठ्ठी बघून आश्चर्यचकित झाले, कारण “लग्नाचे सामान” याच्यासमोर लिहिले
होते ”हे काम भगवंताचे आहे, त्याचे तोच जाणे”
थरथरत्या आवाजात वैद्यजी म्हणतात, हरिलालजी, विश्वास करा की आज पर्यंत कधीही असे झाले नाही
की पत्नीने चिठ्ठीवर आवश्यकता लिहिली आहे आणि भगवंताने त्याची व्यवस्था केली नाही.
आपण सांगितलेली संपूर्ण गोष्ट ऐकून असे वाटते कि भगवंताला माहित होते कि कोणत्या दिवशी
माझी श्रीमती काय लिहिणार आहे. अन्यथा आपल्याकडून इतक्या दिवस आधीपासून या सामान
खरेदीची सुरवात भगवंताने कसा करवून घेतला असता…?
“वाह रे भगवंता, तुम्ही महान आहात…. तू दयावान आहात… मी आश्चर्ययात आहे की तुम्ही
कशा कशा रुपात येता…!
भगवंतावर विश्वास | मराठी प्रेरणादायी कहाणी | Marathi kahani
चातकाची तहान किती | तृप्ति करूनि निववी क्षिती ||१||
Good Thought | तुमचे भविष्य दोनच गोष्टी ठरवतात | Marathi Suvichar
Good Thought | तुमचे भविष्य दोनच गोष्टी ठरवतात | Marathi Suvichar
तुमचे भविष्य दोनच गोष्टी ठरवतात…
एक तर तुम्ही कशा पद्धतीच्या पुस्तका वाचता आणि दुसरे म्हणजे तुमचे मित्र कोण आहेत,
जर का तुम्ही चांगल्या पुस्तकांचे वाचन करता तर… नक्कीच तुमच्या अवती – भोवती चांगलीच
माणसे असतील. आणि चांगली मित्र – मंडळी असली कि जीवन चांगल्या उंचीवर जातो.
फक्त हे करून बघा…
काही दिवसातच तुम्हाला स्वतःमध्ये
बदल दिसेल आणि तुम्ही आनंदी व्हाल.
1 ) जगण्याची दिशा शोधा.
स्वत:लाच विचारा…! आपण जगतोय तरी कशासाठी…? आपले ध्येय तरी काय आहे…?
जग आणि जीवन खूप सुंदर आहे, जगाला हि दोष देवू नका आणि जगण्यालाही नाकारू नका.
ते म्हणतात ना… न करून पश्चाताप करण्यापेक्षा करून पश्चाताप करणे केव्हाही चांगले,
जगण्याची दिशा ठरवा.
2) दिवसाची सुरुवात आनंदाने करा.
आपल्या दिवसाची सुरुवात आनंदाने होईल असा प्रयत्न करा, आता आपण उठलो कि फोन असे होते,
त्या फोन मध्ये आपण काहीतरी नकारात्मक बघतो आणि आपला मूड ऑफ होतो,
आणि गंमत म्हणजे त्या विचारासी किवा त्या घटनेसी आपला काहीही संबंध नसतो,
आपल्याला राग येतो, आपला पूर्ण दिवस खराब होतो,
म्हणून उठल्यावर स्वत:ला सकारात्मक उर्जेचा डोस द्या.
3) जे काम करता ते अतिउत्तम करा.
जे काही करा ते अतिउत्तमच करा, मन लाऊन करा आणि थोडा जास्तच करा,
कुणी आपल्याकडून काही अपेक्षा ठेवतात…
आपण अपेक्षे पेक्षा जास्तच करायचे, जेमतेम तसेच सांगितलेले काम तर कुणीपण करते,
नेहमी काहीतरी खास करण्याची तैयारी ठेवा.
Good Thought | तुमचे भविष्य दोनच गोष्टी ठरवतात | Marathi Suvichar
4) चांगल्या मित्रांची निवड करा.
चांगले मित्र निवडा, मित्र चांगले असतील तर सल्ला हि चांगलाच देतील,
दुर्योधन शकुनीचा सल्ला घेत होता, आणि अर्जुन श्रीकृष्णाचा, स्वतावर नेहमी विश्वास ठेवा,
नेहमी मित्रांसोबत चांगले वागा, स्वतःवर प्रेम करा,
तुम्हाला बघुन दुसरेही आनंदी होतात.
मनसोक्त जगायचे आणि आपल्याला जे पटते ते करायचे….
आपल्या जन्मदिवशच्या दिवशीच मृत्यूचाही दिवस ठरलेला असतो,
आता आपण ठरवायचे कि जन्म पासून तर मृत्यू पर्यंतच्या मधील काळ कसा जगायचा,
इतरावर टीका करत जगायचे कि जीवनाचा भरपूर आनंद घेऊन जगायचा,
आपण सगळ्यांच्या अपेक्षा पूर्ण करू शकत नाही तसेच सगळ्यांच्या अपेक्षेवर खरे हि
उतरू शकत नाही,
आठ दहा दिवसा अगोदर एक सात आठ वर्षाची मुलगी माझ्याजवळ येवून मला म्हणाली…
काका एक विचारू का…?
मी विचार बाळा म्हटल्यावर ती म्हणाली काकाATMचा फुलफॉर्म सांगता का…?
बाळा हे तर खूप सोप्पे आहे, A – All T- Time M – Money
माझे उत्तर तिच्या अपेक्षेप्रमाणे नव्हते, ती हसली आणि म्हणाली काका तुम्ही चुकलात,
बर बाळा तू तुझे उत्तर सांग….
काका उत्तर आहे…. A – असेल T – तरच M – मिळेल
उत्तर एकुण मी तिच्या अपेक्षे प्रमाणे हरण्याचा भाव आपल्या चेहऱ्यावर आणला,
ती जिंकण्यासाठी आनंदी होऊन पुन्हा दुसऱ्याला विचारायला निघून गेली.
मुलगी निघून गेल्यावर मी मात्र विचारात पडलो, मुली ने दिलेले उत्तर किती खरे आहे,
तो उत्तर बँक आणि पैशाला तर लागू पडतोच पण माणसाच्या बाबतीतही तितकाच खरा आहे,
बँकेच्या बाबतीत तुमच्या खात्यात पैसे असतील तर मिळतील तसेच माणसाच्या बाबतीत
निसर्ग नियमाप्रमाणे आपण निसर्गाजवळ काही जमा केले तर त्या मोबदल्यात
निसर्ग आपल्याला त्यापेक्षाही मौल्यवान आपल्याला देतो.
Good Thought | तुमचे भविष्य दोनच गोष्टी ठरवतात | Marathi Suvichar
चला बघू या…
जर का निसर्गा जवळ व्यायाम जमा केला तर आरोग्य परत मिळते.
विश्वास जमा केला तर निष्ठा परत मिळते.
प्रेम जमा केले तर समर्पण परत मिळते.
कर्म जमा केले तर साफल्य परत मिळते.
असेच माणसाने स्वतःच्या किंवा इतर माणसांच्या बाबतीत
जे पण जमा केलेली असतील त्याप्रमाणे त्याला निसर्गनियमानुसार
कितीतरी अधिक प्रमाणात…!
(A) अपेक्षित (T) ते (M) मिळेल
अर्थात… माणसांच्या बँकेतही आपली जमा मात्र सतत करावी लागते.
ही स्थिती माणसांची तर भगवंताच्या बाबतीत….?
भगवंताच्या बँकेचे नियम काय असतील…?
हे समजण्या इतकी बुद्धी माझ्यात नाही. पण…
संतांच्या शिकवणुकीमधून
एक गोष्ट मात्र लक्षात आली आहे की,
भंगवंताच्या बँकेत आपण अगदी थोडी थोडी
भक्ती समर्पण भावाने जमा करत राहिलो तर…
आपण न मागताही… भगवंताकडून… (A) आवश्यक (T) ते (M) मिळेलच
पण भगवंताच्या बँकेची बम्पर ऑफर आहे….
आपला अहंकार…!
हा आपला अहंकार आयुष्यात
फक्त एकदाच आणि कायमचा जमा केला की
त्या दयासागर भगवंता कडून आपल्याला