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सुविचार | सुंदर विचार | Good Thoughts Hindi | अच्छे विचार

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सुविचार | सुंदर विचार | Good Thoughts Hindi
अच्छे विचार

जिस दिन आपको लगे की… पूरी दुनिया 

आपके सामने आपके खिलाफ खड़ी है…!

उस समय दुनिया की तरफ पीठ घुमाओ

और एक सेल्फी निकालो…

पूरी दुनिया आपके साथ होगी…!

सुंदर विचार – Good Thoughts In Hindi 

पितामह भीष्म के जीवन का एक ही पाप था…

की उन्होंने समय पर क्रोध नहीं किया…!
और जटायु के जीवन का एक ही पुण्य था…

की उसने समय पर क्रोध किया…!

परिणामस्वरूप…

एक को बाणों की शैय्या मिली

और एक को प्रभु श्री राम की गोद.

वेद कहता है :- क्रोध भी तब पुण्य बन जाता है

जब वह धर्म और मर्यादा के लिए किया जाए

और सहनशीलता भी तब पाप बन जाती है

जब वह धर्म और मर्यादा को बचा ना पाये.

आप का दिन शुभ और मंगलमय हो.

माना की वक़्त सता रहा है…!

मगर कैसे जीना है वो भी तो बता रहा है…!

सुप्रभात जी
जय श्री कृष्ण

एक नई सुबह एक नई उम्मीद
हमारी हिम्मत… आस… और

आस्था को

ईश्वर की कृपा  प्राप्त हो…!

सुंदर विचार – Good Thoughts In Hindi – अच्छे विचार 

लोहे की एक छोटी सी छड का मूल्य होता है… 250 रूपये.
इससे घोड़े की नाल बना दी जाये तो इसका मूल्य हो जाता है…1000 रूपये.
इससे सुईयां बना दी जायें तो इसका मूल्य हो जाता है 10,000 रूपये.
इससे घड़ियों के बैलेंस स्प्रिंग बना दिए जायें तो इसका मूल्य हो जाता है…
1,00,000 रूपये.

आपका अपना मूल्य…

इससे निर्धारित नहीं होता की आप क्या है…!
बल्कि इससे निर्धारित होता है की…

आप में खुद को क्या बनाने की क्षमता है…!

एक खुबसूरत मुस्कान के साथ सुबह की
ठंडी हवा के अहसास के साथ…
आपका दिन मंगलमय हो और

जीवन खुशियो से परिपूर्ण हो.

‼ शुभ – प्रभात ‼
Զเधे… Զเधे… Զเधे… Զเधे…
खुश रहो… मुस्कुराते रहो…

सुविचार | सुंदर विचार | Good Thoughts Hindi
अच्छे विचार

1)   जो बुद्धिमान हैं वह जानता हैं की…. मनुष्य जैसा दिखता हैं…

      उससे कहीं अधिक महान् हैं, और जो प्राणी मात्र में छुपे

      उस तत्व को जानते हैं वे स्वयं परमात्मा को ही जानते है.

2)   जो लोग छोटे कहलाते है… उनका बहुत बडा सहयोग होता है…!

3)   जो कार्य तुम आज कर सकते हों उसे कल पर कभी भी मत छोडे…!

 4) जो मन को अपने वश में नहीं करते… हृदय को शुद्ध नही बनाते…

        ईश्वर के प्रति उनकी सब प्रार्थना व्यर्थ है…!

 5) जो मन से संचालित नहीं होता बल्की अपने विचारों द्वारा मन को चलाता है…

     उसे मनीषी और ऐसी प्रज्ञा को मनीषा कहा जाता है…!

6) जो मन अज्ञान के कारण रात्रि हैं वही मन प्रज्ञा के प्रकाश से दिवस भी बन जाता हैं.

7) जो मनचाहा बोलता हैं… उसे अनचाहा सुनना भी पडता है…!

8) जो इंसान एक पाठशाला खोलता हैं वह संसार का एक जेलखाना बन्द कर देता है.

9) जो इंसान जितनी अपने स्वार्थ की आहुति करता हैं… उसकी शक्ति उतनी ही बढती है.

10) जो मनुष्य निश्चित को छोडकर अनिश्चित के पीछे भागता हैं उसका निश्चित कार्य

      नष्ट हो जाता हैं और अनिश्चित तो नष्ट हैं ही…!

11) जो मनुष्य समय पर अपने कार्य कर लेता हैं… वह पीछे पछताता नहीं…!

12) जो झिझकता हैं वह हारता है…!

13) जो किसी को कष्ट नहीं देता वही सुखी रहता है…!

14) जो किसी को दुःख नहीं देता… उसको देखने से पुण्य होता है…!

15) जो विद्या तुम्हे अहंकार… आलस्य… और अनीति… की ओर धकेले…

      उसे प्राप्त करने की अपेक्षा अशिक्षित रहना अच्छा.

16) जो विभिन्न महापुरुषों के चिन्तन के साथ रहते हैं…

       वे समझों की उन्ही के साथ रहते है…!

17) जो विपत्ति से डरते हैं, वह उन्ही पर ज्यादा आती है…!

18) जो जिम्मेदारी मिले… उसे ही सम्मान पूर्वक निबाहना मनुष्य का सर्वोत्तम कर्तव्य है.

19) जो हम बच्चों को सिखलाते हैं… उसे स्वयं कितना अपनाते हैं…!

20) जो हाथ सेवा के लिये आगे बढते हैं वे प्रार्थना करने वाले ओंठो से अधिक पवित्र है.

21) जो भी अपने कर्तव्य का पालन करेगा… वह श्रेष्ठ हो जायेगा…!

22) जो भोगी होता हैं… उसी की दृष्टि में परिस्थिति सुखदायी और दुःखदायी

      दो तरह की होती है… योगी की दृष्टि में परिस्थिति दो तरह की होती ही नही.

23) जो परिवर्तनशील हैं वह सत्य नहीं हो सकता…!

24) जो पवित्र नहीं… उदार नही… उसका जप-तप निरर्थक है…!

                          सोच का परिणाम

एक वे लोग होते हैं… जो कीचड़ में खिले हुए कमल की सुंदरता देखते हैं…!

दूसरे ऐसे लोग भी होते हैं… जो सुंदर शीतल चाँद में भी दाग देखते हैं…!

जीवन में हमेशा प्रशंसक बनने का प्रयत्न करें… निंदक नहीं…!

क्योंकि… प्रशंसा हमेशा सकारात्मक ऊर्जा को जन्म देती है…!

और निन्दा हमे नकारात्मक सोच की ओर ले जाती है…!

                       !!  जय श्री कृष्णा  !!

हिंदी में अच्छे सुविचार | Best Hindi Suvichar With Images

Hindi Kahani | दही का मूल्य | Hindi motivational Story

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Hindi Kahani | दही का मूल्य Hindi motivational Story
hindi-kahani-sunder vichar-dahi ki kimat

Hindi Kahani | दही का मूल्य
Hindi motivational Story

कोल्हे जी का छोटा सा परिवार था. इस छोटे से परिवार में कोल्हे जी, उनका एक बेटा और पत्नी,

ये तीन ही लोग थे परिवार में. तीनो हमेशा बहोत ही खुश रहते थे.

 कोल्हे जी का बेटा बहोत ही आज्ञाकारी और शांत स्वभाव का था. कोल्हे जी ने अभी कुछ ही
महीने पहले अपनी शादी की 25 वी सालगिरह बड़ी ही जोर – शोर से मनाई थी. अभी छे महीने
भी नहीं हुवे होंगे सालगिरह मनाये हुवे की अचानक उनकी पत्नी का स्वर्गवास हो जाता है.
जैसे तैसे बाप बेटे खुद को संभालते  है. एक दूसरे का सहारा बनते है.

 कुछ दिन गुजरने के बाद कोल्हे जी के मित्र और रिश्तेदार कोल्हे जी को दूसरी शादी की सलाह
देते है. लेकिन वो साफ मना करते हुवे कहते है की पुत्र के रूप में पत्नी की दी हुई भेंट मेरे पास हैं.

इसी के साथ पूरी जिन्दगी अच्छे से कट जाएगी. ऐसा कहके टाल देते है.

समय का चक्र घूमता है और बेटा बड़ा हो जाता है, कॉलेज की पढाई पूरी कर लेता है, और

अपने पिताजी के कारोबार की जिम्मेदारी खुद उठाने लग जाता है, तब कोल्हे जी उसकी
शादी कर देते है, अपना सारा कारोबार बेटे को सोप देते है, और घर बहु को सौप के खुद निश्चिंत
हो जाते है.

Hindi Kahani | दही का मूल्य
Hindi motivational Story

अब कोल्हे जी का समय कभी अपने बेटे के ऑफिस में तो कभी दोस्तों के ऑफिस में बैठकर

 व्यतीत होने लगा. दोहपर में खाना खाने घर जाते थे, खाना खाकर फिर लौट आते थे.

बेटे के शादी के लगभग 4 वर्ष बाद कोल्हे जी दोहपर में अपने घर पे खाना खा रहे थे… उनका
बेटा भी उस दिन खाना खाने के लिए ऑफिस से घर आया था, और हाथ –  मुँह धोकर खाना
खाने की तैयारी कर रहा था. उसने सुना कि पिता जी ने बहू से खाने के साथ दही माँगा और
बहू ने जवाब दिया कि आज घर में दही उपलब्ध नहीं है. पिताजी ने कोई बात नहीं कह के
खाना खाकर पिताजी ऑफिस चले गये.

थोडी देर बाद बेटा अपनी पत्नी के साथ खाना खाने बैठा. बेटे ने देखा की खाने में एक कटोरी
दही भी था. बेटे ने कुछ नहीं कहा और खाना खाकर खुद भी ऑफिस के लिए निकल गया.

कुछ दिन बाद पुत्र ने अपने पिताजी से कहा – पापा आज आपको कोर्ट चलना है,

आज आपका विवाह होने जा रहा है. पिता ने आश्चर्य से पुत्र की तरफ देखा और कहा –
बेटा मुझे पत्नी की आवश्यकता नही है और मैं तुझे इतना स्नेह देता हूँ कि शायद तुझे भी
माँ की जरूरत नहीं है….

फिर दूसरा विवाह क्यों…..? बेटे ने कहा…  पिता जी, न तो मै अपने लिए माँ ला रहा हूँ
न आपके लिए पत्नी…! मैं तो केवल आपके लिये दही की व्यवस्था कर रहा हूँ.

 कल से मै किराए के घर मे आपकी बहू के साथ रहूँगा तथा आपके ऑफिस मे एक कर्मचारी
के जैसे पगार लूँगा ताकि… आपकी बहू को दही के मूल्य का पता चल सके.

Hindi Kahani | दही का मूल्य
Hindi motivational Story

माँ-बाप हमारे लिये ATM कार्ड बन सकते है…. 

तो….. हम उनके लिए Aadhar Card तो बन ही सकते है.

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सकारात्मक सोच की शक्ति | Hindi Kahani | सुंदर विचार | सुविचार

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सकारात्मक सोच की शक्ति | Hindi Kahani | सुंदर विचार | सुविचार

सकारात्मक सोच की शक्ति | Hindi Kahani |
सुंदर विचार | सुविचार

एक व्यक्ति रेलवे स्टेशन से ऑटो में बैठकर अपने घर जा रहा था.

ऑटो वाला भी बड़े ही आराम से ऑटो चला रहा था. तभी एक कार अचानक ही

पार्किंग से निकलकर रोड पर आ गई. ऑटो ड्राइवर ने तेजी से ब्रेक लगाया और

कार और ऑटो की टक्कर होते – होते बच गई.

कार चलाने वाला व्यक्ति गुस्से से कार से बाहर निकलकर जोर जोर से ऑटोवाले

को ही बुरा – भला कहने लगा. जबकि गलती उस कर वाले की ही थी…!

ऑटो चालक एक धार्मिक और हमेशा सकारात्मक विचारों को सुनने – सुनाने

वाला था. ऑटोवाले ने कार वाले की बातों का न तों कोई जवाब दिया और

नाहीं कार वाले पे गुस्सा किया… एकदम शांति से माफ़ी मांगकर आगे निकल गया.

उस ऑटो में बैठे व्यक्ति को कार वाले के व्यवहार पर गुस्सा आ रहा था और

उसने ऑटो वाले से पूछा… तुमने उस कार वाले को बिना कुछ कहे ऐसे ही

क्यों जाने दिया… पूर्णरूप से गलती उसकी थी. और उपर से वहीं तुम्हे

भला बुरा कहने लगा. वो तो हमारे नसीब….! नहीं तो उसकी वजह से हम अभी

अस्पताल में होते.

ऑटो वाले ने बहुत ही दिल को छू लेने वाला जवाब दिया…

साहब…! कई लोग कचरे के ट्रक की तरह होते है… वे अपने दिमाग में…

कई तरह का कचरा भरे हुए चलते हैं…! वास्तविक उन चीजों की जीवन में कोई

आवश्यकता नहीं होती. उनको बड़ी ही मेहनत से जोड़ते रहते हैं.

जैसे…. क्रोध, घृणा, चिंता, निराशा और बहुत कुछ… जब उनके दिमाग में ये सब

 कचरा बहुत अधिक हो जाता है तो… वो लोग अपना बोझ हल्का करने के लिए

इसे दूसरों पर फेंकने का अवसर ढूँढ़ने लगते हैं.

इसलिए …..मैं ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखता हूँ और उन्हें दूर से ही मुस्कराकर

नमस्ते कह देता हूँ… क्योंकि… अगर उन जैसे लोगों द्वारा गिराया हुआ कचरा

मैंने अपनाया तो… मैं भी कचरे का ट्रक बन जाऊँगा और अपने साथ-साथ आसपास

के लोगों पर भी वह कचरा गिराता रहूँगा.

सकारात्मक सोच की शक्ति | Hindi Kahani |
सुंदर विचार | सुविचार

मेरे हिसाब से जीवन बहुत सुंदर है इसलिए… जो हमसे अच्छा व्यवहार करते हैं

उन्हें धन्यवाद कहो और जो हमसे अच्छा व्यवहार नहीं करते उन्हें मुस्कुराकर

भुला दो. हमें यह हमेशा याद रखना चाहिए की….

सभी मानसिक रोगी केवल अस्पताल में ही नहीं रहते हैं….

कुछ हमारे आसपास खुले में भी घूमते रहते हैं…!

प्रकृति के नियम :-

अगर खेत में बीज न डाले जाएँ तो… निसर्ग उसे घाँस – फूस से भर देता है…

उसी प्रकार से… अगर दिमाग में सकारात्मक विचार न भरें जाएँ तो

नकारात्मक विचार अपनी जगह बना ही लेते हैं.

दूसरा नियम है की…

जिसके पास जो रहता है…. उसीको वह बाँटता है…

जिसके पास सुख है वह सुख बाँटता है…!

जिसके पास दुःख है… वह दु:ख बाँटता है…

जिसके पास ज्ञान है… वह ज्ञान बाँटता है…

जो अपने जीवन में भ्रमित है… वह भ्रम बाँटता है…

और… जो डरा हुवा है… वह डर बाटता है…!

वह दूसरों को डराता है…!

दबा हुआ दूसरों को दबाता है…

चमका हुआ दूसरों को चमकाता है…

इसलिए…. नकारात्मक लोगों से दूरी बनाकर

अपने आप को नकारात्मकता से दूर रखे…

और जीवन में हरदम सकारात्मकता अपनाएं…

हरी ॐ जय श्री कृष्णा

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कर्म ही हमारा भाग्य है | Hindi Motivational Story | कहानी

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हमारा कर्म ही हमारा भाग्य है - Hindi Motivational Story | कहानी
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हमारा कर्म ही हमारा भाग्य है
Hindi Motivational Story | कहानी

जीवन के हर कदम पर

हमारी सोच, हमारे बोल    

हमारे कर्म ही

हमारा भाग्य लिखते हैं…!

एक बार एक धनवान भक्त मंदिर में पहुँचता हैं. उसके पैरों में नये जूते थे

और वह जूते काफी महँगे होने से वह भक्त सोचता है कि अब मै क्या करूँ…?

अगर मै जूते बाहर उतार कर अंदर गया तो जरूर कोई ना कोई उठा ले

जाएगा… और इसी डर से अंदर पूजा में मेरा मन भी नहीं लगेगा…

सारा ध्यान जूतों पर ही रहेगा.

सुंदर विचार – हिंदी सुविचार – Good Thoughts In Hindi On Life

सोचते सोचते उसका ध्यान मंदिर के बाहर बैठे एक भिखारी पर जाता है.

वह धनवान भक्त उस भिखारी से कहता है… भाई साहब, जब तक मैं पूजा

करके वापस वापसी नहीं आता… तब तक क्या आप मेरे जूतों का ध्यान

रखोगे…?  भिखारी हाँ बोलता है.

अंदर में पूजा करते समय वह धनवान भक्त सोचता है कि… हे परमेश्वर…

हे प्रभु… दयानिधान…. आपने यह कैसी असंतुलित दुनिया बनाई है…?

किसी को इतनी संपत्ति दिए कि… वह अपने पैरों में भी महँगे जूते पहनता

है…! और किसी को अपना सिर्फ अपना पेट भरने के लिये भीख तक

माँगनी पड़ती है…! कितना अच्छा होता कि… सभी इंसान एक समान

हो जायें…!

हमारा कर्म ही हमारा भाग्य है
Hindi Motivational Story | कहानी

वह धनवान भक्त फैसला करता है कि, जब वह बाहर जाकर उस भिखारी

से अपने जूते वापस लेते हुए उसे 200 का एक नोट जरूर देगा.

जब बाहर आकर वह धनवान भक्त देखता है कि, वहाँ ना तो वह भिखारी

है… और ना ही उसके जूते महंगेवालें जूते…

धनवान भक्त अपने आपको ठगा सा महसूस करता है. फिर भी वह कुछ

देर उस भिखारी की प्रतीक्षा करता है कि… हो सकता है… भिखारी किसी काम

से कहीं चला गया हो, लेकिन भिकारी बहुत देर तक प्रतीक्षा करने पर भी नहीं

आता…! फिर धनवान भक्त दु:खी मन से नंगे पैर ही घर के लिये निकल जाता है.

थोड़ी दूर चलने पर रास्ते में फुटपाथ पर देखता है कि एक व्यक्ति जूते चप्पल

बेच रहा है. धनवान भक्त एक जोड़ी चप्पल खरीदने की सोचकर वहाँ पहुँचता है…

परंतु वो यह देखता है कि उसके जूते भी वहाँ बेचने के लिए रखे हैं…! तो वह आश्चर्य

में पड़ जाता है…! फिर वह उस फुटपाथ वाले को जोर देकर उससे जूतों के बारे

में पूछता है. तो वह व्यक्ति बताता है कि… एक भिखारी उन जूतों को 200 रु. में

बेच गया है.

धनवान भक्त थोड़ी देर वहीं खड़ा रहकर कुछ सोचता है और मन ही मन मुस्कराते

हुये… बगैर चप्पल ख़रीदे नंगे पैर ही घर के तरफ निकल जाता है…! उस दिन

धनवान भक्त को उसके कई सवालों के जवाब मिल गये थे…!

कभी भी समाज में एकरूपता नहीं आ सकती…! क्योंकि हमारे कर्म भी कभी एक

समान नहीं हो सकते. और मान लो जिस दिन ऐसा हो गया उस दिन समाज और

इस जग की सारी विषमतायें समाप्त हो जायेंगी.

हर एक मनुष्य के भाग्य में परमेश्वर ने लिख दिया है कि… किसे कब

और कितना मिलेगा. लेकिन यह नहीं लिखा कि वह कैसे मिलेगा. यह हमारे

कर्म ही तय करते हैं.

जैसे कि भिखारी के लिये उस दिन तय था कि उसे 200 रु. मिलेंगे. लेकिन

कैसे मिलेंगे यह उस भिखारी ने अपने कर्म द्वारा तय किया.

हमारे कर्म ही हमारा भाग्य, यश, अपयश, लाभ, हानि, जय, पराजय,

दुःख, शोक, लोक, परलोक तय करते हैं. हम इसके लिये परमेश्वर को दोषी

नहीं ठहरा सकते है.

हमारा कर्म ही हमारा भाग्य है
Hindi Motivational Story | कहानी

हमारा कर्म ही हमारा भाग्य है - Hindi Motivational Story | कहानी
हमारा कर्म ही हमारा भाग्य है – Hindi Motivational Story | कहानी

ना झुकाने का शौक है…

कुछ एहसास दिल से जुड़े हुए हैं…

बस्स…

उन्हें निभाने का शौक है…!

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मदत-help-सुविचार-इमेजेज-हमारा-कर्म-ही-हमारा-भाग्य है

किसी की मदद करने के लिए

धन की नहीं…

एक अच्छे मन की

आवश्यकता होती है…!

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सुविचार-इमेजेज-हमारा-कर्म-ही-हमारा-भाग्य-है.

ताकत की जरूरत तभी होती है…

जब कुछ बुरा करना हो…

वरना दुनिया में सब कुछ

पाने के लिए प्रेम ही भी है.

मराठी सुविचार | योग्य दिशा | Sunder Vichar Marathi |suvichar

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मराठी सुविचार | योग्य दिशा | Sunder Vichar Marathi | suvichar

मराठी सुविचार | योग्य दिशा
Sunder Vichar Marathi
suvichar

आयुष्यात वेगापेक्षा… 
दिशा महत्त्वाची आहे.
जर दिशा योग्य नसेल तर… 
वेगाच्या काहीच उपयोग नाही.

एक हष्ट-पुष्ट आणि पिळदार शरीराचा व्यक्ती स्टेशन वर उतरला

आणि त्याने टैक्सीवाल्याला विचारले की… मला साई बाबांच्या

मंदिरात जायचा आहे.

टैक्सीवाला म्हणाला ३०० रुपये लागतील.

त्यावर तो व्यक्ती म्हणाला जवळच तर आहे…

इतक्या जवळ जायचे ३०० रुपये…!

नको – नको असू दे… मी आपले सामान घेऊन स्वत:च जाईन.

तो व्यक्ती आपले सामान घेऊन खूप दूर पर्यंत चालत राहिला.

काही वेळाने त्याला पुन्हा तोच टैक्सीवाला दिसला…

त्या व्यक्तीने टैक्सीवाल्याला विचारले की…

आता तर मी अर्ध्या पेक्षा जास्त रस्ता पार केला आहे.

आता आपण किती पैसे घेणार…?

टैक्सीवाला म्हणाला ६०० रुपये.

तो व्यक्ती टैक्सीवाल्याला म्हणाला की… आधी २०० रुपये

आणि आता एवढे अंतर कापल्यावरही ४०० रुपये…!

हे असे कसे…?

तेव्हा टैक्सीवाला म्हणाला… साहेब, एवढे अंतर आपण

साई मंदिराच्या विरुद्ध दिशेने काढले आहे…!

तो व्यक्ती काहीही न बोलता आपल्या सामानासोबत

गुपचुपपणे टैक्सीत बसला.

मराठी सुविचार | योग्य दिशा | Sunder Vichar Marathi | suvichar

मित्रांनो…

आयुष्यात आपण कोणतेही काम करायच्या

आधी काहीही विचार न करता निर्णय घेत असतो…

आणि हाती घेतलेले काम करण्यासाठी खूप परिश्रम ही

करतो… तसेच त्या कामात खूप वेळ ही घालवतो आणि

शेवटी ते काम अर्ध्यावरच सोडून देतो.

नेहमी एक लक्षात ठेवा की… कोणत्याही कामाची सुरुवात करण्यापूर्वी

पूर्णपने विचार करा, आणि हे काम आपल्या जीवनातील लक्षाचा

एक भाग आहे.

जर आपल्या कामाच्या सुरुवातीची दिशा योग्य असेल तरच आपल्याला

यश मिळणार आणि जर का आपल्या कामाच्या सुरवातीची दिशा योग्य

नसेल तर… आपण कितीही परिश्रम घेतले तरी पण फळ मिळणार नाही.

म्हणूनच योग्य दिशा निवडा आणि परिश्रम करा..

नक्की यश तुमच्याच हातात असेल.

कामाची योग्य सुरुवात म्हणजे अर्धे यश मिळालेच समजा…!

जगा इतके की… जीवन कमी पडेल…
हसा इतके की आनंद कमी पडेल… 
काही मिळेल किंवा नाही मिळेल… 
तो नशिबाचा खेळ आहे…! 
परंतु प्रयत्न इतके करा की… 
भगवंताला देणे भागच पडेल.
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मुस्कुराते रहिए | ख़ुश रहिए | Hindi Motivational Story

मुस्कुराते रहिए… ख़ुश रहिए.. अपनी खोई हुई खुशियों को ढुंढीये

एक मनोचिकित्सक के पास उनके पहचान की महिला क्लिनिक मे पहुंची.

चिकित्सक ने परेशानी पुछने पर वह महिला बोली…

डॉ साहब…! मुझे ऐसा लगता है कि मेरे जीवन का कोई अर्थ नहीं है, मेरा पूरा जीवन बेकार है.

मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है की… क्या करु.. और क्या ना करू.
सारा दिन उदास रहती हुं… मानो मेरी खुशियों को कोई चुरा ले गया है,
क्या आप मेरी खुशियाँ ढूँढने में मदद करेंगें…?मनोचिकित्सक उस महिला के परिवार को जानता था, वे लोग काफी पैसे वाले थे और
शाही जिंदगी जीते थे, जो महिला सामने थी, उसने भी काफी महंगे कपड़े पहने थे

और गहने भी पहने थे.

थोड़ी देर चुप रहने के बाद चिकित्सक बोला.… मेरे क्लिनीक में काम करनेवाली एक बूढ़ी महिला को
बुलाता हुं, जो पुरे क्लिनीक की सफाई करती है साथ ही बगीचे को भी संभालती है. वह महिला आपको,
अपने जीवन की खुशियों को कैसे ढुंढ निकाला यह बताएंगी, आप जरा ध्यान से उसकी बात सुनना.

बुढी महिला आते ही साहब ने बैठने को कहा, हाथ का झाडू बाजु में रखा और उस धनवान महिला के
सामने बैठ गई. तभी चिकित्सक ने कहा की, तुम्हारी खुशीयों को तुमने कैसे ढुंढ निकाला, ये इन्हें बताओं.

बुढ़ि महिला बताने लगी :- मेरे पति की पीलिया से मृत्यु हो गई और इस दुःख से बाहर भी नहीं निकलीं थी
की मेरा सहारा, मेरा बेटा..… ठीक २ महिने बाद उसकी सड़क हादसे में मृत्यु हो गई. मेरा सब कुछ ख़त्म
हो चुका था, मैंने खाना- पिना छोड़ दिया था, मैं चाहकर भी कुछ   खा नहीं पाती थी,  सो नहीं पाती थी,
मैंने मुस्कुराना बंद कर दिया था, सिर्फ जिंदा लाश थी.

मैं स्वयं के जीवन को समाप्त करने तरीके सोचने लगी थी. तभी एक दिन, मैं जब अपने घर आ रहीं थीं तो,
एक कुत्ते का छोटा-सा बच्चा मेरे पीछे लग गया. उस दिन घर आने में मुझे थोड़ी देर हुई थी. और बाहर बहुत
ठंड थी.  वो छोटा सा बच्चा ठंड से हलका कांप रहा था, इसलिए मैंने उस बच्चे को घर के अंदर आने दिया.

उसके के लिए थोड़े से दूध का इंतजाम किया और वह सारा दुध सफाचट कर गया. फिर वह मेरे पैरों से
लिपट कर बैठ गया और पैर चाटने लगा.

Good Thoughts – मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy – Images Suvichar

उस दिन… महीनों बाद मैं मुस्कुराई.  तब मैंने सोचा यदि इस कुत्ते के बच्चे की मदद करने से

मुझे ख़ुशी मिल सकती है…! तो हो सकता है कि दूसरों के लिए कुछ करके मुझे और भी ख़ुशी मिले.
इसलिए अगले दिन मैं अपने पड़ोसी, जो कुछ दिनों से बीमार था,
उसके लिए कुछ फल और खिचड़ी बना कर ले गई.
इस तरह हर दिन मैं कुछ नया और कुछ ऐसा काम करती थी, जिससे दूसरों को ख़ुशी मिले

और उन्हें खुश देख कर मुझे भी ख़ुशी मिलती थी.

आज मैंने खुशियाँ ढूँढी हैं… दूसरों को ख़ुशी देकर.
यह सुन कर वह धनवान महिला रोने लगी. उसके पास वह सब था,

जो वह पैसे से खरीद सकती थी…
लेकिन उसने वह चीज खो दी थी जो पैसे से नहीं खरीदी जा सकती.मित्रों…!
हमारा जीवन इस बात पर निर्भर नहीं करता कि हम कितने खुश हैं,
बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि हमारी वजह से कितने लोग खुश हैं.
तो आज से ही  शुभारंभ करें इस संकल्प के साथ कि…
आज हम भी किसी न किसी की खुशी का कारण बनेंगे.

Good Thoughts – मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy – sunder vichar 

  • मुस्कुराइए

अगर आप एक शिक्षक हैं और जब आप मुस्कुराते हुए क्लासरूम में प्रवेश करेंगे तो,
देखिये सारे बच्चों के चेहरों पर मुस्कान छा जाएगी.

  • मुस्कुराइए

अगर आप चिकित्सक हैं और मुस्कराते हुए रोगी का इलाज करेंगे तो रोगी का
आत्मविश्वास दुगना हो जायेगा.

  • मुस्कुराइए

अगर आप एक ग्रहणी है तो, मुस्कुराते हुए घर का हर काम करें,
फिर देखना पूरे परिवार में खुशियों का माहौल बन जायेगा.

  • मुस्कुराइए

अगर आप घर के प्रमुख है तो मुस्कुराते हुए शाम को घर में प्रवेश करेंगें,
तो देखना पूरे परिवार में खुशियों का माहौल बन जायेगा.

  • मुस्कुराइए

अगर आप एक व्यापारी हैं और आप खुश होकर अपने कारखाने में प्रवेश करते हैं,
तो देखना सारे कर्मचारियों के मन का तनाव कम हो जायेगा और माहौल
खुशनुमा हो जायेगा.

  • मुस्कुराइए

अगर आप दुकानदार हैं और मुस्कुराकर अपने ग्राहक का सम्मान करेंगे तो ग्राहक
खुश होकर आपकी दुकान से ही सामान लेगा.

  • मुस्कुराइए

कभी सड़क पर चलते हुए अनजान आदमी को देखकर मुस्कुराएं…!
देखिये उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ जाएगी.

  • मुस्कुराइए

क्योंकी मुस्कराहट के पैसे नहीं लगते, ये तो ख़ुशी और संपन्नता की पहचान है.

  • मुस्कुराइए

क्योंकी आपकी मुस्कराहट कई चेहरों पर मुस्कान लाएगी.

  • मुस्कुराइए

क्योंकी ये जीवन आपको दोबारा नहीं मिलेगा.

  • मुस्कुराइए

क्योंकी गुस्से से दिया गया आशीर्वाद भी बुरा लगता है, और मुस्कुराकर कहे गए बुरे शब्द भी
अच्छे लगते हैं.

  • मुस्कुराइए

क्योंकी दुनिया का हर आदमी खिले फूलों और खिले चेहरों को पसंद करता है.

  • मुस्कुराइए

क्योंकि आपकी हँसी किसी की ख़ुशी का कारण बन सकती है.

  • मुस्कुराइए

क्योंकी परिवार में रिश्ते तभी तक कायम रह पाते हैं, जब तक हम एक दूसरे को देख कर
मुस्कुराते रहते है. और सबसे बड़ी बात

  • मुस्कुराइए

क्योंकि यह मनुष्य होने की पहचान है. एक पशु कभी भी मुस्कुरा नही सकता.
इसलिए स्वयं भी मुस्कुराए और औराें के चहरे पर भी मुस्कुराहट लाएं.
मुस्कुराइए क्योंकी यही जीवन है.

 

मुस्कुराइए | ख़ुश रहिए | Suvichar With Image | Suvichar Photo

इस दुनिया का
सबसे बेहतरीन रिश्ता वही होता है…
जहा एक हल्की सी मुस्कराहट
और छोटी सी माफ़ी से 
जिंदगी पहले जैसी हो जाती है.
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Good Thoughts – मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy

जीवन के हर मोड़ पर सुनहरी यादों को रहने दो.
जुबान पर हर वक़्त मिठास को रहने दो
यही अंदाज है जीने का…!
न खुद उदास रहो….
न दूसरों को उदास रहने दो.

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Good Thoughts – मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy

चलते रहे कदम तो दोस्तों
किनारा जरूर मिलेगा.
अंधकार से लड़ते रहे तो
सवेरा जरूर खिलेगा.
जब ठान ही लिया है
मंजिल पर जाना
तो रास्ता जरूर मिलेगा.
ए राही ना थक… बस चल…
एक दिन तेरा समय जरूर फिरेगा.

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Good Thoughts – मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy – Images Suvichar

शुभकामनाये मिल जाए सब की

बस यही काफी है…!

दवाए तो

कीमत अदा करने पर मिल ही जाती है.

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Good Thoughts – मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy – Images Suvichar

सिर्फ एक इच्छा करने से कुछ नहीं बदलेगा.

एक निर्णय लेने से कुछ बदलता है.

लेकिन एक निश्चय से सब कुछ नहीं बदल जाता है.

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Good Thoughts – मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy – Images Suvichar – vb good thoughts

मुश्किल कार्य

उन आसान कार्यों का ढेर है..

जो हमने समय पर नहीं किए.

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Good Thoughts – मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy – Images Suvichar – suvichar

अच्छाई – बुराई मनुष्य के

कर्मों मे होती है.

कोई बास का तीर बनाकर

किसी को चोट पहुंचाता है….!

तो कोई बाँसुरी बनाकर

उसी बाँस मे सुर भरता है.

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मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy – Images Suvichar – good thoughts – suvichar

निर्धन के ओंठों की

मुस्कुराहट हूँ मैं….!

किसी से भी

मेरी कीमत अदा नहीं हो सकती.

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मुस्कुराइए – ख़ुश रहिए – Be Happy – Images Suvichar – vb-good thoughts – suvichar

Sunder Suvichar Status | Marathi Suvichar | सुविचार मराठी

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Sunder Suvichar Status | Marathi Suvichar | सुविचार मराठी
Sunder Suvichar Status | Marathi Suvichar | सुविचार मराठी

Sunder Suvichar Status |
Marathi Suvichar | सुविचार मराठी

केवळ चपलाच्या जोड्याच

परफेक्ट असतात. तर

बाकी सगळा गैरसमज आहे.

♦♥♦♥♦♥♦♥

कचरापेटीत पडलेली भाकरी

सांगत असते की….

माणूस पोट भरल्यावर

त्याची लायकी विसरून जातो.

♦♥♦♥♦♥♦♥

जेवण करीत असतांना

शेतकऱ्याचे आणि

झोपत असतांना सैनिकाचे

आभार मानायला विसरु नये.

♦♥♦♥♦♥♦♥

कर्म कोणतेही करा….

परंतु एक गोष्ट कधीही

विसरु नका की….

देव नेहमी ऑनलाइन असतो.

♦♥♦♥♦♥♦♥

Sunder Suvichar Status |
Marathi Suvichar | सुविचार मराठी

माणसाने जर सॉरी म्हटले

तर भांडण संपून जातो आणि

जर डॉक्टरनी सॉरी म्हटले

तर माणूस संपून जातो.

♦♥♦♥♦♥♦♥

नाते हे हृदयातून असावे…

रक्ताची नाती सध्या

वृद्धाश्रमात सापडतात.

♦♥♦♥♦♥♦♥

लाकडाच्या ओंडक्यानी भरलेल्या

ट्रकच्या फळीवर लिहिले होते

“झाड़े लावा आणि झाड़े जगवा.”

♦♥♦♥♦♥♦♥

जीवंतपणीच नाती संभाळा….

ताजमहल जगाने पाहिला….

परंतु मुमताजने नाही.

♦♥♦♥♦♥♦♥

चमचा” ज्या भांडयात असतो

त्यालाच तो रिकामा करतो

चमच्या” पासून नेहमी सावध रहा.

♦♥♦♥♦♥♦♥

उपवास” नेहमी अन्नाचाच

का करता……?  कधी कधी

क्रोधाचा आणि वाईट विचारांचा

ही करा.

♦♥♦♥♦♥♦♥

भावना” ही जगातील सर्वात

धोकादायक नदी आहे….

ह्यात सगळे वाहून जातात.

♦♥♦♥♦♥♦♥

Sunder Suvichar Status |
Marathi Suvichar | सुविचार मराठी

Sunder Vichar Status | केवळ चपलाच्या जोड्याच परफेक्ट असतात | मराठी प्रेरणादायक सुविचार

.               नेमका म्हातारा कोण….?

वीस वर्षे वय असलेला व्यक्ती

चाळीस वर्षे वय असलेल्या व्यक्तीला

म्हातारा समजतो……!

चाळीस वर्षे वय असलेला व्यक्ती

साठ वर्षे वय असलेल्या व्यक्तीला

म्हातारा समजतो….!

साठ वर्षे वय असलेला व्यक्ती

ऐंशी वर्षे वय असलेल्या व्यक्तीला

म्हातारा समजतो….!

ऐंशी वर्षे वय असलेला व्यक्ती

शंभर वर्षे वय असलेल्या व्यक्तीला

म्हातारा समजतो….!

मग आपणच सांगा…!

यात नेमका म्हातारा कोण…..?

Sunder Suvichar Status |
Marathi Suvichar | सुविचार मराठी

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भगवंतावर विश्वास | मराठी प्रेरणादायी कहाणी | Marathi kahani

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भगवंतावर विश्वास | मराठी प्रेरणादायी कहाणी | Marathi kahani
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भगवंतावर विश्वास | मराठी प्रेरणादायी कहाणी  Marathi kahani

एक लहान अशा जुन्या घरात एक वैद्यजी राहत होते. घराच्या समोरच्या भागात त्यांचा

दवाखाना होता आणि मागे ते परिवारा सोबत राहत होते.

ते वैद्यजी दररोज दवाखान्यात जायला निघाले की त्यांची पत्नी त्यांना दररोज संसाराला

लागणाऱ्या वस्तूची यादी एका चिठ्ठीत लिहून त्यांच्याकडे देत असे आणि वैद्य जी

आपल्या दवाखान्यात आल्यावर आपली साधी पूजा – अर्चना करून,

भगवंताचे नाव घेऊन, मगच ती पत्नी ने दिलेली चिठ्ठी उघडत असत.

त्यांच्या पत्नीने जी वस्तूंची यादी दिलेली असते त्या समोर, ती वस्तू घ्यायला लागणारी रक्कम

लिहित होते आणि शेवटी हिशोब करून भगवंताला प्रार्थना करीत की…

हे भगवंता मी तुमची भक्ती सोडून तुमच्याच आदेशानुसार या प्रपंचाच्या चक्रात येऊन,

आपली जवाबदारी पूर्ण करीत आहे.

 ते वैद्यजी कधीच आपल्या तोंडाने रोग्याला पैसे मागत नसत. कुणी द्यायचे तर कुणी नाही द्यायचे.

पण एक गोष्ट निश्चित होती की… त्या दिवसाच्या सामानाचा लावलेल्या हिशोबाची रक्कम पूर्ण झाली की…

नंतर आलेल्यांकडून ते काहीच पैसे घेत नव्हते. मग तो येणारा रोगी गरीब असो किंवा श्रीमंत असो.

भगवंतावर विश्वास | मराठी प्रेरणादायी कहाणी | Marathi kahani

असाच एक दिवस वैद्याजी ने दवाखाना उघडला. आपल्या खुर्चीवर बसून भगवंताचे स्मरण करून
पैशाचा हिशोब लावण्यासाठी चिठ्ठी उघडली आणि त्यांना एकदम आश्चर्याचा धक्काच लागला…!

एकटक त्या चिठ्ठीत बघतच राहिले. काही क्षण त्याचे मन भरकटले, डोळ्यासमोर तारे चमकायला लागले.

परंतु दुसऱ्याच क्षणी त्याने आपल्या मनावर नियंत्रण मिळवले. गव्हाचे पीठ, तेल-तूप-मीठ,
तांदूळ-डाळ या सामानानंतर पत्नीने शेवटी लिहिले होते… मुलीचे लग्न येत्या २५ तारखेला आहे,
तिच्या लग्नाला, हुंड्याला लागणारे सामान”

काही वेळ विचार करून बाकी सगळ्या सामानांची किंमत लिहून लग्नाला लागणाऱ्या सामाना समोर

त्यांनी लिहिले, “हे काम भगवंताचे आहे, तो जाणे आणि त्याचे काम जाणे.”

नेहेमी प्रमाणे काही रोगी आले, त्यांना वैद्याने औषधी दिली. या दरम्यान एक मोठीशी
कार त्यांच्या दवाखान्यासमोर येऊन थांबली. वैद्याने काही खास लक्ष दिले नाही, दर दिवशी
कुणी ना कुणी कार ने त्यांच्याकडे येत असत. आधी आलेले सर्व रोगी औषधी घेऊन निघून गेले.
तो सूट-बुटातला साहेब कारमधून बाहेर आला आणि नमस्कार म्हणत बेंचवर बसला.
वैद्यजी म्हणाले…. जर आपल्यालाऔषधी पाहिजे असेल तर आपण इकडे स्टूल वर या म्हणजे मी
आपली नाड़ी परीक्षण करू शकेल आणि कुणीदुसऱ्यासाठी औषधी हवी असेल तर
रोगाचे आणि स्थितीचे वर्णन करा.

ते साहेब म्हणू लागले, वैद्यजी, तुम्ही मला ओळखले नाही का…? माझे नाव हरीलाल आहे. आणि

आपण तरी कसे ओळखणार, कारण मी जवळपास १६ – १७ वर्षाच्या नंतर आपल्याकडे आलो आहे.

आपल्याला मी आपल्या मागच्या मुलाखतीबद्दल सांगतो, म्हणजे सारे काही समजून येईल.

जेव्हा मी पहिल्यांदा आलो होतो ना तेव्हा मी स्वतःहून आलो नव्हतो, खरे तर ती भगवंताची योजनाच
होती.भगवंताला माझ्यावर कृपा करण्याची इच्छा झाली होती, कारण त्याला माझ्या घरात आनंद
पाठवायचे होते. तसेच माझ्याही जीवनात भरभरून सुख आणायचे होते. आणि आपली ती पहिली भेट
आठवली की… आज देखील भगवंताच्या त्या साहजिक कृपेच्या प्रसंग आठवणीने… मी विनम्र होतो…
नतमस्तक होतो… अशब्द होतो…

घडले असे होते कि मी आपल्या बहिणीच्या घरी जात होतो. अगदी आपल्या दवाखान्याच्या समोर माझी

कार पंक्चर झाली. ड्राईवर कारचे चाक काढून पंक्चर लावायला चालला गेला. आपण बघितले कि मी

उन्हामध्ये कार जवळ उभा आहे. आपण माझ्याजवळ आलात आणि दवाखान्याकडे बोट दाखवून आत

यायला विनंती केली, इथे खुर्चीमध्ये सावलीत बस म्हणून म्हणालात. आंधळ्याला काय दोन डोळेच
पाहिजे असतात, मी खुर्चीमध्ये येऊन बसलो. आपण मला यथोचित गूळ – पाणी देऊन तृप्त केले.

का कोण जाणे पण ड्राइवरने देखील काही जास्तच वेळ घेतला होता.

दुपार झाली होती. एक छोटीशी मुलगी आपल्या गादीपाशी उभी होती आणि म्हणत होती,

चला ना बाबा, मला भूक लागली आहे. आपण तिला म्हणत होता, बाळा थोडा धीर धर…

जाऊ यातच आपण.

भगवंतावर विश्वास | मराठी प्रेरणादायी कहाणी | Marathi kahani

मी हा विचार केला कि इतक्या वेळचा आपल्या जवळ बसलो आहे आणि माझ्यामुळे आपण जेवायला

देखील जाऊ शकत नाहीत. म्हणून काहीतरी औषधी विकत घेऊन टाकू, म्हणजे माझ्या बसण्याचा

भार हलका होईल, काही उद्देश प्राप्त होईल.

म्हणून मी आपल्याला बोलता बोलता म्हणालो, वैद्यजी मागच्या ५ – ६ वर्षांपासून मी अमेरिकेत राहतो,

व्यवसाय करतो तिथे. अमेरिकाला जाण्यापूर्वीच माझे लग्न झाले आहे, पण मी संतती-सुखापासून मात्र

अजून वंचित आहे. इथे भारतात देखील बरेच उपचार केले, तिथे अमेरिकेत देखील दाखवले…

पण पदरी शेवटी निराशाच पडली आहे.

आपण म्हणालात, भगवंतापासून निराश होऊ नका, तो अत्यंत दयाळू आहे, तो खूप मोठा दाता आहे.

आपण म्हणालात, लक्षात ठेवा त्याच्या कोषागारात कशाचीही कमी नाही. कसलीही इच्छा तो पूर्ण करतो.

संतती, धन-दौलत, इज्जत, सुख-दुःख, जीवन-मृत्यु, सारे काही त्याच्याच हातात आहे. ते कुणा
वैद्य किंवा डॉक्टरच्या हातात नसते. ते कोणत्या औषधाने मिळत नाही.
जे काही व्हायचे असते ते सारे भगवंताच्या आदेशानेच होत असते. संतती जरी द्यायची असेल तरी दाता
तोच आहे.

आज देखील तो प्रसंग जशाच्या तसाच माझ्या नजरेसमोर आहे. माझ्याशी हे सारे बोलत असताना,
आपण एकीकडे औषधाच्या पुड्या बांधत होतात. सगळ्या औषधी आपण दोन भागात विभाजित करून,
दोन वेगवेगळ्या पाकिटात टाकल्या, आणि मला विचारून एका पाकिटावर माझे नाव टाकले,
आणि दुसऱ्यावर माझ्या पत्नीचे. माझ्या हातात ती औषधी  देऊन…
घेण्याची विधी आपण समजावलीत.

मी ताबडतोब ती औषधी घेतली. कारण त्याच्या मागे फक्त आपल्याला काही पैसे देणे हा उद्देश होता.
परंतु… आपण पैसे घेण्याला नकार दिला. ‘बस, ठीक आहे’ म्हणालात. जेव्हा मी आग्रह केला
तेव्हा आपण म्हणालात की, आजचे खाते बंद झाले आहे. मला काहीच समजले नाही.
परंतु या दरम्यान माझा ड्राईवर आलेला होता.. तो आपल्याला ओळखत होता, त्याने आपली चर्चा
ऐकून मला सांगितले की… आजचे खाते बंद झाले म्हणजे वैद्य महाराजांना आजच्या दिवसाची घरेलू
खर्चासाठी लागणारी राशी, जी त्यांनी भगवंताला मागितली होती, तेवढी भगवंताने त्यांना रोग्यां मार्फत
दिली आहे. त्याशिवाय ते अधिक पैसे कुणा कडूनही घेत नाही.

मला स्वतःवरच राग आला… कारण मी माझ्या मनानेच लज्जित झालो.
माझे विचार किती खालचे होते आणि हा सरळ स्वभावाचा वैद्य किती महान आहे.

मी जेव्हा घरी जाऊन पत्नीला औषध दाखवली आणि सारा प्रसंग तिच्यासमोर उभा केला
तेव्हा तिला भगवतदर्शनाचा आनंद झाला, तिच्या डोळ्यातून पाणी आले, मन भरून आले,
आणि ती म्हणाली ते वैद्यजी म्हणजे कुणी व्यक्ती-माणूस नसून माझ्यासाठी तो देवतारूप माध्यम
बनून आले आहेत. आजवर एवढी औषधी घेतली, एवढे वैद्य, डॉक्टर झाले, आज मला माझ्या मनाची
इच्छा पूर्ण करणारा भगवंत या वैद्याच्या रूपाने, या औषधी स्वरूपाने भेटला आहे.
हे औषध माझ्या संतती सुखाचे कारण आहे, आपण दोघेही श्रद्धेने हे औषध घेऊया.

हरीलाल वैद्याला पुढे सांगू लागला, आज माझ्या घरी दोन फूल उमलले आहेत. आम्ही दोघे पति-पत्नी
प्रत्येक क्षणाला आपल्यासाठी प्रार्थना करत असतो. इतक्या वर्षात व्यवसायामुळे मला वेळच मिळत
नव्हता की स्वतः येऊन आपल्याला धन्यवादाचे दोन शब्द बोलावे म्हणून.
इतक्या वर्षांनी आज भारतात आलो आहे आणि कार केवळ आणि मुद्दाम इथेच थांबवली आहे.
वैद्यजी आमचा पूर्ण परिवार अमेरिके मध्येच राहत आहे. फक्त माझी एक विधवा बहीण आणि तिची
मुलगी इथे भारतात असते.

भगवंतावर विश्वास | मराठी प्रेरणादायी कहाणी | Marathi kahani

आमच्या त्या भाच्चीचे लग्न या महिन्याच्या २६ तारखेला होणार आहे. का कोण जाणे जेव्हा-जेव्हा मी
आपल्या भाच्चीसाठी काही सामान खरेदी केले तेव्हा माझ्या डोळ्यासमोर आपली ती छोटीशी मुलगी
यायची आणि मग प्रत्येक सामान मी डबल खरेदी करायचो. मी आपल्या विचारांना, तत्वाला, मूल्यांना
जाणत होतो, की संभवतः आपण हे सामान न घेवोत, परंतु असे वाटत होते कि माझ्या सख्ख्या भाच्चीच्या
बरोबर मला नेहेमी जो चेहरा दिसत आहे, ती पण माझी भाच्चीच तर आहे. माझे तिच्याशी एक नाते त्या
भगवंताने असे जोडले आहे, आणि म्हणून आपण त्या नात्याला नकार देणार नाही,
कारण माझ्या भाच्चीबरोबर या भाच्चीचा ‘भात भरण्याची’ माझी ज़िम्मेदारी त्याने मला दिली आहे.

वैद्याचे डोळे आश्चर्याने उघडेच्या उघडेच राहिले आणि सौम्य आवाजात म्हणाले, हरीलाल जी आपण जे

काही म्हणत आहात ते मला काहीच समजेनासे झाले आहे, भगवंताची काय माया आहे हे त्याचे तोच जाणे.

आपण माझ्या ‘श्रीमती’ च्या हाताने लिहिलेली हि चिठ्ठीबघा” असे म्हणून वैद्यांनी ती चिठ्ठी हरिलालजी ला

दिली. तिथे उपस्थित सारे ती चिठ्ठी बघून आश्चर्यचकित झाले, कारण “लग्नाचे सामान” याच्यासमोर लिहिले

होते ”हे काम भगवंताचे आहे, त्याचे तोच जाणे”

थरथरत्या आवाजात वैद्यजी म्हणतात, हरिलालजी, विश्वास करा की आज पर्यंत कधीही असे झाले नाही

की पत्नीने चिठ्ठीवर आवश्यकता लिहिली आहे आणि भगवंताने त्याची व्यवस्था केली नाही.

आपण सांगितलेली  संपूर्ण गोष्ट ऐकून असे वाटते कि भगवंताला माहित होते कि कोणत्या दिवशी

माझी श्रीमती काय लिहिणार आहे. अन्यथा आपल्याकडून इतक्या दिवस आधीपासून या सामान
खरेदीची सुरवात भगवंताने कसा करवून घेतला असता…?

“वाह रे भगवंता, तुम्ही महान आहात…. तू दयावान आहात… मी आश्चर्ययात आहे की तुम्ही
कशा कशा रुपात येता…!

भगवंतावर विश्वास | मराठी प्रेरणादायी कहाणी | Marathi kahani

 

चातकाची तहान किती तृप्ति करूनि निववी क्षिती ||||

धेनु वत्सातें वोरसे घरीं दुभतें पुरवी जैसें ||||

पक्कान्न सेवुं नेणती बाळें माता मुखीं घालीं बळें ||||

एका जनार्दनीं बोले एकपण माझें नेलें ||||

वैद्यजी पुढे म्हणतात, “जेव्हापासून मला समजू लागले, केवळ एकच पाठ मी वाचला आहे.

सकाळी उठून तुमची भक्ती करण्यासाठी मी अजून जिवंत आहे म्हणून त्या भगवंताचे आभार

मानायचे… संध्याकाळी आजचा दिवस चांगला गेला म्हणून त्यांचे आभार मानायचे… खाताना…

झोपतांना… श्वास घेतांना…. असा प्रत्येक क्षणाला त्यांचे स्मरण करायचे… आभार मानायचे.

दळिता कांडिता तुज गाईन अनंता ||||

न विसंबे क्षणभरी तुझे नाम गा मुरारी ||||

नित्य हाचि कारभार मुखी हरि निरंतर |||| 

मायबाप बंधुबहिणी तू बा सखा चक्रपाणि |||| 

लक्ष लागले चरणासी म्हणे नामयाची दासी ||||

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प्रेरणादायक हिंदी कहानी | अंहकार की सजा | Hindi Story | Ego

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प्रेरणादायक हिंदी कहानी | अंहकार की सजा | Hindi Story | Ego
प्रेरणादायक हिंदी कहानी | अंहकार की सजा | Hindi Story | Ego

प्रेरणादायक हिंदी कहानी | अंहकार की सजा |
Hindi Story | Ego

एक बहुत बड़ा घना जंगल था. 

सी जंगल में एक आम और एक पीपल का भी पेड़ था.

एक बार एक मधुमक्खीयों का झुंड उसी जंगल में रहने आया, लेकिन…

उन मधुमक्खीयों के  झुंड को रहने के लिए एक घना पेड़ चाहिए था…

 

झुंड की मुखिया रानी मधुमक्खी की नजर एक पीपल के पेड़ पर पड़ी तो…

रानी मधुमक्खी ने पीपल के पेड़ से कहाहे पीपल भैया… क्या मै आपके इस

घने पेड़ की एक शाखा पर अपने परिवार का छत्ता बना लु…?

पीपल का स्वभाव अहंकारी था… उसे कोई परेशान करे यह पीपल को बिल्कुल भी

पसंद नही था. अपने अंहकार के कारण पीपल ने रानी मधुमक्खी से गुस्से में कहा…

हटो यहाँ से… जाकर कहीं और अपना छत्ता बनालो. मुझे परेशान मत करो.

 

पीपल की बात सुन कर पास ही खडे आम के पेड़ ने कहा…

पीपल भैया बना लेने दो छत्ता…

ये तुम्हारी शाखाओं में सुरक्षित रहेंगी…!

प्रेरणादायक हिंदी कहानी | अंहकार की सजा |
Hindi Story | Ego

पीपल ने आम से कहा… तुम अपना काम करो…

तुम्हे इतनी ही चिंता है तो… तुम ही अपनी शाखा पर छत्ता बनाने के लिए

क्यों नही कह देते…!

इस बात से आम के पेड़ ने रानी मधुमक्खी से कहा…  

हे रानी मक्खी… अगर तुम चाहो तो….

तुम मेरी शाखा पर अपना छत्ता बना सकती हो…

इस पर रानी मधुमक्खी ने आम के पेड़ का आभार व्यक्त किया

और अपना छत्ता आम के पेड़ पर बना लिया.

 

कुछ दिनो बाद जंगल में एक दिन कुछ लकडहारे आए. उन लोगों को आम का पेड़

दिखाई दिया और वे आपस में बात करने लगे की… इस आम के पेड़ को काट कर

लकडीया ले लेते है…

सभी लकडहारे अपनी अपनी कुल्हाड़ी लेकर आम के पेड़ को काटने लगे…

तभी एक लकडहारे ने ऊपर की और देखा तो उसने दूसरे से कहा…

अरे… रुको मित्रो… इस पेड़ को मत काटो… इस पेड़ पर तो मधुमक्खी का छत्ता है…

कहीं ये उड गई तो हमारा बचना मुश्किल हो जायेगा.

सभी रुक गए… तभी एक लकडहारे ने कहा… क्यों ना हम लोग इस पीपल के पेड़

को ही काट लेते है… इस पेड़ से हमें और भी ज्यादा लकड़िया मिल जाएगीं.

और हमें कोई खतरा भी नहीं होगा.

प्रेरणादायक हिंदी कहानी | अंहकार की सजा |
Hindi Story | Ego

सभी लकडहारे मिलकर पीपल के पेड़ को काटने लगे… 

पीपल का पेड़ दर्द के कारण जोर – जोर से चिल्लाने लगा… 

बचाओ – बचाओ – बचाओ….

आम को पीपल की चिल्लाने की आवाज आई… तो उसने देखा की…

कुछ लोग मिल कर उसे काट रहे हैं…!

आम के पेड़ ने मधुमक्खी से कहा… हमें पीपल के प्राण बचाने चाहिए

आम के पेड़ ने मधुमक्खी से पीपल के पेड़ के प्राण बचाने की विनंती किया तो…

मधुमक्खी ने उन लोगो पर हमला कर दिया… और वे लोग अपनी जान बचा कर

जंगल से भाग गए…!

 

पीपल के पेड़ ने मधुमक्खीयों को धन्यवाद दिया और अपने व्यवहार के लिए

क्षमा मांगी.

तब मधुमक्खीयों  ने कहा… धन्यवाद हमें नहीं… आम के पेड़ को दो…

जिन्होंने आपकी जान बचाई है…! क्योंकि… हमें तो इन्होंने कहा था की…

अगर कोई बुरा करता है तो इसका मतलब यह नही है की…

हम भी वैसा ही करे.

 

अब पीपल को अपने किये पर पछतावा हो रहा था और उसका अंहकार भी

पूरी तरह से टूट चुका था.

पीपल के पेड़ को उसके अंहकार की सजा भी मिल चुकी थी.

 

शिक्षा :- हमे कभी भी अंहकार नही करना चाहिए…

जितना हो सके… दूसरों के काम ही आना चाहिए…

जिससे समय पड़ने पर तुम भी किसी से मदद मांग सको.

जब हम किसी की मदद करेंगे तब ही कोई हमारी भी मदद करेगा.

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Good Thought | तुमचे भविष्य दोनच गोष्टी ठरवतात | Marathi Suvichar

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Good Thought | तुमचे भविष्य दोनच गोष्टी ठरवतात | Marathi Suvichar

Good Thought |
तुमचे भविष्य दोनच गोष्टी ठरवतात |
Marathi Suvichar

तुमचे भविष्य दोनच गोष्टी ठरवतात…

एक तर तुम्ही कशा पद्धतीच्या पुस्तका वाचता आणि दुसरे म्हणजे तुमचे मित्र कोण आहेत,

जर का तुम्ही चांगल्या पुस्तकांचे वाचन करता तर… नक्कीच तुमच्या अवती – भोवती चांगलीच

माणसे असतील. आणि चांगली मित्र – मंडळी असली कि जीवन चांगल्या उंचीवर जातो.

फक्त हे करून बघा…

काही दिवसातच तुम्हाला स्वतःमध्ये

बदल दिसेल आणि तुम्ही आनंदी व्हाल.

1 ) जगण्याची दिशा शोधा.

स्वत:लाच विचारा…! आपण जगतोय तरी कशासाठी…? आपले ध्येय तरी काय आहे…?
जग आणि जीवन खूप सुंदर आहे, जगाला हि दोष देवू नका आणि जगण्यालाही नाकारू नका.
ते म्हणतात ना… न करून पश्चाताप करण्यापेक्षा करून पश्चाताप करणे केव्हाही चांगले,
जगण्याची दिशा ठरवा.

2 दिवसाची सुरुवात आनंदाने करा.

आपल्या दिवसाची सुरुवात आनंदाने होईल असा प्रयत्न करा, आता आपण उठलो कि फोन असे होते,
त्या फोन मध्ये आपण काहीतरी नकारात्मक बघतो आणि आपला मूड ऑफ होतो,
आणि गंमत म्हणजे त्या विचारासी किवा त्या घटनेसी आपला काहीही संबंध नसतो,
आपल्याला राग येतो, आपला पूर्ण दिवस खराब होतो,
म्हणून उठल्यावर स्वत:ला सकारात्मक उर्जेचा डोस द्या.

3 ) जे काम करता ते अति उत्तम करा.

जे काही करा ते अतिउत्तमच करा, मन लाऊन करा आणि थोडा जास्तच करा,
कुणी आपल्याकडून काही अपेक्षा ठेवतात…

आपण अपेक्षे पेक्षा जास्तच करायचे, जेमतेम तसेच सांगितलेले काम तर कुणीपण करते,
नेहमी काहीतरी खास करण्याची तैयारी ठेवा.

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तुमचे भविष्य दोनच गोष्टी ठरवतात |
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4) चांगल्या मित्रांची निवड करा.

चांगले मित्र निवडा, मित्र चांगले असतील तर सल्ला हि चांगलाच देतील,
दुर्योधन शकुनीचा सल्ला घेत होता, आणि अर्जुन श्रीकृष्णाचा, स्वतावर नेहमी विश्वास ठेवा,
नेहमी मित्रांसोबत चांगले वागा, स्वतःवर प्रेम करा,
तुम्हाला बघुन दुसरेही आनंदी होतात.

मनसोक्त जगायचे आणि आपल्याला जे पटते ते करायचे….

आपल्या जन्मदिवशच्या दिवशीच मृत्यूचाही दिवस ठरलेला असतो,

आता आपण ठरवायचे कि जन्म पासून तर मृत्यू पर्यंतच्या मधील काळ कसा जगायचा,

इतरावर टीका करत जगायचे कि जीवनाचा भरपूर आनंद घेऊन जगायचा,

आपण सगळ्यांच्या अपेक्षा पूर्ण करू शकत नाही तसेच सगळ्यांच्या अपेक्षेवर खरे हि
उतरू शकत नाही,

आठ दहा दिवसा अगोदर एक सात आठ वर्षाची मुलगी माझ्याजवळ येवून मला म्हणाली…

काका एक विचारू का…?

मी विचार बाळा म्हटल्यावर ती म्हणाली काका ATM चा फुलफॉर्म सांगता का…?

बाळा हे तर खूप सोप्पे आहे, A    All  T- Time  M –  Money

 माझे उत्तर तिच्या अपेक्षेप्रमाणे नव्हते, ती हसली आणि म्हणाली काका तुम्ही चुकलात,

बर बाळा तू तुझे उत्तर सांग….

काका उत्तर आहे…. A – असेल T – तरच M – मिळेल

उत्तर एकुण मी तिच्या अपेक्षे प्रमाणे हरण्याचा भाव आपल्या चेहऱ्यावर आणला,
ती जिंकण्यासाठी आनंदी होऊन पुन्हा दुसऱ्याला विचारायला निघून गेली.

मुलगी निघून गेल्यावर मी मात्र विचारात पडलो, मुली ने दिलेले उत्तर किती खरे आहे,
तो उत्तर बँक  आणि पैशाला तर लागू पडतोच पण माणसाच्या बाबतीतही तितकाच खरा आहे,

बँकेच्या बाबतीत तुमच्या खात्यात पैसे असतील तर मिळतील तसेच माणसाच्या बाबतीत
निसर्ग नियमाप्रमाणे आपण निसर्गाजवळ काही जमा केले तर त्या मोबदल्यात
निसर्ग आपल्याला त्यापेक्षाही मौल्यवान आपल्याला देतो.

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तुमचे भविष्य दोनच गोष्टी ठरवतात |
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चला बघू या…

जर का निसर्गा जवळ व्यायाम जमा केला तर आरोग्य परत मिळते.

विश्वास जमा केला तर निष्ठा परत मिळते.

प्रेम जमा केले तर समर्पण परत मिळते.

कर्म जमा केले तर साफल्य परत मिळते.

असेच  माणसाने स्वतःच्या किंवा इतर माणसांच्या बाबतीत

जे पण जमा केलेली असतील त्याप्रमाणे त्याला निसर्गनियमानुसार

कितीतरी अधिक प्रमाणात…!

(A) अपेक्षित (T) ते (M) मिळेल

अर्थात… माणसांच्या बँकेतही आपली जमा मात्र सतत करावी लागते.

ही स्थिती माणसांची तर भगवंताच्या बाबतीत….?

भगवंताच्या बँकेचे नियम काय असतील…?

हे समजण्या इतकी बुद्धी माझ्यात नाही. पण…

संतांच्या शिकवणुकीमधून
एक गोष्ट मात्र लक्षात आली आहे की,

भंगवंताच्या बँकेत आपण अगदी थोडी थोडी
भक्ती समर्पण भावाने जमा करत राहिलो तर…
आपण न मागताही… भगवंताकडून…
(A) आवश्यक (T) ते (M) मिळेलच

पण भगवंताच्या बँकेची बम्पर ऑफर आहे….

आपला अहंकार…!

हा आपला अहंकार आयुष्यात

फक्त एकदाच आणि कायमचा जमा केला की
त्या दयासागर भगवंता कडून आपल्याला

ध्यानी मनी नसताना एका सुवर्णक्षणी…

(A) अलौकिक (T) तेही (M) मिळेल…!

धन्यवाद

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