चंदन का बगीचा | प्रेरणादायक कहानी | Motivational Story Hindi
घने जंगल में एक भटके हुए राजा को बहुत समय से प्यास लगी थी, लेकिन…
दूर दूर तक ना पानी दिख रहा था और ना ही कोई इंसान. तभी राजा की नजर
एक लकड़ी काटते लड़के पर गई… राजा दौड़ता हुवा गया और पानी की मांग की.
उस लकडहारे ने राजा को अपने पास का पानी पिलाया तो राजा काफी प्रसन्न हुवा
और उसके जान में जान आई.
थोड़ी देर वही विश्राम करने के बाद, जाते हुए राजाने लकडहारे से कहा की…
कभी भी राजदरबार में आना… मै तुम्हे पुरस्कार दूंगा.
लकडहारा बोला ठीक है महाराज…
कुछ समय बाद वह लकडहारा घुमते – फिरते राजदरबार में पहुँचने के बाद
राजा को उस घटना की याद दिलाई, क्योकि काफी समय बीत गया था.
राजा से बोला, महाराज मै वही लकडहारा हूँ जिसने आपको उस दिन घने जंगल में
पानी पिलाया था…
राजा ने प्रसन्नतापूर्वक उससे बात की और सोचने लगा की इस निर्धन को
क्या दिया जाये…? जिससे ये आजीवन सुखी रहे… थोड़ी देर सोचने के बाद
राजा ने उसे अपना एक चंदन का बाग़ दे दिया.. .
लकडहारे के खुशी का ठिकाना ना रहा… वो मन ही मन सोचने लगा…
इस बाग के पेड़ों के कोयले तो बहुत सारे होंगे, मेरा पूरा जीवन आराम से
कट जायेगा.
अब हर दिन लकड़हारा बगीचे के चन्दन काट – काटकर कोयले बनाने लगा
और उन्हें बेचकर अपना पेट पालने लगा. कुछ समय में ही चंदन का
सुंदर बगीचा उजाड़ दिया गया.
अब बगीचे में जगह- जगह पर कोयले के ढेर लगे थे…!
अब उस बगीचे में थोड़े ही पेड़ बचे थे जो उस लकडहारे को
छाया देते थे…!
उधर एक दिन राजा के मन में विचार आया की चलो… आज जरा उस
लकड़हारे का हाल चाल देख आएँ. इसी बहाने चंदन का बगीचा भी
घूम के हो जाएगा.
यह सोचकर राजा चंदन के बगीचे की तरफ़ निकल गए… राजा को दूर से ही
बगीचे से धुआँ उठते दिखा… नजदीक आने पर राजाको समझ आ गया की…
चंदन जल रहा है और लकड़हारा पास ही खड़ा है.
आपकी ज़िद्दी खाँसी क्या ब्रोंकाइटिस का लक्षण है | Bronchitis
Bronchitis | आपकी ज़िद्दी खाँसी क्या ब्रोंकाइटिस का लक्षण है
नमस्कार मित्रों, लगभग पांच साल से मुझे सर्दी, हल्का सरदर्द, और कफ की शिकायत
हो रही थी, ये लक्षण मुझे जब भी होते थे… तो मै डॉक्टर के पास जाकर दवाई लेता था.
वो मुझे एक हप्ते की दवाई देते और आगे के चार आठ दिन अच्छे से निकल जाते थे.
ऐसा ही कुछ सालो से चलता आ रहा था. इस बिच में मैंने दो बार छाती का एक्सरे भी
कराया. डॉक्टर ने एक्सरे देखकर बोले… सिर्फ छाती में थोड़ा सा कफ जमा हुवा है…!
बिच में एक दिन पूंछा की ये बार बार क्यों हो जाता है… सर ने मुझे धुल की एलर्जी
बताई… मै धुल से बचने की कोशिश करता रहा… लेकिन समस्या जस की तस थी.
लेकिन दो महीने पाहिले मैंने सर से कहा की कुछ उपाय बताये…
ये बार बार हो जाता है… तब सर ने चेस्ट स्पेसिलिस्ट डॉक्टर पुनीत झवर सर से
मिलने को कहा…
Bronchitis | आपकी ज़िद्दी खाँसी क्या ब्रोंकाइटिस का लक्षण है
पुनीत जी ने मेरा चेस्ट एक्सरे निकलवाया और कुछ टेस्ट की जिसमे
ये सामने आया की मुझे ब्रोंकाइटिस के सुरुवाती लक्षण है…
मुझे इसके बारे में जानने की बहुत उत्सुकता हुई… तो मै सर से पूछने लगा…
सर ने जो बताया वो ही मै अपने शब्दों में आपके साथ शेयर कर रहा हु…
जिससे आपको या आपके किसी पहचान वाले को ये लक्षण हो तो
सतर्क हो कर इलाज कराले… तुरंत किसी स्पेसिलिस्ट से सलाह ले,
मेरे जैसी लापरवाही न बरते…
जिस मार्ग से हमारे फेफड़ों में श्वास आती – जाती हैं… उस अंग को श्वासनलि
कहते है. अगर हमारे श्वासनलि में जलन और सूजन हो जाए तो आपको
ब्रोंकाइटिस (Bronchitis ) हो सकता हैं.
यह एक प्रकार का उसकाव है जिसकी वजह से श्वासनलि ज़्यादा कफ बनाती है.
डॉ. पुनीत झवर ( Respiratory Medicine, Consultant Chest Physician
& interventional pulmonologist ) बताते है की… ब्रोंकाइटिस के रोगी ज़्यादातर
ज़िद्दी खाँसी और कई बार उसमें निकलने वाले कफ की शिकायत करते हैं.
डॉ. पुनीत सर ने मुझे विस्तार से बताने को कहा… मैंने अपनी स्थिति के बारे में विस्तार
से बताया और कितने दिनों से मुझे कफ हो रहा है… डॉ. पुनीत ने स्टेथस्कोप लगाकर
मेरी जाँच की. जब सर ने मेरे फेफड़ों की ध्वनि को सुना तो उन्हें ब्रोंकाइटिस का
अंदेशा हुआ.
आपकी ज़िद्दी खाँसी क्या ब्रोंकाइटिस का लक्षण है | Bronchitis
सर ने मुझे ब्रोंकाइटिस की संभावना के बारे में बताया और मै ब्रोंकाइटिस के
लक्षणों के बारे में जानने के लिए बहुत ही उत्सुक हो गया.
ब्रोंकाइटिस के लक्षण है… खाँसी, कफ का बनना, सर दर्द, नाक बहना
कुछ लोगों को सांस लेने में कठिनाई भी होती है.
सर ने बताया ब्रोंकाइटिस दो प्रकार के होते है…! एक अक्यूट ब्रोंकाइटिस
और दूसरा क्रानिक ब्रोंकाइटिस. इन के लक्षणों में बहुत ज्यादा अंतर नहीं होता.
लेकिन अंतर इनके कालावधि और परिस्तिथि में होता है.
पुनीत सर बताते है की… अक्यूट ब्रोंकाइटिस में सर्दी- जुखाम जैसे लक्षण महसूस
होते हैं. जैसे.. जुकाम होना… लगातार नाक बहाना… कफ के साथ खाँसी आना
और हल्का – हल्का सर का दुखना… यह आमतौर पर एकाध हफ्ते में ठीक होने
लगता है.
क्रानिक ब्रोंकाइटिस एक गंभीर रोग है जिसमें श्वासनलि मे हमेशा जलन या
सूजन रहती हैं और अक्सर यह धूम्रपान से ही होता हैं.
क्रानिक ब्रोंकाइटिस में समय के साथ खाँसी और संबंधित लक्षण दिन ब दिन बुरे होते
जाते है. कई बार तो… इसमें खाँसी तीन से चार महीनें या उससे भी अधिक तक रह
सकती है.
ब्रोंकाइटिस में सांस लेने में कठिनाई हो सकती है जिसकी वजह से बहुत लोग
ब्रोंकाइटिस और दमा के रोग को सामान्य समझते है.
सर ने जब ये बताया तो मुझे और उत्सुकता बढ़ी इन दोनों में क्या अंतर है
ये जानने की…
दमा और ब्रोंकाइटिस में क्या अंतर होता हैं…?
सर ने मुझे आराम से बताया की… सबसे महत्वपूर्ण बात… ब्रोंकाइटिस में श्वास नलियाँ
आपकी ज़िद्दी खाँसी क्या ब्रोंकाइटिस का लक्षण है | Bronchitis
( Bronchial Tubes ) में सूजन और जलन होती है पर दमा में वायुमार्ग
सिकुड़ और सूज जाते है. बहुत बार बदलते मौसम के वजह से भी ब्रोंकाइटिस
हो सकता है…!
लेकिन दमा… मौसम की वजह से नहीं होता. मौसमी परिवर्तन की वजह से
दमा बदतर हो सकता हैं पर वह इसके पीछे का कारण नहीं हैं.
ब्रोंकाइटिस में खाँसी होना एक प्रमुख लक्षण है पर दमा में खाँसी होना
ज़रूरी नहीं हैं.
मैंने सर से पुछां की ये दोनों तरह के ब्रोंकाइटिस होने के क्या कारण है…?
तो सर ने बताया… अक्यूट ब्रोंकाइटिस के पीछे अधिकतर वाइरस का
हाथ होता है. यह वायरस ज़्यादातर फ़्लू और जुखाम के लिए भी ज़िम्मेदार
होता है. क्रानिक ब्रोंकाइटिस का सबसे आम कारण धुम्रपान करना है.
सर ने ये भी बताया की वायु प्रदूषण, धूल-मिट्टी और जहरीली गैस भी
क्रानिक ब्रोंकाइटिस के कारण हो सकते हैं.
आपकी ज़िद्दी खाँसी क्या ब्रोंकाइटिस का लक्षण है | Bronchitis
ब्रोंकाइटिस [Bronchitis ] का उपचार
पुनीत सर ने कहा… अक्यूट ब्रोंकाइटिस में उपचार की ज़रूरत नहीं पड़ती
और यह अधिकतर कुछ हफ्तों में खुद ठीक हो जाता है.
आम तौर पर ब्रोंकाइटिस का कारण वायरस होता है…!
इसलिए एंटीबायोटिक दवाओं का इन पर कोई असर नहीं पड़ता.
लेकिन अगर आपके डॉक्टर को ब्रोंकाइटिस का कारण बैक्टीरिया
लगता है तो… वह आपको एंटीबायोटिक दवा देने का विचार कर सकते है.
कुछ परिस्थितियों में आपके डॉक्टर आपको खाँसी की दवाई भी दे सकते है…
अगर आप खाँसी की वजह से आराम नहीं कर पा रहे हो तो आपके डॉक्टर
आपको खाँसी की दीवाई नियमित कर सकते हैं.
दूसरी दवाई… यदि आपको एलर्जी, दमा या क्रानिक अब्स्ट्रक्टिव फेफड़ों का रोग
(COPD) है. तो आपके डॉक्टर शायद श्वासयंत्र (inhaler)
और अन्य दवाई दे सकते हैं.
आपकी ज़िद्दी खाँसी क्या ब्रोंकाइटिस का लक्षण है | Bronchitis
इससे जलन और सूजन में आराम मिल सकता है और ट्यूब खुल सकते हैं.
डॉ. पुनीत सर ने मेरे ब्रोंकाइटिस की स्तिथि को समझाते हुए मुझे कफ के लिए कुछ
दवाई दी और इन्हेलर लेने की सलाह दी.
पुनीत सर के उपचार से मुझे डेढ़ महीने में काफी आराम मिला. जब मै सर से
तीसरी बार मिला तो उनसे बात की और बताया की मुझे आपकी दवाई से
पचास प्रतिसत आराम है…! आप मुझे कृपया बताये की आपकी दवाई के
साथ साथ मै अपना ध्यान घर पर स्वयं कैसे कर सकता हूँ.
ब्रोंकाइटिस के घरेलु इलाज के लिए कुछ चीज़ों का ध्यान रखें.
धूम्रपान बिलकुल्ल भी न करे. यदि आपके आजू बाजु धुम्रपान हो रहा है
तो आप दूर हो जाये. धूम्रपान का धुँआ आपके लिए बहुत हानिकारक है.
घर से बाहर जाने से पहले मास्क पहने या अपना मुँह और नाक को कपड़े से
ढक ले. ख़ास तौर पर जब आप प्रदूषण, पेंट या सफ़ाई करनेवाले उत्पादन के
संपर्क में आए.
आपकी ज़िद्दी खाँसी क्या ब्रोंकाइटिस का लक्षण है | Bronchitis
सर ने ये भी बताया की ब्रोंकाइटिस की देखभाल करना ज़्यादा मुश्किल नहीं है…!
बस… आपको थोड़ासा ध्यान और देखभाल करने की आवश्यकता होती है.
आप सुरक्षात्मक उपायों जैसे मास्क को अपनाए और समय – समय पर अपनी
नियमित जाँच करवाएं.
अगर आपको अपना ब्रोंकाइटिस बदतर होतें हुई दिखें तो….
अपने डॉक्टर से सलाह लेने में बिलकुल्ल भी हिचकिचाए नहीं…!
Health Tips, जीवन में उपयोगी टिप्स, हेल्थ टिप्स, काम की बाते
Health Tips, जीवन में उपयोगी टिप्स, हेल्थ टिप्स, काम की बाते
1] अगर आप बहुत तनाव में है तो… अंगूर का जूस ले.
आपका मानसिक तनाव कुछ ही क्षणों में दुर हो जायेगा
और आप काफी अच्छा महसूस करेंगे.
2] अगर आप ज्यादा पैदल चले या दिनभर खड़े रहने पर थकान
और पैर दुखने पर आप एक ठंडे पानी की बोतल को अपने दोनों
पैरों के नीचे रख कर पैरो को आगे – पीछे करते रहे. जल्द ही
आपके पैरों की थकान दूर हो जाएगी.
3] अगर आप अनिंद्रा से परेशान या रात में नींद नहीं आ रही तो…
आप अपनी पलको को कुछ देर लगभग एक मिनट तक जोर – जोर
से झपकाएँ कुछ ही देर में नींद जरूर आएगी.
Health Tips, जीवन में उपयोगी टिप्स, हेल्थ टिप्स, काम की बाते
4] गर्म पानी से नहाने के बाद आप थोड़ा सा ठंडा पानी शरीर पर डालिए .
कुछ दिनों में आपको महसुस होगा की… आप के शरीर से कई तरह की
बीमारियों से दूर जा रही है.
5] एक रिसर्च में पाया गया है की बातों और शब्दों को हमारा दाहिना
कान बेहतर सुन सकता है. और संगीत को हमारे बाये कान से बेहतर
तरीके से सुन सकते है.
6] बच्चों की नज़र तेज करने के लिए उनके बेड की दिशा बदलते रहें.
इससे उसका एंगल बदल जाएगा. और नजर में सुधार होगा. इसे
आप भी कर सकते हैं.
7] अगर आपको चक्कर आ रहे हैं… या आँखों के सामने अँधेरा आ रहा हो तो
बिस्तर पर लेट कर, एक पैर जमीन पर रखिए. चक्कर आने बंद हो जाएंगे.
आप बेहतर महसूस करेंगे.
8] अगर आप माइग्रेन के दर्द से परेशान है. तो बर्फ़ के ठंडे पानी में अपने
हाथों को डालिए… आपका दर्द काफ़ी हद तक कम हो जायेगा. और आप
आराम महसूस करेंगे.
9] अगर आपको मच्छर ने काट लिया और उस जगह पर ख़ुजली हो रही है तो…
उस जगह पर डियो लगा लीजिए. आपकी ख़ुजली तुरंत बंद हो जाएगी.
Health Tips, जीवन में उपयोगी टिप्स, हेल्थ टिप्स, काम की बाते
10] अगर आपको काम के वक्त नींद आ रही है…..! आप ऑफिस में हो, क्लास में…
बस में… या कही भी आपको नींद आने लगे तो अपनी सांस को तब तक रोक के
रखिए, जब तक आप आराम से रोक सकते हैं. फिर सांस को धीरे से छोड़ दे.
इस से आपकी नींद एकदम से गायब हो जाएगी.
11] अगर आप की हंसी नहीं रुक रही है.. तो ख़ुद को ज़ोर से चूंटी काट लीजिए.
हंसना बंद हो जाएगा.
12] अगर आपको कोई टेंशन हो या टेंशन से सिरदर्द हो रहा हो तो जमीन पर लेट
कर पैरों को ऊपर करके दीवार पर लगा ले. इससे काफी फायदा होगा.
Sunder Vichar Marathi | दृष्टांत आणि सिद्धांत | Good Thoughts Marathi
Sunder Vichar Marathi | दृष्टांत आणि सिद्धांत Good Thoughts Marathi
एका गृहस्थाकडे एक छान सुंदर गोल – गोल एक दगड होता. त्या दगडाचा
उपयोग ते आपल्या घरात अनेक प्रकारे करीत असत. जसे दार समोर येत आहे
तर दारासमोर लावायचा. लहान मूलांना खेळण्याच्या कामातही यायचा.
दारावर कुत्रा आला तर त्याला फेकून मारायचा. अशा अनेक कामात
तो दगड यायचा. म्हणून ते गृहस्थ नेहमी त्याला
आपल्या नजरेसमोरच ठेवायचे.
ते गृहस्थ वेळेवर जशी गरज यायची तसा त्याचा उपयोग करीत असत.
आणि हा दगड अशा नेहमी उपयोगी पडत असल्याने तो घासून
चमकायला लागला होता.
गृहस्थांच्या घरी एक दिवस काही पाहुणे आले. त्या पाहुण्यामधून एका व्यक्तीचे
सहजच लक्ष त्या दगडावर गेले. त्याने तो गोल चमकदार दगड पहिले आणि
त्याचे डोळे चकाकले…
त्याने तो दगड हातात घेऊन निरीक्षण केल्यास त्याला जाणवले की हा खूप महाग
रत्न आहे. हा पाहुणा रत्नपारखी होता आणि याला रत्नाचीही थोडी फार माहिती होती.
तो पाहुणा सरळ त्या गृहस्थाला म्हणाला…. काय हो… हा इतका मौलिक रत्न तुम्ही
घराच्या दाराला अडसर म्हणून उभा केलात…?
गृहस्थाला काही समजेनासे झाले… ते उलट त्या पाहुण्याला प्रश्न करायला लागले…
ते रत्नपारखी म्हणाले… अहो माझा विश्वास करा हा साधा सुधा दगड नसून
अलौकिक रत्न आहे . आज याची किंमत जवळपास १५ कोटी च्या घरात तरी
नक्कीच असेल…!
झाले… त्या दगडाचे आयुष्यच बदलले. पटकन त्या गृहस्थाने तो दगड
पाहुण्यांच्या हातून ओढला आणि सरळ तिजोरीत नेऊन ठेवला.
आता कालपर्यंत लहान लहान निकृष्ट कामासाठी वापरत येणारा हा दगड
आत्ता अलौकिक रत्न बनून तिजोरीत राहू लागला…!
मानव देह हा सुद्धा त्याच दगडा सारखा आहे. तुम्ही आम्ही त्याला उगीच
खितपत ठेवला आहे . नको त्या कामाला लावला आहे.
मग एक दिवस सद्गुरुंसारखा रत्नपारखी भेटला आणी मग त्याने या
मानव देहाची किंमत दाखवली आणी नंतरच त्याला तिजोरी प्राप्त झाली.
म्हणून म्हणतो… परमार्थाला आपण तो पर्यंत लागत नाही… जो पर्यंत या
जन्माची किंमत कळत नाही… आणि तो पर्यंत ती कळत नाही तो पर्यंत
परमार्थाचा अधिकारी नाही होऊ शकत.
Sunder Vichar | दारु पिऊन मृत्यू झालेल्या नवऱ्याला बायकोने लिहीलेले पत्र
प्रिय नवरोबा….
तुझा काल अकालीच मृत्यू झाला. जीवनात स्थिरस्थावर होऊन आनंद
उपभोगण्याचे… आपल्या मुलांबरोबर फिरण्याचे…
त्यांच्यासोबत खेळण्याचे… बायको सोबत गप्पागोष्टी… थट्टामस्करी…
करण्याचे तुझे वय…!
परंतु नवरोबा… तू या सुखाला कायमचाच मुकलास रे… तसेच तुझ्या
या अचानक मृत्युमुळे या आनंदाला तुझी मुले देखील पोरकी झाली.
आणि सोबत तुझी बायकोही या सुखाला मुकली रे…
कारण तर काय होते या सगळ्यांचे…? तू या खोट्या आनंदात रममाण
झाला होतास. त्यामुळे खऱ्या आनंदाला तू मुकतोस याचे तुला भानच
राहिले नव्हते.
आमचे लग्न झाल्यापासून मी पाहत आहे… तू कायम मित्रांच्या सोबत
दारूच्या पार्ट्या करत रहायचास…
Sunder Vichar | दारु पिऊन मृत्यू झालेल्या नवऱ्याला बायकोने लिहीलेले पत्र
जीवनात मित्र तर असावेतच, पण आपले कुटुंब सुद्धा आहे…
त्याबद्दल आपली काही जबाबदारी सुद्धा आहे. याचा तुला
विसरच पडला होता.
या शिवाय दररोज रात्रीला घरीच बाटली घेऊन बसणे होतेच.
याचा आपल्या मुलांवर काय परिणाम होईल… याची तुला
काहीही चिंता नव्हतीच.
रोज रात्रीला आठ वाजे नंतर बाबा आपले नाही….
याची जणू मुलांना सवयच लागली होती…!
सोबत तुझी भीतीही वाटत होती.
बायकोवर हात उचलणे… माझ्याशी भांडणे हे तर मुलांसाठी
दररोजचेच झाले होते.
आपली मुले कोणत्या वर्गात शिकत आहेत…
त्यांना काय पाहिजे… काय नाही…
याची तर तुला कधीच चिंता नव्हती…
तुझे मित्र आणि तू… बस्स्….
दारू ही एक औषधी आहे. हृदयविकारापासून दूर ठेवते
वगैरे पेपर मधली माहिती तू मला दाखावायाचास…
परंतु त्याच दारूमुळे वाढलेला आपल्यातलाच दुरावा
तुला कधीच समजलाही नाही आणि कधी तू हे
समजून घेण्याचा प्रयत्न हि केला नाही…!
जर का ही बाटलीच एवढीच आनंद देणारी औषधी आहे…
तर मग हि दारू मी आणि मुलांनी घेतली तर तुला चालली
असती का…?
Sunder Vichar | दारु पिऊन मृत्यू झालेल्या नवऱ्याला बायकोने लिहीलेले पत्र
अधूनमधून तुला प्रेमाचे झटके यायचे आणि तू दारू सोडायचे
ठरवायाचास… परंतु पुन्हा मित्रच आडवे यायचे. कुठल्या तरी
आनंदात किंवा कोणाच्या तरी दु:खात तू परत त्यांच्या बरोबर
बसायचास… एकदा बसलास… की मग पुन्हा सर्व सुरु.
मित्राला परत परत दु:खात लोटणारे असले कसले रे हे मित्र…?
जीवनात आनंद मिळवण्याचे अनेक चांगले मार्ग आहेत. परंतु
तुम्ही सर्वांनी मात्र वाईट मार्गच निवडला. दारू पिणे सोडून
बघितले असतेस तर यातले अर्ध्याहून अधिक मित्र गायब
झाले असते.
अति दारू सेवनाने तुला आजारपण आले…यात घराची आर्थिक
परिस्थिती अजूनच बिगडली… लिवरची सूज कमी करण्याची
औषधी घेणे… तुझ्या पोटात झालेले पाणी काढणे… हे सगळे चालू
झाले.
मी सुद्धा आपल्या कामावरून सुट्टी घेत असे… घरच्या गरजा
पूर्ण होत नव्हत्या… मुलांची फी सुद्धा वेळेवर भरली जात
नव्हती.
तुझ्या शेवटच्या आजाराने तर डोक्यावर कर्ज करून ठेवले.
तू सुधरणार नाही… हे माहित असून सुद्धा तुझ्या औषधोपचाराचा
खर्च मी थांबवला नाही.
दारूबंदी सरकारलाही नको आहे. कारण त्यांचे लक्ष फक्त
मिळणाऱ्या महसूलाकडेच आहे. पण माणसाची काम करण्याची
शक्ती कमी होणे… आजारपण वाढणे… यामुळे होणारे नुकसान
सरकारला दिसत नाही का…? शिवाय नवरा, मुलगा, वडील गमावणे
याची किंमत पैश्यात कशी मोजणार आहे हे सरकार…?
दारु पिऊन मृत्यू झालेल्या नवऱ्याला बायकोने लिहीलेले पत्र
आता तुझ्या आई वडिलांची सेवा… मुलांचे शिक्षण आणि संस्कार हे
सर्व माझी एकटीची जबाबदारी झाली आहे. ती मी पार पाडीनच…
पण महत्वाचे म्हणजे माझ्या मुलांना या एकच प्याला पासून दूर ठेवणे
माझ्या दृष्टीने फार महत्वाचे आहे.
पुढच्या जन्मात मला तूच नवरा म्हणून हवा आहेस, परंतु तुझ्या हातात
दारूचा ग्लास नसेल तरच…
तुझीच प्रिय बायको
अ ब क
विचार करण्यासारखी गोष्ट…
खरच दारू वाईटच असते मग ती कितीही महाग असु द्या…
आनंद साजरा करा पण आपलेच जीवन नष्ट करून नाही.
आपले तर जीवन नष्ट होतेच… परंतु सोबत आपल्या कुटुंबाचे
जीवन आपण नष्ट करतो.
प्रतिक्रिया नक्की कळवा आणि या सारख्या
गोष्टींवर खरच विचार करा.
भिंडी के चमत्कारी फायदे | जो आपको हैरान कर दे | Ladys Finger
भिंडी के चमत्कारी फायदे | जो आपको हैरान कर दे Ladys Finger | Okra
आप सबकी परिचित सब्जी भिंडी. हरी सब्जी में भिंडी का
अलग ही स्थान है. ये महिलाओ की उंगली की तरह पतली होती है.
शायद इसीलिये भिंडी को इग्लिश में लेडीफिंगर के नाम से जाना
जाता है.
भिंडी हमारे स्वास्थ के लिए काफी फायदेमंद होती है. क्योंकि इसमें
पाये जानें वाले तत्व कई तरह की बीमारियों से छुटकारा दिलानें का
काम करते हैं.
भिंडी में फाइबर, फोलेट, पायरीडॉक्सीन, थियामिन, विटामिन सी,
विटामिन ए, तांबा, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, मैंगनीज,
जस्ता और फास्फोरस जैसे पौष्टिक तत्व पाए जाते है. जो हमारे शरीर के
लिए उचित गुणवत्ता का काम करते हैं.
भिंडी के चमत्कारी फायदे | जो आपको हैरान कर दे Ladys Finger | Okra
अब हम जानते है की भिंडी से मिलने वाले ऐसे शारीरिक फायदे.
ये फायदे जानकर आप भी हैरान रह जायेंगे.
भिंडी को अपने आहार में शामिल करके कैंसर को दूर भगाया जा सकता है.
खास करके कोलन कैंसर को. यह आंतों में मौजूद विषैले तत्वों को दूर करने
का काम करती है.
इससे आंतें पहले से बेहतर तरीके से काम करती हैं. और उनके काम करने की
क्षमता बढ़ जाती है. इससे कोलन कैंसर का खतरा कम हो जाता है. साथ ही
इसमें भरपूर फायबर होती है.
इसमें मौजूद लसलसा फायबर पाचनतंत्र को बहुत फायदेमंद होता है.
इससे पेट फूलना, कब्ज से राहत मिलती है साथ ही इसमें मौजूद
विटामिन – के की वजह से हड्डियों को भी मजबूती मिलती है.
दिल :-
भिंडी दिल को भी मजबूत रखती है. में मौजूद घुलनशील फाइबर रक्त में
कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने में मदद करता है. और इसमें मौजुद पैक्टिन कोलेस्ट्रोल
को कम करने में मदत करता है. जिससे दिल के रोगों का खतरा कम हो जाता है.
साथ ही हार्ट अटैक का भी खतरा काफी कम हो जाता है.
भिंडी के चमत्कारी फायदे | जो आपको हैरान कर दे | Ladys Finger
अनीमिया :-
भिंडी अनीमिया में भी बहोत लाभ पहुचाती है. इसमें मौजूद आयरन तत्व हमारे
शरीर के रक्त में हीमोग्लोबिन का निर्माण करते हैं. जिससे आप अनीमिया से
बचे रहते हैं.
इसके साथ ही भिंडी में मौजूद विटामिन के रक्त स्राव को रोकने में मदद करता है.
भिंडी में विटामिन – के के साथ साथ विटामिन- सी भी होता है. यह एंटीऑक्सीडेंट
से भरपूर होता है.
हरी सब्जी में सामान्य दिखनेवाली भिंडी कई गुणों का खजाना है. साथ ही कई
रोगों से हमारा बचाव कराती है. जैसे डायबीटीज, आँखों के रोग. गर्भावस्था में भी
बहुत फायदेमंद है.
इसमे में मौजूद फोलेट एक जरूरी पोषक तत्व है जो भ्रूण के मस्तिष्क विकास में
अहम भूमिका निभाता है.
भिंडी में मौजूद फोलिक एसिड की भरपूर मात्रा गर्भावस्था के चौथे से बारहवें
सप्ताह तक, भ्रूण के न्यरल ट्यूब के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
ये आपके वजन को कम करके आपके बालो के लिए भी बहुत फायदेमंद है.
साथ ही त्वचा को भी जवान बनाये रखने में काफी मदत करती है.
भिंडी के चमत्कारी फायदे | जो आपको हैरान कर दे | Ladys Finger
मराठी बोधकथा – नवरा बायको चे भांडण Good Thoughts In Marathi On Life
अहंकारी लोकांचा एक स्वभाव असतो की… फक्त भांडणासाठी भांडण व टिकेसाठीच टीका करीत असतात….!
विजय आणि वंदना या नवरा – बायकोला अशाच प्रकारची भांडणाची वाईट
सवय होती.
एकदा असेच त्यांचे खूप कडाक्याचे भांडण सुरु होते. या भांडणाला पाहून
शेजारचे… विलासराव या भांडणाला सोडविण्यासाठी आले आणि म्हणाले…
विजय, कशाला भांडत आहात…? भांडण सोडवायला मी काही मदत
करू का…?
मराठी बोधकथा | नवरा बायको चे भांडण | Good Thoughts Marathi
या भांडणखोर नवरा – बायको मध्ये बायको जास्त भांडणखोर होती.
ती रागारागाने विलासराव सोबतच भांडायला लागली आणि म्हणाली…
का हो…? आम्ही दोघेही कशाला भांडतो… हे माहित करून तुम्हाला
काय करायचे आहे…? आणि आम्ही कधी पासून व कशाला भांडण
करीत आहोत कशासाठी भांडतो आहोत…
यावर आपले कसे लक्ष राहते…?
खूप वेळा झाले… भांडण सुरू होताच विचारायला येता….!
तात्पर्य : कोणतेही हेतू नसलेले कार्य कधीच सफल होत नाही. जसे विनाकारण… हेतू नसलेले भांडण…!
Sunder Vichar | जिवंत आईचे श्राध्द एकदा नक्की वाचा | वाचुन धक्काच बसेल
आई – वडिलांच्या जिवंतपणीच
त्यांच्या सर्व इच्छा पूर्ण करणे…
म्हणजेच खरे श्राध्द…!
आज एका मिठाईच्या दुकानात माझा एक मित्र भेटला.
मला म्हणाला आज आईचा श्राध्द आहे…
म्हणून लाडू घेत आहे. आईला लाडू खूप आवडत होते.
मला अगदी आश्चर्याचा धक्काच बसला… कारण जेमतेम
१० मिनिटा पुर्वीच माझी आणि त्याच्या आईची भेट झालेली होती.
माझे आई सोबत जवळपास पाच मिनिटे बोलने झाले होते.
आई पण मार्केटला आलेली होती. आता मी काही बोलणार तेवढ्यात…
माझ्या मित्राची आई सामानाचा थैला हातात घेवून मिठाईच्या
दुकानात स्वतःच येवून पोहचली.
आपल्या मित्राला एक जोरदार थाप मारत मी विचारले….
अरे हि कसली मुर्खा सारखी गंमत करतोस…
मुर्खा आई तर तुझ्या बाजूलाच उभी आहे…
माझा मित्र आपल्या आईच्या दोन्ही खांद्यावर हात ठेवत
जोर जोरात हसत म्हणाला… अरे गळया… आईच्या मृत्यू
झाल्यानंतर कावळ्यांना… गायी वासरांना लाडू खाऊ घालण्यापेक्षा
मी आपल्या आईला तिच्या जिवंतपणीच संतुष्ट करी इच्छितो.
माझे असे मत आहे कि… जिवंतपणीच आई- वडिलांच्या सर्व इच्छा
पूर्ण करणे म्हणजेच खरे श्राध्द होय…!
Sunder Vichar, जिवंत आईचे श्राध्द एकदा नक्की वाचा | Suvichar
मित्रा…
आईला मधुमेह आहे… पण तिला गोड खायला खूप आवडते
म्हणून मी नेहमी फ्रीज मध्ये काही ना काही ठेवून जातो…!
जे जे आईला आवडते ते ते मी सर्व आणून ठेवतो.
श्रद्धेनी लोकं मंदिरात जातात… अगरबत्ती लावतात. अरे… मी पण लावतो रे…
कासव छाप अगरबत्ती… आई झोपायला जायच्या आधी… मच्छर पळवायला….
आई दररोज सकाळी धार्मिक पुस्तक वाचायला बसते…
मी दररोज तिचा चष्मा साफ करून देतो…
कारण माझा असा समज आहे कि, देवाचे फोटो साफ करत बसण्यापेक्षा…
आईचा चष्मा साफ करण्याने पुण्य अधिकच मिळेल.
मी विचारात पडलो… आणि माझा मित्र आपल्या आई सोबत निघून गेला.
मी तसाच विचार करत घरी आलो… पण मनात मी पुन्हा पुन्हा त्याच
गोष्टीचा विचार करत बसलो. मित्राच्या भक्तीत मला जरा जास्तच
तथ्य वाटले…
रिती रिवाज म्हणून आपण श्राध्द करतो… पूर्वजांच्या नावानी पोटभर
गोड धोड खातो…. पण खरोखरच ते त्यांच्यापर्यंत पोहचत नाही…
एवढे मात्र निश्चित आहे. त्या निमित्ताने त्यांची आठवण व्हावी म्हणून
हि प्रथा असावी… म्हणून त्यांच्या जिवंतपणीच त्यांच्यावर दुर्लक्ष करणे…
म्हणजे डोळे असून आंधळे होणे असे वाटते.
तसे पहिले तर आई – वडील आपल्या त्यांच्या उतार वयात पैश्यापेक्षा…
फक्त आपल्या कुटुंबात प्रेम आणि एक खरा आधार शोधतात.
या आजच्या स्पर्धेच्या युगात मुलांवर खूप जबादारी आणि वेगवेगळ्या प्रकारचे
तणाव असतात…! याची त्यांनाही पुरे पूर जाणीव असते. पण तरीही जी मुले
आपल्या आई- वडिलांची काळजी घेवू शकत नाही त्यांना देवही माफ करणार
नाही.
आज कितीतरी वृद्धः आई – वडील कुटुंबियांकडून अनादर झेलतांना आपण
पाहत असतोच. यावर कवी धर्मेश ची ओळ आहे… आधी माता मग पिता..
मग घेईन प्रभू नाम … मला नकोय दुसरे तीर्थ् धाम…!
संत कबीर असे म्हणतात…
जीते बाप को रोटी नां दे मरे बाद क्यो पछतांये || मुठभर चावल धाबेपर झोककर कव्वे को बाप बनाये ||
संत तुकोबाराय असे म्हणतात…
भुके नाही अन्न | मेल्यावरी पिंडदान || हे तो चाळवा चाळवि | केले आपणची ठेवी ||
प्रिय मित्र-मैत्रिणीनो….
मेल्यानंतर अन्न वाया घालवण्यापेक्षा
आपण आपल्या आईवडिलांना जिवंतपणी
काहीच कमी पडू देऊ नका…
Hartalika Teej, हरतालिका तीज व्रत, जानते है पूजा,व्रत,और कथा
ॐ नमः शिवाय जय हो माँ पार्वती
हरतालिका तीज का व्रत यह तीज का त्यौहार भाद्रपद मास शुक्ल की
तृतीया तिथि को मनाया जाता हैं.
इसे गौरी तृतीया व्रत भी कहते है. यह व्रत भगवान शिव और पार्वती को
समर्पित है.
Hartalika Teej, हरतालिका तीज व्रत | जानते है पूजा, व्रत, और पौराणिक कथा
खासतौर पर महिलाओं द्वारा यह त्यौहार मनाया जाता हैं. कम उम्र की
लड़कियों के लिए भी यह हरतालिका का व्रत श्रेष्ठ समझा गया हैं.
विधि-विधान से हरितालिका तीज का व्रत करने से जहाँ कुंवारी
कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है, वहीं विवाहित महिलाओं
को अखंड सौभाग्य मिलता है.
हरतालिका तीज में भगवान शिव, माता गौरी और गणेश जी की पूजा का
महत्व हैं. यह व्रत निराहार और निर्जला किया जाता हैं. शिव जैसा पति
पाने के लिए कुँवारी कन्या इस व्रत को विधि विधान से करती हैं.
महिलाओं में संकल्प शक्ति बढाता है हरितालिका तीज का व्रत :-
हरितालिका तीज का व्रत महिला प्रधान है. इस दिन महिलायें
बिना कुछ खायें – पिये व्रत रखती है. यह व्रत संकल्प शक्ती
का एक अनुपम उदाहरण है.
संकल्प अर्थात किसी कर्म के लिये मन मे निश्चित करना कर्म का
मूल संकल्प है. इस प्रकार संकल्प हमारी अन्तरीक शक्तियों का
सामोहिक निश्चय है. इसका अर्थ है… व्रत संकल्प से ही उत्पन्न
होता है.
व्रत का संदेश यह है कि हम जीवन मे लक्ष्य प्राप्ति का संकल्प लें.
संकल्प शक्ति के आगे असंम्भव दिखाई देता लक्ष्य संम्भव हो जाता है.
माता पार्वती ने जगत को दिखाया की संकल्प शक्ति के सामने ईश्वर
भी झुक जाता है.
अच्छे कर्मो का संकल्प सदा सुखद परिणाम देता है.
इस व्रत का एक सामाजिक संदेश विषेशतः महिलाओं के संदर्भ मे
यह है कि आज समाज मे महिलायें बिते समय की तुलना मे अधिक
आत्मनिर्भर व स्वतंत्र है. महिलाओं की भूमिका मे भी बदलाव आये है.
घर से बाहर निकलकर पुरुषों की भाँति सभी कार्य क्षेत्रों मे सक्रिय है.
ऎसी स्थिति मे परिवार व समाज इन महिलाओं की भावनाओ एवं इच्छाओं
का सम्मान करें, उनका विश्वास बढाएं, ताकि स्त्री व समाज सशक्त बनें.
हरतालिका पूजन प्रदोष काल में किया जाता हैं. प्रदोष काल अर्थात दिन रात के
मिलने का समय. हरतालिका पूजन के लिए शिव, पार्वती, गणेश एव रिद्धि सिद्धि
जी की प्रतिमा बालू रेत अथवा काली मिट्टी से बनाई जाती हैं.
विविध पुष्पों से सजाकर उसके भीतर रंगोली डालकर उस पर चौकी रखी जाती हैं.
चौकी पर एक अष्टदल बनाकर उस पर थाल रखते हैं. उस थाल में केले के पत्ते को
रखते हैं. सभी प्रतिमाओ को केले के पत्ते पर रखा जाता हैं.
सर्वप्रथम कलश के ऊपर नारियल रखकर लाल कलावा बाँध कर पूजन किया जाता हैं.
कुमकुम, हल्दी, चावल, पुष्प चढ़ाकर विधिवत पूजन होता हैं. कलश के बाद गणेश जी
की पूजा की जाती हैं.
उसके बाद शिव जी की पूजा जी जाती हैं. तत्पश्चात माता गौरी की
पूजा की जाती हैं. उन्हें सम्पूर्ण श्रृंगार चढ़ाया जाता हैं. इसके बाद
अन्य देवताओं का आह्वान कर षोडशोपचार पूजन किया जाता है.
इसके बाद हरतालिका व्रत की कथा पढ़ी जाती हैं. इसके पश्चात आरती की जाती हैं
जिसमे सर्वप्रथम गणेश जी की पुनः शिव जी की फिर माता गौरी की आरती की
जाती हैं.
Hartalika Teej, हरतालिका तीज व्रत | जानते है पूजा, व्रत, और पौराणिक कथा
इस दिन महिलाएं रात्रि जागरण भी करती हैं और कथा-पूजन के साथ कीर्तन करती हैं.
प्रत्येक प्रहर में भगवान शिव को सभी प्रकार की वनस्पतियां जैसे बिल्व-पत्र, आम के पत्ते,
चंपक के पत्ते एवं केवड़ा अर्पण किया जाता है. आरती और स्तोत्र द्वारा आराधना की जाती है.
हरतालिका व्रत का नियम हैं कि इसे एक बार प्रारंभ करने के बाद छोड़ा नहीं जा सकता.
प्रातः अन्तिम पूजा के बाद माता गौरी को जो सिंदूर चढ़ाया जाता हैं उस सिंदूर से
सुहागन स्त्री सुहाग लेती हैं. ककड़ी एवं हलवे का भोग लगाया जाता हैं.
उसी ककड़ी को खाकर उपवास तोडा जाता हैं. अंत में सभी सामग्री को एकत्र कर
पवित्र नदी एवं कुण्ड में विसर्जित किया जाता हैं.
निम्न नामो का उच्चारण कर बाद में पंचोपचार या सामर्थ्य हो तो
षोडशोपचार विधि से पूजन किया जाता है. पूजा दूसरे दिन सुबह
समाप्त होती है. तब महिलाएं द्वारा अपना व्रत तोडा जाता है और
अन्न ग्रहण किया जाता है.
हरतालिका व्रत पूजन की सामग्री :-
१ – फुलेरा विशेष प्रकार से फूलों से सजा होता है.
२ – गीली काली मिट्टी अथवा बालू रेत
३ – केले का पत्ता
४ – विविध प्रकार के फल एवं फूल पत्ते
५ – बेल पत्र, शमी पत्र, धतूरे का फल एवं फूल, तुलसी मंजरी
६ – जनेऊ , नाडा, वस्त्र
७ – माता गौरी के लिए पूरा सुहाग का सामग्री, जिसमे चूड़ी, बिछिया, काजल, बिंदी,
कुमकुम, सिंदूर, कंघी, महावर, मेहँदी आदि एकत्र की जाती हैं.
इसके अलावा बाजारों में सुहाग पूड़ा मिलता हैं जिसमे सभी सामग्री होती हैं.
भगवान शिव ने पार्वतीजी को उनके पूर्व जन्म का स्मरण कराने के
उद्देश्य से इस व्रत के माहात्म्य की कथा कही थी.
श्री भोलेशंकर बोले – हे गौरी…! पर्वतराज हिमालय पर स्थित गंगा के तट पर
तुमने अपनी बाल्यावस्था में बारह वर्षों तक अधोमुखी होकर घोर तप किया था.
इतनी अवधि तुमने अन्न न खाकर पेड़ों के सूखे पत्ते चबा कर व्यतीत किए.
माघ की विक्राल शीतलता में तुमने निरंतर जल में प्रवेश करके तप किया.
वैशाख की जला देने वाली गर्मी में तुमने पंचाग्नि से शरीर को तपाया.
श्रावण की मूसलधार वर्षा में खुले आसमान के नीचे बिना अन्न-जल
ग्रहण किए समय व्यतीत किया.
तुम्हारे पिता तुम्हारी कष्ट साध्य तपस्या को देखकर बड़े दुखी होते थे.
उन्हें बड़ा क्लेश होता था. तब एक दिन तुम्हारी तपस्या तथा पिता के
क्लेश को देखकर नारदजी तुम्हारे घर पधारे. तुम्हारे पिता ने हृदय से
अतिथि सत्कार करके उनके आने का कारण पूछा…
नारदजी ने कहा- गिरिराज…! मैं भगवान विष्णु के भेजने पर यहां
उपस्थित हुआ हूं.
आपकी कन्या ने बड़ा कठोर तप किया है. इससे प्रसन्न होकर वे
आपकी सुपुत्री से विवाह करना चाहते हैं. इस संदर्भ में आपकी राय
जानना चाहता हूं.
नारदजी की बात सुनकर गिरिराज गद्गइद हो उठे… उनके तो जैसे सारे
क्लेश ही दूर हो गए. प्रसन्नचित होकर वे बोले – श्रीमान्…! यदि स्वयं
विष्णु मेरी कन्या का वरण करना चाहते हैं. तो भला मुझे क्या आपत्ति
हो सकती है. वे तो साक्षात ब्रह्म हैं.
Hartalika Teej, हरतालिका तीज व्रत | जानते है पूजा, व्रत, और पौराणिक कथा
हे महर्षि…! यह तो हर पिता की इच्छा होती है कि उसकी पुत्री सुख – सम्पदा
से युक्त पति के घर की लक्ष्मी बने. पिता की सार्थकता इसी में है कि
पति के घर जाकर उसकी पुत्री पिता के घर से अधिक सुखी रहे.
तुम्हारे पिता की स्वीकृति पाकर नारदजी विष्णु के पास गए और उनसे
तुम्हारे ब्याह के निश्चित होने का समाचार सुनाया. मगर इस विवाह संबंध
की बात जब तुम्हारे कान में पड़ी तो तुम्हारे दुख का ठिकाना न रहा.
तुम्हारी एक सखी ने तुम्हारी इस मानसिक दशा को समझ लिया और
उसने तुमसे उस विक्षिप्तता का कारण जानना चाहा. तब तुमने बताया –
मैंने सच्चे हृदय से भगवान शिवशंकर का वरण किया है, किंतु मेरे पिता ने
मेरा विवाह विष्णुजी से निश्चित कर दिया. मैं विचित्र धर्म-संकट में हूं.
अब क्या करूं…? प्राण छोड़ देने के अतिरिक्त अब कोई भी उपाय शेष नहीं
बचा है.
तुम्हारी सखी बड़ी ही समझदार और सूझबूझ वाली थी.
उसने कहा – सखी…! प्राण त्यागने का इसमें कारण ही क्या है…?
संकट के मौके पर धैर्य से काम लेना चाहिए. नारी के जीवन की
सार्थकता इसी में है कि पति – रूप में हृदय से जिसे एक बार स्वीकार
कर लिया, जीवन पर्यंत उसी से निर्वाह करें.
सच्ची आस्था और एकनिष्ठा के समक्ष तो ईश्वर को भी समर्पण करना
पड़ता है.
मैं तुम्हें घनघोर जंगल में ले चलती हूं, जो साधना स्थली भी हो और जहां
तुम्हारे पिता तुम्हें खोज भी न पाएं. वहां तुम साधना में लीन हो जाना.
मुझे विश्वास है कि ईश्वर अवश्य ही तुम्हारी सहायता करेंगे.
तुमने ऐसा ही किया. तुम्हारे पिता तुम्हें घर पर न पाकर बड़े दुखी तथा
चिंतित हुए. वे सोचने लगे कि तुम जाने कहां चली गई.
मैं विष्णुजी से उसका विवाह करने का प्रण कर चुका हूं. यदि भगवान विष्णु
बारात लेकर आ गए और कन्या घर पर न हुई तो बड़ा अपमान होगा.
मैं तो कहीं मुंह दिखाने के योग्य भी नहीं रहूंगा. यही सब सोचकर
गिरिराज ने जोर – शोर से तुम्हारी खोज शुरू करवा दी.
इधर तुम्हारी खोज होती रही और उधर तुम अपनी सखी के साथ नदी के
तट पर एक गुफा में मेरी आराधना में लीन थीं.
भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र था. उस दिन तुमने रेत के
शिवलिंग का निर्माण करके व्रत किया. रात भर मेरी स्तुति के गीत
गाकर जागीं.
तुम्हारी इस कष्ट साध्य तपस्या के प्रभाव से मेरा आसन डोलने लगा.
मेरी समाधि टूट गई. मैं तुरंत तुम्हारे समक्ष जा पहुंचा और तुम्हारी
तपस्या से प्रसन्न होकर तुमसे वर मांगने के लिए कहा…
तब अपनी तपस्या के फलस्वरूप मुझे अपने समक्ष पाकर तुमने
कहा – मैं हृदय से आपको पति के रूप में वरण कर चुकी हूं.
यदि आप सचमुच मेरी तपस्या से प्रसन्न होकर आप
यहां पधारे हैं तो मुझे अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार कर लीजिए.
तब मैं ‘ तथास्तु ‘ कह कर कैलाश पर्वत पर लौट आया. प्रातः होते ही
तुमने पूजा की समस्त सामग्री को नदी में प्रवाहित करके अपनी
सहेली सहित व्रत का पारणा किया.
Hartalika Teej, हरतालिका तीज व्रत | जानते है पूजा, व्रत, और पौराणिक कथा
उसी समय अपने मित्र – बंधु व दरबारियों सहित गिरिराज तुम्हें
खोजते-खोजते वहां आ पहुंचे और तुम्हारी इस कष्ट साध्य तपस्या
का कारण तथा उद्देश्य पूछा… उस समय तुम्हारी दशा को देखकर
गिरिराज अत्यधिक दुखी हुए और पीड़ा के कारण उनकी आंखों में
आंसू उमड़ आए थे.
तुमने उनके आंसू पोंछते हुए विनम्र स्वर में कहा- पिताजी…!
मैंने अपने जीवन का अधिकांश समय कठोर तपस्या में बिताया है…
मेरी इस तपस्या का उद्देश्य केवल यही था कि मैं महादेव
को पति के रूप में पाना चाहती थी…!
Hartalika Teej, हरतालिका तीज व्रत | जानते है पूजा, व्रत, और पौराणिक कथा
आज मैं अपनी तपस्या की कसौटी पर खरी उतर चुकी हूं.
आप क्योंकि विष्णुजी से मेरा विवाह करने का निर्णय ले चुके थे.
इसलिए मैं अपने आराध्य की खोज में घर छोड़कर
चली आई. अब मैं आपके साथ इसी शर्त पर घर जाऊंगी कि
आप मेरा विवाह विष्णुजी से न करके महादेवजी से करेंगे.
गिरिराज मान गए और तुम्हें घर ले गए.
कुछ समय के पश्चात शास्त्रोक्त विधि-विधानपूर्वक
उन्होंने हम दोनों को विवाह सूत्र में बांध दिया.
हे पार्वती…! भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को तुमने मेरी आराधना
करके जो व्रत किया था, उसी के फलस्वरूप मेरा तुमसे विवाह हो सका.
इसका महत्व यह है कि मैं इस व्रत को करने वाली कुंआरियों को
मनोवांछित फल देता हूं. इसलिए सौभाग्य की इच्छा करने वाली
प्रत्येक युवती को यह व्रत पूरी एकनिष्ठा तथा आस्था से करना चाहिए.
हरतालिका तीज व्रत पूजा विधि :-
हरतालिका तीज प्रदोषकाल में किया जाता है. सूर्यास्त के
बाद के तीन मुहूर्त को प्रदोषकाल कहा जाता है. यह दिन
और रात के मिलन का समय होता है.
हरतालिका पूजन के लिए भगवान शिव, माता पार्वती और
भगवान गणेश की बालू रेत एवं काली मिट्टी की प्रतिमा
हाथों से बनाएं.
पूजा स्थल को फूलों से सजाकर एक चौकी रखें और
उस चौकी पर केले के पत्ते रखकर भगवान शंकर,
माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें.
इसके बाद देवताओं का आह्वान करते हुए भगवान शिव,
माता पार्वती और भगवान गणेश का षोडशोपचार
पूजन करें.
सुहाग की पिटारी में सुहाग की सारी वस्तु रखकर माता पार्वती को
चढ़ाना इस व्रत की मुख्य परंपरा है. इसमें शिव जी को धोती और
अंगोछा चढ़ाया जाता है.
यह सुहाग सामग्री सास के चरण स्पर्श करने के बाद ब्राह्मणी और
ब्राह्मण को दान देना चाहिए.
इस प्रकार पूजन के बाद कथा सुनें और रात्रि जागरण करें.
आरती के बाद सुबह माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं और
ककड़ी-हलवे का भोग लगाकर व्रत खोलें.
हर हर महादेव ॐ नमः शिवाय जय हो माँ पार्वती सुप्रभात
Jai Bholenath | भगवान शंकर रूद्र रूप और उनके ग्यारह नाम
श्रावन के महीने में भोलेनाथ की पूजा की जाती है… श्रावन का महिना महादेव का ही होता है.
इस महीने में महादेव… भोलेनाथ की विशेष पूजा की जाती है.
महादेव के भक्तो के लिए ये महिना और इस महीने में आनेवाले सोमवार का बड़ा विशेष महत्व होता है…!
इस श्रावन के महीने में आज मैं आपको भोलेनाथ के ग्यारह नाम
और उनके अर्थ के बारे में बता रहा हूँ.
महादेव का एक रूप रूद्र भी है… रूद्र का अर्थ होता है – रुत…
मतलब दु:खों को नाश करने वाला…! इसीलिए महादेव…
भोलेनाथ को दु:खों का अंत करनेवाले
भगवान् के रूप में मानते है और पूजते भी है.
Jai Bholenath | भगवान शंकर रूद्र रूप और उनके ग्यारह नाम
शास्त्रों में कहा गया है की मनुष्य के जीवन में दुःख तभी आता है
जब मनुष्य तन से… मन से… या फिर कर्म से… किसी ना किसी
तरह अपवित्र होता है.
महादेव के रुद्र रूप की आराधना का महत्व यही है कि इससे व्यक्ति
का चित्त पवित्र रहता है और वह ऐसे कर्म और विचारों से दूर होता है.
जो मन में बुरे भाव पैदा करे.
शास्त्रों के मुताबिक भोलेनाथ अलग-अलग ग्यारह रुद्र रूपों में
दु:खों का नाश करते हैं.
महादेव के ये ग्यारह रूप एकादश रुद्र के नाम से भी जाने जाते हैं.
1) शम्भू :-
शास्त्रों के अनुसार महादेव का यह रुद्र रूप साक्षात ब्रह्म है…
इस रूप में ही भोलेनाथ जगत की रचना, पालन और संहार करते हैं.
2) पिनाकी :-
ज्ञान शक्ति रुपी चारों वेदों के स्वरुप माने जाने वाले पिनाकी रुद्र
दु:खों का अंत करते हैं.
3) गिरीश :-
कैलाशवासी होने से रुद्र का तीसरा रुप गिरीश कहलाता है.
इस रुप में रुद्र सुख और आनंद देने वाले माने गए हैं.
4) स्थाणु :-
समाधि, तप और आत्मलीन होने से रुद्र का चौथा अवतार स्थाणु
कहलाता है. इस रुप में पार्वती रूप शक्ति बाएं भाग में विराजित
होती है.
5) भर्ग :-
भगवान रुद्र का यह रुप बहुत तेजोमयी है…
इस रुप में रुद्र हर भय और पीड़ा का नाश करने वाले होते हैं.
जय भोलेनाथ, भगवान शंकर रूद्र रूप और उनके ग्यारह नाम | महादेव
6) भव :-
रुद्र का भव रुप ज्ञान बल, योग बल और भगवत प्रेम के रुप में
सुख देने वाला माना जाता है.
7) सदाशिव :-
रुद्र का यह स्वरुप निराकार ब्रह्म का साकार रूप माना जाता है.
जो सभी वैभव… सुख और आनंद देने वाला माना जाता है.
8) शिव :-
यह रुद्र रूप अंतहीन सुख देने वाला यानि कल्याण करने वाला
माना जाता है. मोक्ष प्राप्ति के लिए शिव आराधना महत्वपूर्ण
मानी जाती है.
9) हर :-
इस रुप में नाग धारण करने वाले रुद्र शारीरिक, मानसिक और
सांसारिक दु:खों को हर लेते हैं. नाग रूपी काल पर इन का
नियंत्रण होता है.
10 ) शर्व :-
काल को भी काबू में रखने वाला यह रुद्र रूप शर्व कहलाता है.
11) कपाली :-
कपाल रखने के कारण रुद्र का यह रूप कपाली कहलाता है.
इस रुप में ही दक्ष का दंभ नष्ट किया था. किंतु प्राणीमात्र के
लिए रुद्र का यही रूप समस्त सुख देने वाला माना जाता है.
भोलेनाथ को किसी भी रूप मे पूजना कल्याणकारी ही है.
जय भोलेनाथ, भगवान शंकर रूद्र रूप और उनके ग्यारह नाम | महादेव